Home /News /madhya-pradesh /

विधानसभा में CM कमलनाथ ऐसे तोड़ ले गए BJP के 2 विधायक, जानिए कब-कब क्या हुआ

विधानसभा में CM कमलनाथ ऐसे तोड़ ले गए BJP के 2 विधायक, जानिए कब-कब क्या हुआ

कर्नाटक के घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जिस नाटकीय अंदाज में बीजेपी को झटका दिया, उसकी गूंज वर्षों तक देश की राजनीति में सुनाई देने वाली है.

    रोज की तरह बुधवार सुबह 11 बजे जब विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई तब किसी को भी यह आभास नहीं था कि मॉनसून सत्र का समापन बड़े नाटकीय ढंग से होगा. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के 2 विधायक पाला बदलकर मुख्यमंत्री कमलनाथ के बगल में जाकर खड़े हो जाएंगे. कर्नाटक के घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जिस नाटकीय अंदाज में बीजेपी को झटका दिया, उसकी गूंज वर्षों तक देश की राजनीति में सुनाई देने वाली है.

    दो दिन पहले ही खत्म हो गया विधानसभा का सत्र
    विधायकों के पाला बदलने से लेकर सत्र का अचानक समापन हो जाने का पूरा घटनाक्रम नाटकीयता भरा रहा. विधानसभा की कार्यसूची में बुधवार को 50 से अधिक ध्यानाकर्षण शामिल किए गए थे. इतनी बड़ी संख्या में ध्यानाकर्षण कार्यसूची में आ जाने के कारण यह अनुमान लग रहा था कि सत्र का समापन बुधवार को ही हो सकता है. तय कार्यक्रम के अनुसार, मॉनसून सत्र का समापन 26 जुलाई को होना था. कार्यसूची में पहला ही ध्यानकर्षण सरकारी विमान की बिक्री में अनियमितता होने से सबंधित था. ध्यानाकर्षण पेश करने वाले कांग्रेस के ही विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और कुणाल चौधरी थे.

    कमलनाथ ने विपक्ष को दी चुनौती
    ध्यानकर्षण सूचना में लगाए आरोपों से व्यथित (दुखी) मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि मैंने अपने राजनीतिक जीवन में स्वच्छता को सर्वोच्चता में रखा है और इसका उदाहरण पेश किया. कमलनाथ ने कहा कि उनके 45 साल के राजनीतिक जीवन में आज तक कोई उन पर अंगुली नहीं उठा पाया, न ही कोई आरोप लगा पाया. सीएम कमलनाथ ने विपक्ष को चुनौती दी कि कांग्रेस सरकार पूरे 5 साल चलेगी.

    उन्होंने कहा कि विपक्ष चाहे तो वो कभी भी सरकार के बहुमत का टेस्ट कर ले, हम आज ही इसके लिए तैयार हैं. सदन में शक्ति परीक्षण कराने की कमलनाथ की चुनौती प्रतिपक्ष के नेता गोपाल भार्गव के उस बयान के बाद सामने आई थी, जिसमें उन्होंने कहा कि पार्टी के नंबर 1 और नबंर 2 का आदेश मिलते ही चौबीस घंटे में वो सरकार गिरा देंगे. नेता प्रतिपक्ष की टिप्पणी और उस पर मुख्यमंत्री की चुनौती को सामान्य बयानबाजी मानकर विधायकों ने अनदेखा कर दिया. लेकिन, इसके 2 घंटे बाद ही मुख्यमंत्री के कक्ष में शक्ति परीक्षण की कवायद शुरू हो गई.

    दलबदल करने वाले दोनों विधायकों की पृष्ठभूमि कांग्रेस से जुड़ी 
    दंड संहिता विधेयक के पक्ष में वोटिंग पूरी होने के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई. मुख्यमंत्री, फ्लोर क्रॉस करने वाले दोनों विधायकों को साथ लेकर अपने कक्ष में चले गए. कक्ष में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया से कहा कि जब भी शक्ति परीक्षण की बात आती है, बीजेपी मैदान छोड़कर भाग जाती है. पहले विधानसभा अध्यक्ष, फिर उपाध्यक्ष के चुनाव में भी बीजेपी शक्ति परीक्षण से बच गई. वित्तीय विधेयक पर भी बीजेपी भाग गई. अब जब विधेयक पर वोटिंग हुई तो बीजेपी विधायक अपनी कुर्सियों पर बैठे रहे. कमलनाथ के इस बयान में उनकी छिपी हुई पीड़ा साफ दिखाई दे रही थी.

    विधानसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान जिन दो बीजेपी विधायकों ने कमलनाथ सरकार के पक्ष में अपना वोट डाला, उनकी पृष्ठभूमि कांग्रेसी रही है


    उन्हें पीड़ा इस बात की थी कि बीजेपी नेता बार-बार सरकार गिराने का बयान देकर राज्य में अस्थिरता फैलाने का काम कर रहे हैं. पूरे घटनाक्रम का दिलचस्प पहलू यह भी है कि कमलनाथ ने जिस विधेयक पर बीजेपी के 2 विधायकों- नारायण त्रिपाठी और शरद कौल से फ्लोर क्रॉस कराया है, उस विधेयक का समर्थन बीजेपी पहले ही कर चुकी थी. नारायण त्रिपाठी ने पिछले विधानसभा चुनाव के बाद भी दलबदल किया था. वो सतना के मैहर से विधायक हैं. पिछली बार वो कांग्रेस के टिकट पर जीतने के बाद बीजेपी में शामिल हुए थे. इस बार (2018) बीजेपी से चुनाव जीत कर कांग्रेस में चले गए. दूसरे शरद कौल ब्यौहारी से विधायक हैं. फ्लोर क्रॉस करने के बाद कौल ने कहा कि कमलनाथ उनके आइकॉन हैं. नारायण त्रिपाठी ने क्षेत्र के विकास को फ्लोर क्रॉस करने की वजह बताया.

    विधेयक के पक्ष में थी बीजेपी, फिर भी हुई वोटिंग
    विधेयक पर वोटिंग कराने की तैयारी भी बीजेपी ने नहीं की थी. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सीट पर बैठे नियम 139 के तहत किसानों की कर्ज मुक्ति पर चर्चा शुरू होने का इंतजार कर रहे थे. दंड संहिता संशोधन विधेयक पर चर्चा शुरू करते हुए बीजेपी के केदार शुक्ला ने सदन में कहा भी कि पूरा सदन इस संशोधन के पक्ष में है, इसे बगैर चर्चा के पास करा लिया जाए और शिवराज सिंह चौहान के प्रस्ताव पर चर्चा कराई जाए. दंड संहिता विधेयक का यह संशोधन महिला अपराधों पर कार्रवाई से जुड़ा हुआ था.

    इस विधेयक पर बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के संजीव कुशवाह ने सदन में चर्चा मांग ली. मंत्रियों की बेंच से भी वोटिंग-वोटिंग की मांग की आवाज आने लगी. विपक्षी बेंच से आवाज आ रही थी कि जब हम विधेयक के पक्ष में हैं तो वोटिंग की जरूरत क्या है. इसके बाद भी विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने विधेयक पर वोटिंग कराने का आदेश दे दिया. विधेयक के पक्ष में 122 वोट बताए गए. विपक्ष ने वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया.

    इस वोटिंग के आधे घंटे पहले कांग्रेस की ओर से एक व्हिप जारी कर कहा गया कि सभी विधायक सदन में मौजूद रहें. इसके उलट बीजेपी की ओर से कोई व्हिप जारी नहीं हुआ था. वोटिंग के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विधेयक के विरोध में जब हम थे ही नहीं तो वोटिंग कैसी? विधायकों के दलबदल के सवाल पर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है.

    ये भी पढ़ें-

    MP में बीजेपी को करारा झटका: पार्टी के 2 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर कांग्रेस का दिया साथ

    जानिए कौन हैं BJP MLA नारायण त्रिपाठी और शरद कोल, जिन्होंने दिया कांग्रेस को समर्थन

    Tags: Bhopal, Congress, Kamal nath, Madhya Pradesh Assembly, Shivraj singh chouhan

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर