कितने फायदेमंद साबित हुए आयातित नेता? दल-बदलुओं से कितना नफ़ा-नुकसान?

लोकसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस को हार पर मंथन के साथ ही इस पर भी सोचने को मजबूर कर दिया है, कि दल बदल कर लाए गए नेताओं से कितना नफा-नुक़सान हुआ

Anurag Shrivastav | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 5, 2019, 7:31 PM IST
कितने फायदेमंद साबित हुए आयातित नेता? दल-बदलुओं से कितना नफ़ा-नुकसान?
कमलनाथ
Anurag Shrivastav | News18 Madhya Pradesh
Updated: June 5, 2019, 7:31 PM IST
लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का हाथ थामने वाले नेता अब गुम हैं. विधानसभा चुनाव की तरह इस बार भी वो असर नहीं दिखा सके. कांग्रेस अब चिंतन की मुद्रा में है.
कहां गए वो नेता -मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी, बीएसपी औऱ दूसरे दल के नेताओं ने बड़ी तादाद में कांग्रेस का दामन थामा.कांग्रेस में अपना भविष्य़ संवारने की उम्मीद लगाए इन नेताओं को चुनावी नतीजों से तगड़ा झटका लगा है.सिर्फ एक दो नहीं बल्कि बड़ी संख्या में नेता अपने कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस में शामिल हुए थे.लेकिन अब ये नेता पार्टी में ही गुमनाम हो चुके हैं. इसमें वो बड़े नाम भी शामिल हैं,जिनका प्रदेश की सियासत में खासा दबदबा था.लेकिन दल बदल कर कांग्रेस में शामिल नेता भी कोई चमत्कार नहीं कर पाए. कांग्रेस मात्र एक सीट पर रह गयी.
लंबी है लिस्ट- विधानसभा और लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस का दामन थामने वाले नेताओं में सरताज सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज के साले संजय मसानी, रामकृष्ण कुसमरिया, बीजेपी के पूर्व विधायक जीतेंद्र डागा, बहुजन संघर्ष दल के नेता फूल सिंह बरैया, लाखन सिंह बघेल, लोकेंद्र सिंह राजपूत, डेवियर मेढ़ा, चौधऱी राकेश सिंह जैसे नेता शामिल हैं. लेकिन इनमें से कोई भी नेता चुनाव में असर नहीं दिखा सका. इसलिए अब कांग्रेस में इनकी भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं.आलम ये है कि लोकसभा चुनाव में मोदी की सुमानी में कांग्रेस की हार के बाद अब इन आयातित नेताओं में से ज़्यादातर नेता गुमशुदा हो गए हैं.
दलबदलुओं की भूमिका पर सवाल- लोकसभा चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस को हार पर मंथन के साथ ही इस पर भी सोचने को मजबूर कर दिया है, कि दल बदल कर लाए गए नेताओं से कितना नफा-नुक़सान हुआ.हार पर मंथन के कारणों में अब दलबदलुओं की भूमिका पर भी विचार होगा.

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First published: June 5, 2019, 7:31 PM IST
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