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लोकसभा चुनाव : दिग्विजय के गढ़ राजगढ़ में इस बार किसकी होगी विजय?

लोकसभा चुनाव : दिग्विजय के गढ़ राजगढ़ में इस बार किसकी होगी विजय?

मोना सुस्तानी और रोडमल नागर

मोना सुस्तानी और रोडमल नागर

इस संसदीय क्षेत्र में पहली बार किसी महिला को मौका मिला है.वो जिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष होने के साथ ही तीसरी बार लगातार जिला पंचायत सदस्य हैं.

    मध्यप्रदेश की वीआईपी सीटों में से एक राजगढ़ पर इस बार सबकी नजरें टिकी रहीं. कभी दिग्विजय सिंह और फिर उनके भाई लक्ष्मण सिंह यहां से सांसद रह चुके हैं. इस बार भी दिग्विजय सिंह इसी सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन भेज दिए गए भोपाल. राजगढ़ में उन्होंने अपनी पसंद की प्रत्याशी मोना सुस्तानी को टिकट दिलवा दिया.बीजेपी ने हैट्रिक की उम्मीद में रोडमल नागर को फिर से टिकट दिया.

    मध्यप्रदेश की राजगढ़ लोकसभा इस बार दिग्विजय की साख का सवाल बनी रही. राघोगढ़ घराने के वर्चस्व की इस सीट पर बीजेपी पिछले 2 बार से जीत रही है. यहां अगर किसी पार्टी ने सबसे ज्यादा राज किया है तो वह कांग्रेस ही है. दिग्विजय खुद 2 बार यहां से सांसद बन चुके हैं. उनके भाई लक्ष्मण सिंह 5 बार इस सीट से जीतकर संसद पहुंच चुके हैं. हालांकि यहां पर दोनों भाइयों को हार का भी सामना करना पड़ा है.

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    फिलहाल इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है और रोडमल नागर यहां के सांसद हैं.2014 लोकसभा में करीब 2 लाख वोट से रोडमल नागर जीते थे. यहां के समीकरण की बात करें राजगढ़ संसदीय सीट पर
    जाति का गणित-
    ओबीसी 56 प्रतिशत
    एससी 18 प्रतिशत
    मुस्लिम 5 प्रतिशत
    सामान्य 4 प्रतिशत वोटर हैं.इस सीट पर सौंधिया और दांगी निर्णायक मत होते हैं.

    राजगढ़ की 81 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है.यहां सौंधिया, दांगी, धाकड़, तंवर, ब्राह्मण और राजपूत, राठौर और मुस्लिम समाज, एससी समाज बाहुल्य में है. सौंधिया समाज के मतदाता सवा दो लाख से भी ज़्यादा हैं. दांगी समाज वोट भी दो लाख के लगभग है. जो चुनाव की दिशा तय करते हैं. ये मतदाता जिस तरफ होते है वही पार्टी जीतती है.

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    मोना सुस्तानी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की करीबी हैं. इस संसदीय क्षेत्र में पहली बार किसी महिला को मौका मिला है.वो जिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष होने के साथ ही तीसरी बार लगातार जिला पंचायत सदस्य हैं. जनपद सदस्य भी रह चुकी हैं. वो किरार धाकड़ समाज की महिला विंग की अध्यक्ष हैं. उनके ससुर पूर्व विधायक गुलाब सिंह सुस्तानी जिला कांग्रेस अध्यक्ष , एमपी एग्रो के चेयरमैन और दो बार राजगढ़ विधायक रह चुके हैं.

    2014 के चुनाव में राजगढ़ सीट पर 57.75 फीसदी मतदान हुआ था.तब बीजेपी के रोडमल नागर ने कांग्रेस के अंलाबे नारायण सिंह को हराया था.दोनों के बीच हार जीत का अंतर 2,28,737 वोटों का था.यहां तीसरे स्थान पर बसपा रही थी. उसे1.37 फीसदी वोट मिले थे. लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में सीन बदला और 8 में से 6 पर कांग्रेस और सिर्फ 2 पर बीजेपी का कब्ज़ा हो पाया.1 सीट पर निर्दलीय विधायक है.इस बार राजगढ़ सीट पर 16,47500 मतदाता थे.राजगढ़ बेहद पिछड़ा इलाका है. यहां बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है. बड़ा उद्योग न होने के कारण युवाओं को पलायन करना पड़ता है. राजगढ़ जिले में एक भी फैक्टरी नहीं है. जो विकास हुआ भी तो सिर्फ दिग्विजय के गृह क्षेत्र राघौगढ़ का.

    राजगढ़ जिले में अस्पताल तो हैं लेकिन डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहते. इसलिए लोगों को सीमा पार राजस्थान जाना पड़ता है. खुद सांसद रोडमल नागर के गृह नगर पचौर में जहां एक डॉक्टर के भरोसे पूरा हॉस्पिटल है,
    राजगढ़ सीट पर राघोगढ़ राजघराने का प्रभाव रहता है.दिग्विजय सिंह इसी सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन भोपाल सीट से उन्हें टिकट मिलने के बाद दिग्विजय की पसंद चली और मोना को मैदान मिला. उनका पार्टी में अंदरूनी विरोध हुआ. 23 मई को पता चलेगा कि वो अंदरुनी कलह का शिकार होती हैं या फिर राघोगढ़ फैक्टर काम करता है.(राजगढ़ से मनीष राठौर के साथ भोपाल से सोनिया राणा की रिपोर्ट)

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    Tags: Digvijay singh, Madhya Pradesh Lok Sabha Constituencies Profile, Madhya Pradesh Lok Sabha Elections 2019, Rajgarh News

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