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OPINION: राजगढ़ कलेक्टर के थप्पड़ की गूंज में सियासी शोर ज्यादा है!
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News18 Madhya Pradesh
Updated: January 23, 2020, 9:47 PM IST
OPINION: राजगढ़ कलेक्टर के थप्पड़ की गूंज में सियासी शोर ज्यादा है!
राजगढ़ थप्पड़ कांड का सियासी लाभ मुश्किल

आईएएस अधिकारी और राजगढ़ की कलेक्टर निधि निवेदिता (Nidhi Nivedita) द्वारा सीएए (CAA) के समर्थन में रैली कर रहे भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को मारे गए थप्पड़ की गूंज में सियासी शोर ज्यादा है.

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(दिनेश गुप्ता)

भोपाल. बीजेपी शुक्रवार 24 जनवरी को पूरे प्रदेश में प्रदर्शन करने जा रही है. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) समेत समूची कांग्रेस 'थप्पड़' का समर्थन करती दिखाई दे रही है. भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बोल बिगड़े तो आईएएस एसोसिएशन ने भी मोर्चा संभाल लिया है. पूरे घटनाक्रम में बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि सैकड़ों पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद होने के बाद भी कलेक्टर निधि निवेदिता को आंदोलनकारियों पर हाथ उठाने की जरूरत क्यों पड़ी?

निधि निवेदिता जिस राजगढ़ जिले की कलेक्टर हैं, राजनीतिक रूप से अति संवेदनशील जिला माना जाता है. निधि निवेदिता पहली बार कलेक्टर बनी हैं. वे शिवराज सिंह चौहान की सरकार में इंदौर जैसे बड़े जिले में अपर कलेक्टर के तौर पर काम कर चुकी हैं. यहां भी निधि निवेदिता ने राजनीतिक प्रदर्शनकारियों को इसी तरह खदेड़ा था.

निधि निवेदिता  का है संवेदनशील चेहरा

निधि निवेदिता की छवि लड़ाकू अफसर की नहीं है. उनकी ज्यादा चर्चा मानवीय पहलू पर होती रही है. 2012 बैच की निधि मूलत: झारखण्ड राज्य की हैं. पिछले दिनों राजगढ़ मे ही उनकी तारीफ एक महिला को खून देकर जान बचाने को लेकर खूब हुई. आमतौर पर कलेक्टर प्रदर्शनकारियों के सामने नहीं आते हैं, पुलिस ही सामने रहती है. मदद के लिए एसडीएम भी साथ होते हैं. निधि निवेदिता का मोर्चा संभलना मजबूरी का हिस्सा माना जा सकता है. रिटायर आईएएस अधिकारी डीएस राय कहते हैं कि अगर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने लेडी एसडीएम के साथ बदसलूकी ना की होती तो शायद कलेक्टर को सामने भी नहीं आना पड़ता.

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कांग्रेस बीजेपी में आरोप प्रत्यारोपप्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता गोविन्द मालू कहते हैं कि निवेदिताजी ने कलेक्टरी को लजा दिया. मालू ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि, 'थप्पड़ की गूंज दूर तक जाकर नौकरशाहों की लक्ष्मण रेखा तय करेगी और चाटुकार अधिकारियों के भाग्य का फैसला भी करेगी. अब केंद्र सजग, चुस्त, मुस्तैद है. उन्हें मालूम है कि संघ लोक सेवा आयोग के चुने हुए कुछ भटके परिंदों को पिंजरे में कैसे कैद किया जाए.' बीजेपी से जुड़े पूर्व आईएएस अधिकारी एसएस उप्पल कहते हैं कि अधिकारियों को दलीय राजनीति में नहीं पड़ना चाहिये. मर्यादा में रहना चाहिए. राजगढ़ की कलेक्टर के थप्पड़ को मुद्दा बनाना भाजपा की मजबूरी है. मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा कहते हैं कि एक महिला अफसर से बदसलूकी पर पर्दा डालने के लिए ही बीजेपी प्रदर्शन का प्रपंच कर रही है. पहले हमला बीजेपी के नेताओं ने एसडीएम पूजा वर्मा पर किया था. यह कोई भी सहन नहीं करता. शिवराज सिंहजी को भी नहीं करना चाहिए. सलूजा का आरोप है कि बीजेपी की CAA के समर्थन मे हुई रैली को मंजूरी भी नहीं थी.

पूर्व मंत्री ने किया आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग
राज्य के विधि मंत्री पीसी शर्मा का आरोप है कि बीजेपी प्रदेश की शांति को भंग करना चाहती है. शर्मा ने कहा कि हम किसी भी अफसर का अपमान बर्दास्त नहीं करेंगे. घटना पर शिवराज सिंह चौहान कहते है कि कलेक्टर हाथ उठाये यह सुना नहीं, देखा नहीं. पिछले एक साल में यह दूसरा मौका है जब आईएएस एसोसिएशन को बीजेपी नेताओं की बयानबाज़ी पर मुख्य सचिव के सामने नाराजगी जाहिर करना पड़ी. राजगढ़ कलेक्टर निधि निवेदिता को लेकर पूर्व मंत्री बद्री दयाल ने सभामंच से आपत्तिजनक शब्द कहे. पूर्व मंत्री का ये बयान महिला अफसर को लेकर है तो जाहिर है कि बवाल भी होना था.

'सत्ता जाने की खीझ उतार रही बीजेपी'
आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष आईपीसी केसरी कहते है कि अफसर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं. उनका काम कानून एवं व्यवस्था को बनाए रखने का है. वे सिर्फ अपना काम करते हैं. केसरी राजगढ़ की घटना पर कुछ नहीं कहते. राज्य के लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा कहते हैं कि बीजेपी के नेता अफसरों को डरना चाहते हैं. उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान सहित पूरी बीजेपी सत्ता जाने की खीझ अफसरों पर उतार रही है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी याद दिलाते हैं कि शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा चुनाव के दौरान भी अफसरों को मंच से धमकाते हुए उन्हें सरकार का पिट्ठू कहा था.

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बीजेपी में चल रहा है नेतृत्व का संघर्ष
राजगढ़ कि घटना को बीजेपी द्वारा मुद्दा बनाए जाने कि एक वजह पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रही खींचतान भी है. प्रदेश में अध्यक्ष की नियुक्ति अब तक नहीं हो पाई है. राकेश सिंह पद पर बने रहने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. शिवराज सिंह चौहान के कारण मामला टलता जा रहा है. कहा जा रहा है कि पार्टी चौहान के समानांतर नेतृत्व खड़ा करना चाहती है लेकिन विकल्प नहीं मिल रहा है. चौहान पार्टी के स्थानीय नेतृत्व को भरोसे मे लिए बगैर सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन की घोषणा कर देते हैं. राकेश सिंह विचार विमर्श ही करते रह जाते हैं. राजगढ़ में बीजेपी का प्रदर्शन नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में था. इस कारण पूरी बीजेपी को एक साथ आना पड़ा. पार्टी को यह डर भी बना हुआ है कि यदि विरोध नहीं किया गया तो मुख्यमंत्री कमलनाथ नौकरशाही के माध्यम से बीजेपी नेताओं पर हमलावर बने रहेंगे.

निधि निवेदिता को दिग्विजय सिंह का समर्थन
मुख्यमंत्री कमलनाथ दावोस मे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह निधि निवेदिता की पीठ थपथपा रहे हैं. दिग्विजय सिंह राजगढ़ से सांसद रह चुके हैं. यह उनके प्रभाव वाला क्षेत्र है. यहां आरएसएस का भी खासा प्रभाव है. यहां होने वाली घटना का असर मालवा के अलावा ग्वालियर अंचल पर भी आता है. सीएए का मुद्दा अकेला ऐसा मुद्दा है जिसके जरिए पार्टी राज्य में संवैधानिक संकट का राग अलाप सकती है. अपने विधायकों को भी दल बदल से रोक सकती है. राज्य में कमलनाथ की सरकार अल्पमत वाली सरकार है. बीजेपी के दो विधायक कमलनाथ के संपर्क में लगातार बने हुए हैं. इन विधायकों के दल-बदल से कमलनाथ मजबूत हो सकते हैं.

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First published: January 23, 2020, 9:37 PM IST
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