मध्य प्रदेश में अब जेल में डालने से पहले कैदियों का होगा कोरोना टेस्ट

31 अगस्त तक MP की सभी जिलों में कैदियों से मुलाकात पर रोक रहेगी.

जेल (JAIL) विभाग ने प्रदेश के सभी कलेक्टर, एसपी, सीएमएचओ और सभी जेल अधीक्षक को पत्र (Letter) लिखकर यह कहा है कि कोर्ट के आदेश से न्यायिक हिरासत में जेल भेज ले जाने वाले बंदियों का कोरोना टेस्ट कराया जाए.

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भोपाल.एमपी (mp) की जेलों में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. अब पुलिस कस्टडी और न्यायिक हिरासत में सीखचों के पीछे डालने से पहले कैदियों का कोरोना टेस्ट (corona test) कराना जरूरी होगा. कोरोना टेस्ट के बाद ही कैदियों को जेल के अंदर किया जाएगा. सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि रिपोर्ट आने तक ऐसे कैदियों को क्वॉरेंटीन टाइम बैरक में रखा जाएगा.

जेल विभाग ने प्रदेश के सभी कलेक्टर, एसपी, सीएमएचओ और सभी जेल अधीक्षक को पत्र लिखकर यह कहा है कि कोर्ट के आदेश से न्यायिक हिरासत में जेल भेज ले जाने वाले बंदियों का कोरोना टेस्ट कराया जाए. कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही उसे जेल में दाखिल किया जाए. इस पत्र में यह भी कहा गया है कि पुलिस कस्टडी से ज्यूडिशियल कस्टडी में जेल भेजने से पहले भी कैदियों का कोरोना टेस्ट कराया जाए. इसके अलावा कोरोना टेस्ट रिपोर्ट मिलने तक नये बंदी को जेल में क्वॉरेंटीन बैरक में रखा जाए. जेल विभाग ने इन तमाम नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए भी कहा है.

31अगस्त तक जेल में मुलाकात पर रोक
कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मध्य प्रदेश की जेलों में सुरक्षा को लेकर कई कदम उठाए गए हैं. लेकिन इसके बावजूद जेल के अंदर कोरोना पैर पसार आ रहा है. कई जिलों की जेलों में बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव कैदी और स्टाफ मिला. रायसेन ज़िले की बरेली उपजेल में 64 कैदियों सहित कुल 67 लोग कोरोना से संक्रमित मिले थे. उसके बाद जेल में हड़कंप मच गया था. इसलिए जेल विभाग ने समय-समय पर कैदियों की पैरोल बढ़ाई. इसके अलावा मुलाकात पर भी रोक लगाई. अभी 31 अगस्त तक प्रदेश के सभी जिलों में कैदियों से मुलाकात पर पूरी तरीके से रोक रहेगी.

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