नियम के बाद भी ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों को नहीं मिल रही पेंशन, 1985 से कर रहे मांग

Arun Kumar Trivedi | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: November 15, 2017, 1:58 PM IST
नियम के बाद भी ग्रामीण बैंक के कर्मचारियों को नहीं मिल रही पेंशन, 1985 से कर रहे मांग
नियमों की कॉपी दिखाते रिटायर्ड बैंक कर्मचारी तुलसीराम सोनार.
Arun Kumar Trivedi | ETV MP/Chhattisgarh
Updated: November 15, 2017, 1:58 PM IST
ग्रामीण बैंक से रिटायर करीब 33 हजार कर्मचारी कमर्शियल बैंकों के समान पेंशन के हकदार होने के बावजूद इससे वंचित हैं. पेंशन नहीं मिलने से परेशान कर्मचारी उम्र के आखिरी पड़ाव में दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं. ये कर्मचारी 1985 से पेंशन की लड़ाई लड़ रहे हैं, लेकिन सरकार की मंशा पेंशन देने की नहीं है. यही कारण है कि मामला 32 साल से टल रहा है, जिसके चलते करीब 3 हजार ग्रामीण बैंक कर्मचारियों की मौत हो चुकी है और तीस हजार से ज्यादा कर्मचारी मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं.

बैंक के रिटायर कर्मचारी तुलसीराम सोनारे ने जब केन्द्र सरकार से पेंशन नियमों की जानकारी मांगी तो उन्हें वित्त मंत्रालय से मिले जवाब में बताया गया कि नाबार्ड के पेंशन नियम ही ग्रामीण बैंक पर लागू होंगे. जबकि नाबार्ड पेंशन के नियम बना ही नहीं सकता. क्योंकि नाबार्ड को सिर्फ सुपरविजन का अधिकार है. सेवा शर्तें और पेंशन नियम बनाने का अधिकार नहीं है.

कर्मचारियों का कहना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में झूठे गवाह और हलफनाफे पेश कर कोर्ट को भी गुमराह कर रही है, क्योंकि सरकार कर्मचारियों को पेंशन नहीं देना चाह रही है. जबकि ग्रामीण बैंक के कर्मचारियो की सेवा शर्तो में पेंशन देने का भी नियम है. ऐसे में सरकार का मुकरना कर्मचारियों के साथ अन्याय है. एक तरफ सरकार वृद्धों के कल्याण के लिए कई कार्यक्रम चला रही है, वहीं ग्रामीण बैंक से रिटायर हुए बुजुर्ग भूखे मरने की कगार पर हैं.
First published: November 15, 2017
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