MP का सियासी संकट : सोनिया-राहुल को नहीं थी उम्‍मीद की कांग्रेस छोड़ देंगे सिंधिया, पढ़ें इनसाइड स्‍टोरी
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MP का सियासी संकट : सोनिया-राहुल को नहीं थी उम्‍मीद की कांग्रेस छोड़ देंगे सिंधिया, पढ़ें इनसाइड स्‍टोरी
राहुल गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया (File Photo)

MP Crisis: राहुल गांधी नाराज सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) को लंच पर ले जाकर उन्‍हें मनाने की कोशिश की थी, लेकिन उनकी नाराजगी खत्‍म नहीं कर सके.

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भोपाल. कांग्रेस को तगड़ा झटका देते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया बीजेपी में शामिल हो गए. सिंधिया ने आरोप लगाया कि उन्हें पार्टी में लगातार दरकिनार किया जा रहा था. उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही थी. हालांकि, गांधी परिवार ने इन सारे आरोपों को खाऱिज किया है. राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने साफ कहा कि ज्योतिरादित्य ही एक ऐसे शख्स थे, जिनके लिए उनके घर के दरवाजे हमेशा खुले रहते थे. कांग्रेस हाईकमान के करीबी सूत्रों ने तो यह भी कहा कि पारिवारिक निकटता के चलते ही सोनिया गांधी और राहुल गांधी को उम्मीद नहीं थी कि सियासी खींचतान के इस प्रकरण में सिंधिया पार्टी छोड़ने तक का बड़ा फैसला कर सकते हैं.

दस जनपथ से जुड़े करीबी सूत्रों की मानें तो सिंधिया के उन दावों में कोई सच्चाई नहीं है, जिसमें कहा गया कि कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें मिलने का वक्‍त नहीं दिया. यह दावा भी सच्चाई से परे है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान का समाधान निकालने के लिए सिंधिया को कोई विकल्प नहीं दिया गया. सूत्र का कहना है कि फरवरी के आखिरी हफ्ते में विदेश दौरे पर रवाना होने से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के साथ जारी तनातनी खत्म करने का फार्मूला निकालने के लिए राहुल गांधी ने सीधे ज्योतिरादित्य से बात की थी. राहुल इसके लिए सिंधिया को अपने साथ बाहर लंच पर लेकर गए थे, जहां दोनों की लंबी बातचीत हुई थी.

 'सिंधिया ने नहीं माना गांधी परिवार का ऑफर'
 जागरण
में छपी एक खबर एक अनुसार, लंच के दौरान राहुल ने सिंधिया को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने का भरोसा दिया, क्योंकि तब राज्यसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी गई थी. हालांकि, राहुल के इस आश्वासन के बाद भी सिंधिया संतुष्ट नहीं थे. सिंधिया को यकीन था कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह मिलकर सूबे की सियासत में उनको किनारे लगाने का काम करेंगे. सूत्रों के मुताबिक, इसके बाद सोनिया गांधी ने भी सिंधिया को बुलाकर उन्हें मध्य प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया. सिंधिया ने खुद इस पेशकश को लेकर रुचि नहीं दिखाई.
ज्योतिरादित्य के इरादों को भांप नहीं पाया गांधी परिवार


हाईकमान के इस करीबी सूत्र का यह भी कहना है कि सिंधिया के करीब एक साल से असंतुष्ट होने की बात से नेतृत्व वाकिफ था. इसीलिए उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार और प्रदेश अध्यक्ष बनने दोनों का विकल्प दिया गया था. इस पर राजी नहीं होने का मतलब साफ है कि सिंधिया ने पार्टी छोड़ने का मन पहले ही बना लिया था. हालांकि, हाईकमान से उनका संबंध इतना करीब का था कि सोनिया और राहुल दोनों ही अपनी पेशकश ठुकराए जाने के पीछे सिंधिया के इरादों को नहीं भांप पाए.

क्‍या गोलबंदी ने बंद किए रास्‍ते?
कमलनाथ और दिग्विजय की सिंधिया के खिलाफ गोलबंदी की बात कुछ हद तक हाईकमान को भी सही लग रही थी. इसीलिए हाईकमान सिंधिया को समाधान का विकल्प दे रहा था और तभी सोनिया-राहुल दोनों को आखिरी वक्त तक भरोसा नहीं था कि ज्योतिरादित्य पार्टी छोड़ देंगे. सोनिया और राहुल ही नहीं प्रियंका गांधी वाड्रा से भी सिंधिया के अच्छे संबंध थे और सभी से उनकी सीधी बात होती थी.

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