किसानों और आदिवासियों के बीच जाकर जमीनी राजनीति से जुड़े थे राजीव गांधी

फाइल फोटो.

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राजीव गांधी के भाषणों में जिस वर्ग को लेकर चिंता ज्यादा झलक थी,वह वर्ग आदिवासी और किसान का है. इन दोनों से से सीधा संवाद कर राजीव गांधी कांग्रेस की जमीनी राजनीति का भी पता चला था.

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भोपाल. राजीव गांधी के भाषणों में जिस वर्ग को लेकर चिंता ज्यादा झलक थी,वह वर्ग आदिवासी और किसान का है. इन दोनों से से सीधा संवाद कर राजीव गांधी कांग्रेस की जमीनी राजनीति का भी पता चला था. उन्हें यह भी पता चला था कि केन्द्र सरकार जो गांव के विकास के लिए जो एक रुपए (इस राशि का उपयोग उदाहरण के तौर किया गया था।) भेजती है, वह बीच में कहां गायब हो जाता है. सिर्फ पंद्रह पैसा ही लोगों तक कैसे पहुंचता है. किसानों और आदिवासियों की स्थिति जानने के लिए राजीव गांधी अक्सर उनके बीच जाया करते थे. वे सीधे संवाद पर ज्यादा भरोसा किया करते थे. किसानों की स्थिति जानने के लिए वे मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के सेऊ गांव भी गए थे. भारी बारिश में किसानों  से बात की थी. इस गांव के किसानों ने ही राजीव गांधी को यह बताया कि खाद और बीज मिलने में उन्हें किस तरह की दिक्कत आती है. किसानों के कर्ज के हाल भी राजीव गांधी ने जाने थे. राजीव गांधी के किसानों के बीच जाने के कारण ही भारतीय जनता पार्टी ने अस्सी के दशक के अंतिम सालों में किसानों की कर्ज मुक्ति को बड़ा मुद्दा बनाया था.

प्रशासन अकादमी में मौजूद है राजीव गांधी की स्मृतियां

भोपाल की प्रशासन अकादमी में राजीव गांधी ने वृक्षारोपण भी किया था. वृक्ष सूख रहा है, लेकिन, पत्थर पर अंकित नाम और तारीख उनकी स्मृति को ताजा रखे हुए हैं. राजीव गांधी 12 दिसंबर 1987 को प्रशासन अकादमी में आए थे. यहां उन्होंने देश भर के कलेक्टरों से बात की थी. नए भारत का रोड मैप मध्यप्रदेश की प्रशासन अकादमी में ही बना था. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे अजित जोगी उन चुनिंदा नौकरशाहों में रहे हैं, जिन्हें राजीव गांधी व्यक्तिगत तौर पर पसंद किया करते थे. अजीत जोगी को नौकरी से इस्तीफा दिलाने वाले राजीव गांधी थे. अजीत जोगी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए नामांकित किया गया था.

मोतीलाल वोरा पर था राजीव का भरोसा
मोतीलाल वोरा को  राजीव गांधी व्यक्तिगत तौर पर पसंद किया करते थे. इस बात को सोनिया गांधी भली भांति जानती हैं. यही कारण है कि वोरा आखिरी समय तक उनके विश्वस्त बने रहे. वोरा दो बार राज्य के मुख्यमंत्री बने. दूसरी बार जब वे मुख्यमंत्री बने तब राजीव गांधी की इच्छा माधवराव सिंधिया को मुख्यमंत्री बनाने की थी. वोरा केन्द्र में मंत्री थे. चुरहट लॉटरी कांड में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अर्जुन सिंह की भूमिका को लेकर कुछ टिप्पणियां की थीं. चुरहट लॉटरी कांड का संबंध अर्जुन सिंह के पुत्र अजय सिंह से था. कोर्ट की टिप्पणी के बाद अर्जुन सिंह ने नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. उनके उत्तराधिकारी का चयन में कांगे्रस नेतृत्व और राजीव गांधी को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.

राजीव गांधी अपने दोस्त सिंधिया को क्यों नहीं बन पाए मुख्यमंत्री

विधायकों की बड़ी संख्या अर्जुन सिंह समर्थकों की थी. अधिकांश विधायक युवा थे. वे माधवराव सिंधिया के नाम पर सहमत नहीं थे. राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश के आधा दर्जन से अधिक सांसदों को विशेष विमान से भोपाल भेजा था. इनमें प्रतापभानु शर्मा,दिलीप सिंह भूरिया, अजय नारायण मुश्रान,असलम शेर खान तथा शिवेन्द्र बहादुर सिंह शामिल थे. इन सांसदों को कहा गया था कि वे सिंधिया को शपथ दिलाकर ही लौटे. प्रतापभानु शर्मा कहते हैं कि राजीव गांधी की राजनीति समन्वय बनाकर काम करने की थी. लेकिन, भोपाल के घटनाक्रम ने  राजीव गांधी को कुछ बेचैन कर दिया था. अर्जुन सिंह समर्थकों द्वारा दिग्विजय सिंह को मुख्यमंत्री बनाए जाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था. राजीव गांधी ने तत्कालीन गृह मंत्री बूटा सिंह को स्थिति संभालने के लिए भोपाल भेजा था. लेकिन, बूटा सिंह सफल नहीं हो पाए थे. बाद में मोतीलाल वोरा को विधायकों की सहमति के आधार पर दूसरी बार मुख्यमंत्री बनाया गया.



गैस पीड़ितों का हाल जानने आते थे राजीव गांधी

राजीव गांधी की संवेदनशीलता के कई उदाहरण मध्यप्रदेश में मौजूद हैं. 2 और 3 दिसंबर 1984 की मध्य रात्रि को भोपाल के यूनियन कार्बाइड से जब गैस का रिसाव हुआ उस वक्त देश में लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही थी. चार दिसंबर को राजीव गांधी ने अस्पतालों का दौरा किया. अस्पतालों में पीड़ितों का हाल देखकर राजीव गांधी की आंखे नम हो गईं. राजीव गांधी चुनाव प्रचार छोड़कर भोपाल में स्थिति का जायजा लेने आए थे. लोकसभा चुनाव के बाद भी वे गैस पीड़ितों से मिलने आते रहे। तंग गलियों से गुजर कर लोगों से मिलने पहुंच जाते. मध्यप्रदेश के कई क्षेत्रों में राजीव गांधी ने दौरा किया. दूरदराज के इलाकों में भी गए. आदिवासी इलाकों का दौरा अक्सर किया करते थे. उन्होंने बस्तर से लेकर झाबुआ तक के हर आदिवासी इलाकों को जाकर देखा. आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए भी उनके नेतृत्व वाली सरकार ने काफी आर्थिक मदद पहुंचाई थी.

पंजाब समस्या के समाधान में मध्यप्रदेश की भूमिका

इंदिरा गांधी की हत्या से पहले ही राजीव गांधी सक्रिय राजनीति में आ गए थे. कांग्रेस महासचिव के तौर पर उन्होंने काम किया. महासचिव के तौर पर मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में दौरा किया. इंदिरा गांधी की हत्या का संबंध पंजाब के आतंकवाद से था. राजीव गांधी ने पंजाब को आतंक मुक्त करने के काम को प्राथमिकता में रखा था. उस वक्त अर्जुन सिंह की गिनती कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में होती थी. राजीव गांधी ने उन्हें पंजाब का राज्यपाल बनाकर आतंकवाद की समस्या को हल करने की जिम्मेदारी दी. अर्जुन सिंह सफल भी हुए. उसके बाद राजीव गांधी उनका उपयोग संकट मोचक  के तौर पर करने लगे थे.

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