कौन हैं भीमा नायक, जिसे याद करके पीएम मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान का किया समापन

पीएम मोदी ने 1857 के स्वतंत्रता सेनानी भीमा नायक को याद करते हुए कहा कि जैसे मेरठ में मंगल पांडे ने योगदान दिया था, उसी तरह मध्य प्रदेश में भीमा नायक ने भी 1857 की क्रांति में योगदान दिया था.

News18Hindi
Updated: May 17, 2019, 6:21 PM IST
कौन हैं भीमा नायक, जिसे याद करके पीएम मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान का किया समापन
भीमा नायक
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Updated: May 17, 2019, 6:21 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019 के सातवें और आखिरी चरण के चुनाव प्रचार के आखिरी दिन पीएम मोदी और अमित शाह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान पीएम मोदी ने पूरे चुनाव अभियान को सकारत्मक बताया. पीएम मोदी ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाने वाले स्‍वतंत्रता सेनानी भीमा नायक को याद करते हुए कहा कि जैसे मेरठ के मंगल पांडे ने योगदान दिया है उसी तरह मध्य प्रदेश में भीमा नायक ने भी योगदान दिया था.

दरअसल, पीएम मोदी ने बताया कि उनके चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत मेरठ से हुआ और एमपी के खरगोन में उनकी आखिरी चुनावी सभा हुई. दोनों का जुड़ाव स्वतंत्रता संग्राम से था. इससे पहले पीएम मोदी ने खरगोन की सभा में भी भीमा नायक को याद किया था.



'निमाड़ के रॉबिनहुड'
निमाड़ के रॉबिनहुड के नाम से मशहूर भीमा नायक 1857 की क्रांति के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ अपनी छाप छोड़ी थी. भीमा नायक एक योद्धा थे. कहा जाता है कि आजादी की जंग में भीमा नायक ने अकेले अपने बूते अंग्रेजी शासन की चूलें हिला दी थीं. अंग्रेज भीमा नायक के नाम से कांपते थे. उन्होंने आदिवासियों को एकुजट किया था. भीमा नायक के जीवन को लेकर अब भी कई तथ्य अबूझ ही हैं. जैसे कि भीमा नायक के वास्तविक फोटो को लेकर भी अब तक कोई साक्ष्य नहीं है. मौजूद फोटो या स्कैच काल्पनिक हैं.

शोधों के अनुसार भीमा नायक का कार्य क्षेत्र बड़वानी रियासत से वर्तमान महाराष्ट्र के खानदेश तक रहा है. 1857 में हुए अंबापानी युद्ध में भीमा की महत्वपूर्ण भूमिका थी. अंग्रेज जब भीमा को ऐसे नहीं पकड़ पाए तो उन्हें उनके ही किसी करीबी की मुखबिरी पर धोखे से पकड़ा गया था. उनके योगदान और मौत को लेकर कई तरह के शोध हुए हैं.

उसी शोध में एक तथ्य यह भी सामने आया है कि 1857 क्रांति में तात्या टोपे जब निमाड़ आए थे तो उनकी मुलाकात भीमा नायक से हुई थी. एक अन्य शोध के अनुसार कुछ साल पहले भीमा नायक का मृत्यु प्रमाण-पत्र पहली बार सामने आया था. इसमें ये जिक्र था कि उनकी मौत 29 दिसंबर 1876 को पोर्ट ब्लेयर में हुई थी.

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