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राइट टू वॉटर एक्ट का लागू होने से पहले ही शुरू हुआ विरोध, सरकारी विभागों ने जताई आपत्ति

Puja Mathur | News18 Madhya Pradesh
Updated: November 21, 2019, 6:25 PM IST
राइट टू वॉटर एक्ट का लागू होने से पहले ही शुरू हुआ विरोध, सरकारी विभागों ने जताई आपत्ति
विभागों का तर्क है दंड के प्रावधान से सरकारी अमलों पर पड़ेगा दबाव.

मध्‍य प्रदेश में राइट टू वॉटर एक्ट (Right to water Act) अभी लागू नहीं हुआ है, लेकिन उससे पहले इसका विरोध शुरू हो गया है. हैरानी की बात है कि सरकारी अधिकारी (Government Officer) ही इसका विरोध कर रहे हैं.

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भोपाल. कमलनाथ सरकार (Kamal Nath Government) की प्रदेश के हर व्‍यक्ति को प्रतिदिन 55 लीटर पानी देने की योजना का मसौदा सही रूप से अमल में आया नहीं है कि उससे पहले ही राइट टू वॉटर एक्ट (Right to water Act) का विरोध होना शुरू हो गया है. दरअसल, एक्ट का पालन ना करने वालों को दंडित करने का प्रावधान किया गया है और इस राइट टू वॉटर एक्ट में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा रही है. हैरानी की बात ये है कि अधिकारियों को ये जिम्‍मेदारी तय करने का तरीका रास नहीं आ रहा है.

सरकारी विभाग के अधिकारी लगा रहे हैं पलीता
पानी का अधिकार देने के लिए कमलनाथ सरकार की प्लानिंग जोर से चल रही है, लेकिन इस प्लानिंग को सरकारी विभाग के अधिकारी ही पलीता लगा रहे हैं. सरकार इस योजना को एक तरफ अनुशासित रखना चाहती है, तो वहीं दंड के प्रावधान पर सरकारी विभाग आपत्ति जता रहे हैं. इन सब के बीच सरकार ये भी तय नहीं कर पा रही है कि पानी की इस बड़ी व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए सरकारी अमले को किस तरह से जवाबदेह बनाया जाए.

जबकि कांग्रेस मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि जल निगम या फिर संबंधित विभाग की जिम्‍मेदारी है कि लोगों को पीने का पानी मिले. अगर ऐसा नहीं होता है तो अधिकारी को सजा मिलनी चाहिए. इसमें गलत बात कुछ भी नहीं है.

एक्ट में दंड के ये होंगे प्रावधान
>>कानून का उल्लंघन करने वाले के खिलाफ मुकादमा होगा दायर.
>>एक्ट की निगरानी करने वाली कमेटी या अधिकारी नियम तोडऩे वाले के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अपना सकते हैं.>>सरकार को विभागीय कार्रवाई करने का हक होगा.
>> वॉटर सिक्योरिटी प्लान के नियमों का उल्लंघन होने पर किसी भी व्यक्ति, समूह, समाज या गैर-सरकारी संगठन को अदालत में पिटीशन फाइल करने की छूट है.
>>औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला पानी यदि लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है तो इसके लिए वे जिम्मेदार होंगी. स्टेट वॉटर मैनेजमेंट अथॉरिटी उन पर जुर्माना लगा सकेगी.
>>अथॉरिटी पानी देने की परमीशन निलंबित या रद्द कर सकती है.

अच्‍छा काम करने वालों को मिलेगा ये इनाम
पानी के अधिकार कानून के मसौदे में ये भी लिखा हुआ है कि अच्छा काम करने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा, लेकिन सरकारी विभागों के इस रवैये पर बीजेपी हमलावर हो चुकी है. बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कहा कि अधिकार देने से काम नहीं चलता बल्कि सरकार को भी अपने कर्तव्‍यों का निर्वहन करना चाहिए. ये कागजी कार्रवाई तो खूब कर रहे हैं, लेकिन जल प्रबंधन को लेकर कुछ भी नहीं कर रहे हैं. यकीनन ये सरकार बतोलेबाजी कर रही है. जबकि अधिकारियों को डराने या फिर धमकाने से कुछ नहीं होगा.

इस वजह से है कन्फ्यूजन
तर्क दिया गया है कि राइट टू वॉटर का बड़ा काम सरकार करने जा रही है, इसलिए इसमें सकारात्मक भाव ही होना चाहिए. किसी भी किस्म की नकारात्मकता से बचना चाहिए. जबकि जिम्मेदार विभागों को लगता है कि दंड के प्रावधान से इस काम से जुड़ा सरकारी अमला दबाव में आ जाएगा. उसे हमेशा ये डर रहेगा कि कहीं किसी और की सजा उसके हिस्से में तो नहीं आ जाएगी. ऐसे में एक्ट का मसौदा कब तक और कैसा बनेगा इस पर सरकार भी कन्फ्यूजन में हैं.

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First published: November 21, 2019, 6:08 PM IST
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