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पुलिस कमिश्नर सिस्टम : IAS -IPS लॉबी में फिर ठनी, इस एक अधिकार पर नहीं बन रही बात

पुलिस कमिश्नर सिस्टम : IAS -IPS लॉबी में फिर ठनी, इस एक अधिकार पर नहीं बन रही बात

BHOPAL. पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने के सिलसिले में भोपाल में हाई लेवल मीटिंग हुई.

BHOPAL. पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने के सिलसिले में भोपाल में हाई लेवल मीटिंग हुई.

MP Administrative News : मध्य प्रदेश में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की मांग अरसे से की जा रही है. लेकिन हर बार IAS लॉबी इसमें आड़े आ जाती है. हाल में सीएम शिवराज ने भोपाल और इंदौर में इसे लागू करने का ऐलान किया है. लेकिन प्रदेश की IAS और IPS लॉबी में अधिकारों के लिए फिर रस्साकशी शुरू हो गयी है.

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भोपाल. भोपाल और इंदौर में क्या पुलिस कमिश्नर सिस्टम (Police Commissioner System) लागू हो पाएगा. इसमें अभी संशय ही है क्योंकि प्रदेश की IAS लॉबी अपने अधिकार पुलिस को नहीं देना चाहती. सीएम शिवराज सिंह चौहान घोषणा कर चुके हैं. लेकिन इस बार भी IAS और IPS के बीच अधिकारों को लेकर टकराहट जारी है.

राजधानी भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ऐलान के बाद अब मध्यप्रदेश के ब्यूरोक्रेट्स में अधिकारों और वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है. कई मुद्दों को लेकर IAS और IPS लॉबी आमने सामने हैं. इस मामले में प्रदेश के आला अफसरों की हाई लेवल बैठक हुई. इसमें मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, डीजीपी विवेक जौहरी, अपर मुख्य सचिव गृह डा. राजेश राजौरा मौजूद थे.

पुलिस मांगे MORE
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के ऐलान के बाद पुलिस मुख्यालय ने पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने के लिए एक ड्राफ्ट गृह मंत्रालय को भेजा है. उस ड्राफ्ट में पुलिस ने वो अधिकार मांगे हैं जो अभी तक प्रशासन के पास हैं. बस यही बात IAS अफसरों के गले नहीं उतर रही. इन्हीं अधिकारों के लिए अब IAS और IPS लॉबी में ठन गई है. IAS लॉबी वो अधिकार देने के लिए तैयार नहीं. प्रदेश के IAS अफसर पुलिस को सीमित अधिकार देने के पक्ष में है. जबकि पुलिस वो पूरे अधिकार चाहती है जो पुलिस कमिश्नर सिस्टम के लिए जरूरी हैं. इसलिए अब पुलिस मुख्यालय के नये ड्राफ्ट के साथ 1999 में बनाए गए ड्राफ्ट की भी जांच की जा रही है.

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इन अधिकारों के लिए IAS-IPS लॉबी में तनातनी
सूत्रों के अनुसार पुलिस मुख्यालय ने अपने ड्राफ्ट में अभी मजिस्ट्रियल अधिकार देने का प्रस्ताव भेजा है. इसमें
– धारा 144 और कर्फ्यू लगाने का अधिकार
-धारा 151 के तहत शांति भंग करने की आशंका में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर 14 दिन के लिए जेल भेजने का अधिकार
– धारा 107/16 के तहत निरोधात्मक कार्रवाई का अधिकार
– गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट में सीधे कार्रवाई का अधिकार
– कारागार से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार
– संगठित अपराध और समाज विरोधी काम करने के मामलों में अब सीधा फैसले लेने का अधिकार
– राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई करने का अधिकार
– धरना प्रदर्शन की अनुमति देने न देने का अधिकार शामिल हैं.

सिर्फ मजिस्ट्रियल अधिकार मांगे, IAS को वो भी मंजूर नहीं
पुलिस ने आबकारी, नगर निगम, परिवहन से जुड़े अधिकार पुलिस अपने ड्राफ्ट में शामिल नहीं किए हैं. यानि ये अधिकार उसने नहीं मांगे हैं. लेकिन IAS लॉबी मजिस्ट्रियल अधिकार भी पुलिस को देने के लिए तैयार नहीं है. यही वजह है कि हर बार पुलिस कमिश्नर सिस्टम फाइलों में अटक जाता है. अभी भी इन अधिकारों को लेकर लड़ाई चल रही है.

ड्राफ्ट फायनल करने की कवायद
मुख्यमंत्री की मुहर के बाद ही इंदौर भोपाल में कमिश्नर सिस्टम लागू होगा. इसके लिए ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने की कवायद तेज हो गई है. कई मामलों में अभी भी पेंच फंस रहा है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस ड्राफ्ट पर फाइनल मुहर लगाएंगे. इससे पहले 1999 में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने का प्रयास किया गया था. उस वक्त भी पुलिस मुख्यालय ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया था लेकिन अधिकारों की इसी लड़ाई के कारण तब भी पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू नहीं हो पाया था. अब सरकार भोपाल और इंदौर में पुलिस कमिश्नर सिस्टम जल्दी लागू करना चाहती है.

Tags: CM Shivraj Singh Chauhan, Madhya pradesh latest news, Madhya pradesh Police

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