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रानी कमलापति की यादों को आज भी ताजा कर देता है उनका महल, जानिए इतिहास

रानी कमलापति की यादों को आज भी ताजा कर देता है उनका महल, जानिए इतिहास

रानी कमलापति का महल आज भी गौरवपूर्ण इतिहास बयां करता है. इसके नाम पर हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रखा गया है.

रानी कमलापति का महल आज भी गौरवपूर्ण इतिहास बयां करता है. इसके नाम पर हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रखा गया है.

Rani Kamalapati Facts: रानी कमलापति का नाम आज पूरे देश में लिया जा रहा है. क्योंकि उनके नाम पर देश के पहले वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन हबीबगंज का नामकरण हो रहा है. इसकी वजह रानी कमलावती का गौरवपूर्ण इतिहास है. प्रदेश की राजधानी में आज भी रानी कमलापति की यादें ताजा है. उनका महल आज भी मौजूद है. महल की दीवारें जीर्णशीर्ण हैं, लेकिन गौरव की कहानियां उसी तरह बता रही हैं, जैसे पहले सुनाती थीं.यह महल परमार राजा भोज द्वारा भोपाल ताल के पूर्वी प्राचीन बांध के ऊपर बनाया गया है, जो भोज पाल के नाम से भी जाना जाता है.

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भोपाल. देश का पहला वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन हबीबगंज अब रानी कमलापति के नाम से जाना जाएगा. केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार के स्टेशन का नाम बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. सवाल ये है कि, आखिर रानी कमलापति पर हबीबगंज स्टेशन का नाम रखने के पीछे क्या वजह है ? रानी कमलापति का भोपाल से जुड़ा इतिहास क्या है ? इससे जुड़े कुछ तथ्य News18 की टीम निकालकर लाई है. राजधानी भोपाल में रानी कमलापति का महल आज भी मौजूद है. भले ही इस महल की दीवारें जीर्णशीर्ण हो गई हों, लेकिन छोटी झील के ऊपर बना यह महल रानी कमलापति की यादों को आज भी ताजा कर देता है.

रानी कमलापति का महल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है. इस महल के बारे में बताया जाता है कि यह महल परमार राजा भोज द्वारा भोपाल ताल के पूर्वी प्राचीन बांध के ऊपर बनाया गया है, जो भोज पाल के नाम से भी जाना जाता है. कालांतर में इससे वर्तमान भोपाल का प्रादुर्भाव हुआ. सन 1722 में गिन्नौरगढ़ के शासक निजाम शाह की विधवा रानी कमलापति द्वारा इसे बनवाया गया था. इस स्थान के पश्चिम छोर के नजदीक स्थित पहाड़ी पर फतेहगढ़ किले के अवशेष हैं, जिसे भोपाल के पहले शासक सरदार मोहम्मद खान द्वारा निर्मित करवाया गया था, जिन्हें आधुनिक भोपाल की स्थापना का श्रेय भी जाता है.

लाखोरी ईंटों से बना है महल

यह महल नगर में 18 वीं सदी में निर्मित तत्कालीन राज्य की स्थापत्य कला का सर्वोत्तम उदाहरण माना जाता है. इस दो मंजिल महल के निर्माण में लाखोरी ईंटों का प्रयोग किया गया है, जिसका ऊपरी भाग मेहराबों तथा कमल की पंखुड़ियों से अलंकृत स्तंभों पर आधारित है. महल में सामने की ओर छज्जे बनाए गए हैं. इस महल को भारतीय पुरातात्विक स्मारक के रूप में भारत सरकार द्वारा 1989 में संरक्षित घोषित किया गया और तभी से यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की अधीन है.

ये है रानी कमलापति का इतिहास

16वीं सदी में भोपाल गोंड शासकों के अधीन था. उस समय रानी कमलापति का विवाह गोंड राजा सूरज सिंह शाह के बेटे निजाम शाह से हुआ था. सन 1710 में भोपाल की ऊपरी झील के आसपास का क्षेत्र भील और गोंड आदिवासियों ने बसाया था. तत्कालीन गोंड सरदारों में निजाम शाह सबसे मजबूत माने जाते थे. रानी कमलापति ने अतिक्रमणकारियों डटकर सामना किया था.

Tags: Bhopal news, Mp news

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