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सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस : 'बंधक विधायकों की गैर मौजूदगी में नहीं हो सकता फ्लोर टेस्ट'
Bhopal News in Hindi

News18 Madhya Pradesh
Updated: March 17, 2020, 5:16 PM IST
सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस : 'बंधक विधायकों की गैर मौजूदगी में नहीं हो सकता फ्लोर टेस्ट'
एमपी में सियासी संकट-कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में दायर की याचिका

बीजेपी इस मांग पर अड़ी है कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में है इसलिए फ्लोर टेस्ट कराया जाए. कांग्रेस इसका लगातार ये जवाब दे रही है कि अगर सरकार अल्पमत में है तो बीजेपी उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए.

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भोपाल. बीजेपी (bjp) के बाद अब कांग्रेस (congress) भी सुप्रीम कोर्ट (supreme court) पहुंच गयी है. मध्य प्रदेश में जारी सियासी संकट के बीच कांग्रेस कमेटी (mpcc) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इसमें उसने बीजेपी पर कांग्रेस के16 विधायकों को बंधक बनाए जाने का आरोप लगाया है. पार्टी ने कहा उन विधायकों की मौजदगी में ही विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराया जा सकता है.

मध्यप्रदेश में जारी राजनीति जंग इन दिनों प्रदेश से निकलकर दूसरे राज्यों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंची है. बीजेपी नेता पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान के बाद आज मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. इसमें उसने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि उसने कांग्रेस के 16 विधायकों को अपने कब्ज़े में रखा है. 16 विधायकों की अनुपस्थिति में बहुमत परीक्षण नहीं हो सकता.ये वो सिंधिया समर्थक विधायक हैं जो बेंगलुरू में हैं.

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की-



- सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और कर्नाटक सरकार को आदेश दे कि वो मध्य कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारियों को 16 विधायकों से मिलने और बात करने की इजाजत दे जो कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं.



- इस तरह कांग्रेस के 16 विधायकों को बंधक रखना गैरकानूनी, असंवैधानिक है और संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 और कानून के शासन के खिलाफ है.

- 15 वीं मध्य प्रदेश विधान सभा के बजट सत्र में भाग लेने के लिए विधायकों को सक्षम किया जाए और अनुमति दी जाए.

- कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से निवेदन किया कि वो आदेश दे कि विश्वास मत तभी हो सकता है जब 15 वीं मध्य प्रदेश विधान सभा के सभी निर्वाचित विधायक उपस्थित हों.

- पार्टी ने ये मांग भी रखी कि राज्यपाल के निर्देश को अवैध, असंवैधानिक घोषित किया जाए.

- अगर कांग्रेस के 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है तो उनकी सीटें खाली हो गई हैं. ऐसे में विश्वास मत तभी हो सकता है जब उक्त 22 निर्वाचन क्षेत्रों के मतदाताओं का प्रतिनिधित्व हो और ये कानून के अनुसार रिक्त सीटों के लिए उप-चुनाव आयोजित करके हो सकता है.

बीजेपी की याचिका पर सरकार को नोटिस
इससे पहले सोमवार को फ्लोर टेस्ट कराने में नाकाम रही बीजेपी के नेता शिवराज सिंह चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. उसमें 48 घंटे के अंदर कमलनाथ सरकार का फ्लोर टेस्ट कराने का निवेदन कोर्ट से किया गया था. शिवराज की याचिका पर आज सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने मध्‍य प्रदेश की कमलनाथ सरकार, स्‍पीकर और कांग्रेस पार्टी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. इस मामले पर कल 18 मार्च को फिर सुनवाई होगी.

फ्लोर टेस्ट पर अटकी सुई
मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों फ्लोर टेस्ट शब्द सबसे ज़्यादा सुनाई दे रहा है. कांग्रेस में बगावत और सिंधिया के बीजेपी में जाने के बाद उनके समर्थक कांग्रेस विधायक बेंगलुरु में हैं. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ने उन्हें बंधक बनाया है. जबकि विधायकों के जारी कथित वीडियो में वो कह रहे हैं कि हम अपनी मर्ज़ी से आए हैं.बीजेपी इस मांग पर अड़ी है कि कमलनाथ सरकार अल्पमत में है इसलिए फ्लोर टेस्ट कराया जाए. कांग्रेस इसका लगातार ये जवाब दे रही है कि अगर सरकार अल्पमत में है तो बीजेपी उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए. उसका ये भी आरोप है कि बीजेपी ने सिंधिया समर्थक विधायकों को बंधक बना रखा है. उनके आने पर ही फ्लोर टेस्ट हो पाएगा.

(दिल्ली से रिपोर्टर सुशील पांडे का इनपुट)

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First published: March 17, 2020, 4:49 PM IST
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