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MP पुलिस में बंटी जिम्मेदारी, यहां पढ़ें- साइबर क्राइम होने पर कहां मिलेगी मदद?

साइबर क्राइम से जुड़े मामलों की जांच के लिए एमपी में नई व्यवस्था की गई है.

साइबर क्राइम से जुड़े मामलों की जांच के लिए एमपी में नई व्यवस्था की गई है.

MP News: मध्य प्रदेश में जिस तेज गति से साइबर क्राइम (Cyber Crime) बढ़ रहा है और लोग इसके लगातार शिकार हो रहे हैं, ऐसे में उनकी शिकायतों को सुनने की जो व्यवस्था पहले थी उसे बदलने का काम किया गया है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की आम जनता के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है. क्योंकि प्रदेश में जिस तेज गति से साइबर क्राइम (Cyber Crime) बढ़ रहा है और लोग इसके लगातार शिकार हो रहे हैं, ऐसे में उनकी शिकायतों को सुनने की जो व्यवस्था पहले थी उसे बदलने का काम किया गया है. शिवराज सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए स्थानीय थाने में भी साइबर क्राइम की जांच और एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था तैयार की है. इस नई व्यवस्था से अब साइबर क्राइम के शिकार लोगों को स्टेट और जिले की साइबर सेल के चक्कर काटने नहीं पड़ेंगे.

अब तक की व्यवस्था के मुताबिक साइबर क्राइम होने की स्थिति में जिला मुख्यालय या भोपाल में बनी राज्य साइबर सेल में लोगों को शिकायत करना पड़ती थी, लेकिन अब सरकार ने एक नई व्यवस्था लागू की है. इसके तहत छोटे-छोटे साइबर क्राइम की स्थिति में स्थानीय थाना पुलिस मामलों की जांच कर लोगों की मदद करेगी. जबकि किसी बड़े साइबर क्राइम होने की स्थिति में ही साइबर सेल जाने की जरूरत आम आदमी को रहेगी. सरकार ने पुलिस और साइबर सेल के काम को बांट दिया है. यह इसलिए किया गया है ताकि आम जनता साइबर क्राइम से जुडी शिकायतों को लेकर पुलिस के चक्कर न काटे.

2 लाख की ठगी के मामले पुलिस के पास
दरअसल, भोपाल में स्थित राज्य साइबर सेल में हर रोज सैकड़ों मामले आ रहे थे. इन शिकायतों की जांच करना मुश्किल हो रहा था. मामले लगातार पेंडिंग होते जा रहे थे. जब यह मामला शासन के पास पहुंचा तो इस पर मंथन किया गया और जनता की सुविधा के लिहाज से एक बड़ा फैसला लिया. पुलिस मुख्यालय ने जांच को लेकर बड़ा बदलाव किया. इसके लिए राज्य साइबर पुलिस और जिला साइबर पुलिस की जिम्मेदारी बांट दी गई है. इस बंटवारे को लेकर डीजीपी विवेक जौहरी ने सर्कुलर जारी कर दिया है. नए प्रावधान में काम के बंटवारे के तहत अब राज्य सायबर पुलिस अब दो लाख रुपए से नीचे के साइबर अपराधों की जांच नहीं करेगी. ऐसा तब संभव होगा, जब इससे कम का वित्तीय अपराध साइबर टेरेरिज्म, सिस्टम हैकिंग, क्रिप्टो करंसी या ऑनलाइन अनैतिक व्यापार से जुड़ा हो. दो लाख रुपए से नीचे के सभी वित्तीय अपराधों की जांच की जिम्मेदारी अब जिला पुलिस के स्थानीय थाना स्तर की होगी.

ये है स्टेट साइबर पुलिस की जिम्मेदारी
2 लाख से ज्यादा के सायबर अपराध की जांच, नए मोडस ऑपरेंडी से जुड़े साइबर अपराध, सिस्टम हैकिंग या सरकारी संस्था के साथ किए गए ऑनलाइन अपराध, सायबर टेरेरिज्म, क्रिप्टो करंसी और ऑनलाइन अनैतिक व्यापार के मामले, सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, डीजीपी, साइबर स्पेशल डीजी, एडीजी द्वारा निर्देशित अपराधों की जांच स्टेट साइबर पुलिस के जिम्मे होगा. राज्य साइबर पुलिस के एएसपी वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक आईटी एक्ट से जुड़े किसी भी अपराध की विवेचना से जिला पुलिस बचती थी. ओटीपी फ्रॉड, सोशल मीडिया फ्रॉड, मॉर्फिंग या ऑनलाइन स्टॉकिंग जैसे मामलों में भी फरियादी को सायबर सेल जाने की सलाह दे दी जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं हो रहा है। स्थानीय थानों में साइबर क्राइम से जुड़े मामलों की जांच के साथ एफआईआर भी दर्ज हो रही है.

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