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बड़ा खुलासाः MP में पीडीएस का 1 रुपए किलो का गेहूं बिक रहा है 15 रुपए किलो

मध्य प्रदेश में पीडीएस के गेहूं में महाघोटाला सामने आया है. जो गेहूं गरीबों तक पहुंचना चाहिए, वो गेंहू अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है.

मध्य प्रदेश में पीडीएस के गेहूं में महाघोटाला सामने आया है. जो गेहूं गरीबों तक पहुंचना चाहिए, वो गेंहू अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है.

मध्य प्रदेश में पीडीएस के गेहूं में महाघोटाला सामने आया है. जो गेहूं गरीबों तक पहुंचना चाहिए, वो गेंहू अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है.

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मध्य प्रदेश में पीडीएस के गेहूं में महाघोटाला सामने आया है. जो गेहूं गरीबों तक पहुंचना चाहिए, वो गेंहू अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है. प्रशासन के एक अधिकारी ने खुद इस महाघोटाले की पोल खोलकर रख दी. हर स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है. सरकार को हर महीने लाखों-करोड़ों की चपत लगाई जा रही है.

प्रदेश की गरीब जनता को मिलने वाले गेहूं का एक बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा है. जिला प्रशासन की टीम ने भोपाल की करोंद मंडी में छापेमार कार्रवाई की, तो विक्की ट्रेडर्स के गोदाम से हजारों क्विंटल पीडीएस का गेहूं बरामद हुआ. ये गेहूं नागरिक आपूर्ति निगम के जरिए वेयरहाउस से सीधे राशन दुकानों पर जाना था. लेकिन सरकारी गेहूं सीधे ट्रकों में भराकर व्यापारियों के पास करोंद मंडी पहुंच गया.

इस पूरे गोरखधंघे में नागरिक आपूर्ति निगम से लेकर वेयर हाउस, ट्रांसपोर्टर और राशन की दुकान के जिम्मेदार शामिल है. विक्की ट्रेडर्स के गोदाम पर कार्रवाई कर रहे जिला प्रशासन के अधिकारी प्रताप सिंह ने चौंकाने वाले खुलासे किए. प्रताप सिंह ने बताया कि प्रदेशभर में कैसे गरीबों के गेहूं पर डाका डाला जा रहा है.



रिपोर्टर - किस क्षेत्र में कितना गेहूं जाता है...?
प्रताप सिंह, खाद्य अधिकारी, जिला प्रशासन - 'नागरिक आपूर्ति निगम रिलीज करता है...निगम ही बकायदा रिलीजिंग ऑर्डर देता है...रिलीज ऑर्डर के तहत ट्रांसपोर्टर की गाड़ी भरी जाती है...तोल होने के बाद तोल पर्ची बनती है...फिर डिस्पेच होता है...

रिपोर्टर -गेहूं क्या राशन की दुकानों पर जाता है...?
प्रताप सिंह, खाद्य अधिकारी, जिला प्रशासन - किस राशन की दुकान पर डिस्पेच किया था...और कहां नहीं पहुंचा...वहां न पहुंचकर यहां आ गया...'

रिपोर्टर-क्या गरीबों के पास गेहूं नहीं पहुंच रहा...?
प्रताप सिंह, खाद्य अधिकारी, जिला प्रशासन - ' हां, जहां जाना चाहिए वहां नहीं जा रहा...'


आपको बता दे कि सरकार किसानों से गेहूं खरीदता है. इसके बाद प्रदेश की गरीब जनता तक एक रुपए किलो में गेहूं पहुंचाने की जिम्मेदारी नागरिक आपूर्ति निगम के पास रहती है. निगम गेहूं को प्रदेशभर में बने वेयर हाउसों में रखवाता है. इन्हीं वेयर हाउसों से ट्रांसपोर्टर के जरिए गेहूं राशन की दुकानों पर पहुंचकर बांटा जाता है.

न्यूज18/ईटीवी की पड़ताल में पता चला है कि चाहे नागरिक आपूर्ति निगम हो या फिर वेयर हाउस, ट्रांसपोर्टर या फिर राशन की दुकानें, सभी स्तर पर भ्रष्टाचार हो रहा है. एक रुपए किलो वाले गेहूं को व्यापारियों को चोरी छुपे आठ रुपए किलो में बेच दिया जाता है. व्यापारी आठ रुपए में गेहूं खरीदकर उसे 15 रुपए किलो में मार्केट में बेच देता है.

मतलब साफ है कि महीने में वेयर हाउस के अंदर रखे गेहूं में गोलमाल कर रिकॉर्ड को बराबर बताया जाता है. कागजों पर पूरा माल राशन की दुकानों तक पहुंचना बताया जाता है. साथ ही दूसरी तरफ राशन की दुकानों पर भी कागजों पर वेयर हाउस से आए गेंहू को गरीबों को देना बताते हैं.

ऐसे में वेयर हाउस में ही एक महीने या फिर दो महीने का गेहूं स्टॉक कर व्यापारियों को आठ रुपए किलो में ठिकाने लगा दिया जाता है. इस गोरखधंधे में हर स्तर पर अधिकारी, कर्मचारी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े जिम्मेदार लोग रहते हैं. बिना किसी के मिलीभगत के इतना बड़ा घालमेल हो नहीं सकता है.

भोपाल जिला प्रशासन जरूर करोंद मंडी में की गई कार्रवाई के बाद इस पूरी व्यवस्था की जांच करने की बात कह रहा है.

ये महाघोटाला सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है. बल्कि प्रदेशभर में इसी तरीके से पीडीएस के गेहूं में भ्रष्टाचार का घुन लग गया है. अपनी जेबों को गरम करने के लिए जिम्मेदारी अधिकारी गरीबों की दो वक्त की रोटी पर डाका डाल रहे हैं.
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