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राजनीतिक दलों का अखड़ा बना बुंदेलखंड, सियासी पारा आसमान पर

बुंदेलखंड

बुंदेलखंड

बुंदेलखंड में जातीय समीकरण के हिसाब से एससी/एसटी वोटर्स सबसे ज्यादा करीब 32 फीसदी हैं. यहां 18 फीसदी सवर्ण, 26 फीसदी ओबीसी और 24 फीसदी अन्य मतदाता हैं.

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मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड अंचल सियासी पार्टियों का सबसे बड़ा अखाड़ा बन गया है. यहां की 26 सीटों पर बीजेपी और कांग्रेस ने पूरी ताकत झोंक दी है. मौजूदा दौर में यहां का सियासी मिजाज़ भी बदला हुआ है. सभी पार्टियों का चुनावी समीकरण भी बिगड़ गया है.


बुंदेलखंड की पहचान सूखा, बेरोजगारी और पलायन के लिए होती है. यहां के विकास के लिए करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाया भी गया,लेकिन आज भी हालात नहीं बदले. यहां के पांच ज़िलों सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, दमोह और पन्ना में कुल 26 विधान सभा सीटें हैं. इनमें से 20 बीजेपी के पास और 6 कांग्रेस के पास हैं.


बुंदेलखंड में जातीय समीकरण के हिसाब से एससी/एसटी वोटर्स सबसे ज्यादा करीब 32 फीसदी हैं. यहां 18 फीसदी सवर्ण, 26 फीसदी ओबीसी और 24 फीसदी अन्य मतदाता हैं. इनमें मुस्लिम और जैन शामिल हैं.यहां जातिगत समीकरण के आधार पर बसपा तीसरे नंबर की पार्टी है.


सागर ज़िले की 8 विधानसभा सीटों से गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, प्रदीप लारिया और कांग्रेस से गोविंद सिंह राजपूत, सुरेंद्र चौधरी, प्रभु सिंह ठाकुर आते हैं. 7 सीटों बीना,खुरई, सुरखी, रेहली, नरयावली, सागर और बंडा पर बीजेपी का कब्ज़ा है. सिर्फ देवरी सीट कांग्रेस के पास है. बीजेपी ने सुरखी सीट सबसे कम 141 वोटों से जीती थी.खुरई सीट से भूपेंद्र सिंह और सागर सीट से शैलेंद्र जैन दस हजार से कम वोटों से जीते थे.ऐसे में कांग्रेस की खास नजर सुरखी, खुरई और सागर सीट के साथ आरक्षित सीट बीना और नरयावली पर है.बीना सीट पर दलित आंदोलन का असर देखा जा रहा है. वहीं देवरी सीट पर सपाक्स आंदोलन के बाद जातिगत समीकरण बदल गए हैं.


टीकमगढ़ ज़िले में 5 विधान सभा सीट हैं. इस जिले से बीजेपी के कद्दावर नेता हरिशंकर खटीक और कांग्रेस से पूर्व मंत्री अखंडप्रताप यादव, पूर्व मंत्री यादवेंद्र सिंह बुंदेला, ब्रजेंद्र सिंह राठौर आते हैं. 3 सीट टीकमगढ़, पृथ्वीपुर और निवाड़ी पर बीजेपी का कब्ज़ा है. 2 सीट जतारा और खरगापुर कांग्रेस के पास है.जतारा सीट पर बीजेपी के हरिशंकर खटीक 233 वोट से हारे थे. दस हजार से कम वोटों से पृथ्वीपुर सीट से बीजेपी के अनिता मालवीय और खरगापुर सीट से कांग्रेस सुरेंद्र सिंह जीते थे. सवर्ण और दलित आंदोलन का अधिकांश सीटों पर असर है. टीकमगढ़ और पृथ्वीपुर में बीजेपी में फूट है. निवाड़ी जिला बनने के बाद भी यहां सपा की काफी मजबूत स्थिति बताई जा रही है.






छतरपुर ज़िले में 6 विधानसभा सीटें हैं. इस जिले से नेता ललिता यादव, पुष्पेंद्र प्रताप सिंह और कांग्रेस आलोक चतुर्वेदी, सत्यव्रत चतुर्वेदी आते हैं. यहां 4 सीट महाराजपुर, आरडी प्रजापति, छतरपुर, बिजावर और मलहरा पर बीजेपी काबिज है. सिर्फ 1 सीट राजनगर कांग्रेस के पास है. बीजेपी ने छतरपुर सीट 2217 और मलहरा सीट 1514 वोटों से जीती थी.


दस हजार से कम वोट से कांग्रेस ने राजनगर सीट को जीता था.यहां कांग्रेस में ज़बरदस्त गुटबाज़ी है. एक गुट पूर्व राज्यसभा सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी और उनके बेटे का है और दूसरा उनके भाई आलोक चतुर्वेदी उर्फ़ पज्जन भैया का है. राजनगर से कांग्रेस के कुंवर सिंह उर्फ़ नाती राजा का खेल बागी नेता प्रकाश पांडे बिगाड़ सकते हैं.मलहरा सीट से उमा भारती के भतीजे सिद्धार्थ भी दावेदारी जता रहे हैं.


 दमोह जिले में 4 विधानसभा सीटें हैं.इस ज़िले का प्रतिनिधित्व बीजेपी के जयंत मलैया, डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया और कांग्रेस से अजय टंडन, पुष्पेंद्र सिंह हजारी कर रहे हैं. यहां 3 सीट पथरिया, दमोह और हटा बीजेपी के पास है.सिर्फ एक सीट जबेरा कांग्रेस के पास है. पूरे ज़िले में बेरोज़गारी सबसे बड़ा मुद्दा है.


पन्ना ज़िले में 3 विधानसभा सीटें हैं. बीजेपी से मंत्री कुसुम सिंह मेहदेले और कांग्रेस से मुकेश नायक हैं. यहां 2 सीट गुन्नौर और पन्ना बीजेपी के कब्जे में हैं. सिर्फ 1 सीट पवई कांग्रेस के पास है.गुनौर आरक्षित सीट का इतिहास है कि यहां कोई विधायक रिपीट नहीं हो पाता है. पन्ना सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के कई दावेदार हैं, लेकिन सपा की स्थिति भी इस सीट पर मजबूत बताई जा रही है.

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