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बीजेपी और कांग्रेस में 'वक्त है बदलाव का', बुज़ुर्गों को किनारे कर युवाओं को कमान देने की तैयारी

Anurag Shrivastav | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 22, 2019, 6:47 PM IST
बीजेपी और कांग्रेस में 'वक्त है बदलाव का', बुज़ुर्गों को किनारे कर युवाओं को कमान देने की तैयारी
कांग्रेस-बीजेपी में बुज़ुर्गों को किनारे लगाने की तैयारी

नगरीय निकाय चुनाव (Urban body elections) से पहले दोनों ही सियासी दल अपने को वार्मअप कर रहे हैं. बीजेपी (bjp) ने मंडल अध्यक्ष के लिए उम्र की सीमा चालीस साल निर्धारित की है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (madhya pradesh) में कांग्रेस और बीजेपी (congress & bjp) में युवा टीम (youth team) तैयार करने की होड़ तेज़ हो गई है.दोनों ने संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है.कांग्रेस, नगरीय निकाय चुनाव (Urban body elections) से पहले जिलों की कमान बुजुर्ग नेताओं से लेकर युवा हाथों में सौंपना चाहती है. बीजेपी भी संगठन में युवा चेहरों को आगे ला रही है. बीजेपी संगठन चुनाव और कांग्रेस टैलेंट सर्च कर रही है.

सियासी वॉर्मअप
बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है. नगरीय निकाय चुनाव से पहले दोनों ही सियासी दल अपने को वार्मअप कर रहे हैं. बीजेपी ने मंडल अध्यक्ष के लिए उम्र की सीमा चालीस साल निर्धारित की है.जिला जिला अध्यक्ष के लिए पचास और प्रदेश अध्यक्ष के लिए उम्र की सीमा को साठ साल किया गया है.ऐसे में अब तय है कि बीजेपी की कमान किसी युवा हाथों में होगी. इसका फैसला पार्टी जल्द ले लेगी.यानि कि अब बीजेपी में बुजुर्ग नेता संगठन के मार्गदर्शन मंडल शामिल होंगे.
बीजेपी का कहना है संगठन चुनाव हर तीन साल में होते हैं.मंडल अध्यक्ष के बाद अब ज़िलाध्यक्षों का चुनाव तीस नवंबर तक होगा. प्रदेश अध्यक्ष का फैसला संगठन और पार्टी नेताओं की मंशा पर होगा.

बुज़ुर्गों और फूलछाप कांग्रेसियों से दूरी
कांग्रेस संगठन में भी बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है.पार्टी ने सालों से जिला कांग्रेस की कमान संभाल रहे पार्टी के बुजुर्ग नेताओं को किनारे करने की तैयारी कर ली है. कमान अब युवा हाथों में होगी. पार्टी ने जो प्लान तैयार किया है, उसके मुताबिक-नगरीय निकाय चुनाव से पहले संगठन में ये बदलाव कर लिया जाएगा. अच्छे काम करने वालों को पार्टी प्रमोट करेगी. जिला अध्यक्षों की नियुक्ति का रिव्यू होगा. इसमें पार्टी 50+10 का फॉर्मूला तय कर रही है.यानि जिलों की कमान साठ से ज्यादा वालों से ले ली जाएगी. नया जिला अध्यक्ष बनाते वक्त उसके पार्टी में दिए योगदान, पांच साल सक्रियता, चुनाव में भूमिका, पॉजिटिव छवि और दौरों की क्षमता को ध्यान में रखा जाएगा.पार्टी ने फूल छाप कांग्रेसियों से इस बार दूरी बनाने की प्लान बनाया है.इसके लिए स्थानीय स्तर पर फीडबैक लिया जाएगा.

नगरीय निकाय चुनाव से पहले फेरबदल
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कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया ने कहा है कि पार्टी नगरीय निकाय चुनाव से पहले संगठन में नये फॉर्मूले पर बड़े बदलाव कर लेगी.बहरहाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से बीजेपी और लोकसभा चुनाव परिणामों से कांग्रेस सबक लेकर अपनी युवा टीम तैयार कर रही है. ताकि आगामी नगरीय निकाय और उसके बाद 2023 में होने वाले चुनाव के लिए अभी से संगठन को मजबूत किया जा सके.

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First published: November 22, 2019, 6:47 PM IST
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