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OPINION : कमलनाथ ने कैबिनेट मेंबर्स को जता दिया है अपने सीएम होने का मतलब

कमलनाथ (फाइल फोटो)

कमलनाथ (फाइल फोटो)

पहली कैबिनेट मीटिंग में 2019 के चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनावी समीकरण तय किए गए हैं. कांग्रेस ने 18 से ज्यादा ज़िलों पर फोकस किया है, जहां से वे लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर सकें.

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अगर कार्यकर्ता के लिए किसी मंत्री का दरवाज़ा बंद मिला तो उसे बाहर करने में एक मिनट की भी देर नहीं लगेगी. ध्यान रखें किसी कार्यकर्ता को मिलने के लिए पर्ची नहीं देनी पड़े और आपके घर के दरवाज़े हर व्यक्ति के लिए हमेशा खुले रहें. मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शपथ के बाद अपने 28 कैबिनेट मंत्रियों को ये मैसेज दिया है.

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दिग्विजय सिंह की मौजूदगी में हुई अनौपचारिक बैठक में कमलनाथ ने कहा कि सारे मंत्री-विधायक अपने-अपने क्षेत्र में गांव-गांव तक पहुंचे और जनता को भरोसा दिलवाएं कि कांग्रेस की सरकार आ चुकी है, जो जनता की सरकार है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की मौजूदगी में हुई ये मीटिंग एक तरह से इस बात को भी साबित कर रही थी कि कमलनाथ सरकार में दिग्विजय सिंह की भूमिका कितनी अहम है.

सख़्त तरीका
अपनी कैबिनेट में 28 मंत्रियों को शामिल कर कमलनाथ ने जता दिया है कि वे सख़्त मुख्यमंत्री हैं. उन्हें किसी पॉलिटिकल प्रेशर से प्रभावित नहीं किया जा सकता. वे ना तो किसी नेता की पॉलिटिकल लाइन को छोटा करने में यकीन करते हैं और न ही किसी नेता को अहमियत से ज्यादा आंकते हैं. कमलनाथ के 28 मंत्रियों की कैबिनेट में खुद कमलनाथ गुट के 11, दिग्विजय गुट के 10 और सिंधिया गुट के 7 विधायक मंत्री बनाए गए हैं.

युवा कैबिनेट
पूरी तरह से क्षेत्रीय और जातिगत संतुलन को ध्यान में रखते हुए बनी इस कैबिनेट का चेहरा युवा है. 28 में से दस नेता ऐसे हैं जिनकी उम्र 50 साल से कम है. भाजपा की शिवराज सरकार में सिर्फ तीन मंत्री कम उम्र के थे. पॉलिटिकल बैलेंस बनाते हुए कांग्रेस ने मालवा- निमाड़ से 9 विधायकों को मंत्री बनाया है. यहां की 66 में से 33 सीटें कांग्रेस ने जीती हैं. मध्यक्षेत्र से 6 मंत्री हैं. ग्वालियर-चंबल से 5, महाकौशल से 4, बुंदेलखंड से 3, विंध्य से 1 विधायक को मंत्री बनाया गया है.

जातिगत संतुलन
जातिगत आधार पर देखें तो लंबे समय बाद अल्पसंख्यक वर्ग से 1 विधायक को मंत्री बनाया गया है. मंत्रिमंडल में 9 ठाकुर, 2 ब्राम्हण, 3 यादव, 3 एसटी, 4 एससी, 4 ओबीसी वर्ग से मंत्री बनाए गए हैं जबकि महिला कोटे से 2 विधायक मंत्री बनाई गई हैं.

पचौरी – अजय सिंह गैर मौजूद
चुनाव हार चुके वरिष्ठ नेता अजय सिंह और सुरेश पचौरी कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद नहीं रहे. इससे यह माना गया कि वे नाराज़ हैं. खुद के चुनाव हारने के बाद वे अपने किसी समर्थक को मंत्री बनाने में कामयाब नहीं हो पाए. इसी तरह दिग्विजय सिंह के समर्थक चंबल के नेता केपी सिंह का नाम भी सूची में नहीं देखकर उनके समर्थक धरने पर बैठ गए.

काम नहीं आया निर्दलीय और जयस का प्रेशर
मंत्री बनाने को लेकर जयस विधायक डा. हीरा अलावा ने नाराजगी जाहिर की. वहीं निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह ठाकुर, विक्रम सिंह राणा, केदार डावर, बसपा के संजीव सिंह, राम बाई, सपा के राजेश शुक्ला ने अपनी ताकत दिखाते हुए नाराजगी जताई. बावजूद इसके कमलनाथ किसी प्रेशर में नहीं झुके. पहली बार विधायक बनने का हवाला देते हुए इनमें से किसी को भी मंत्री पद नहीं दिया गया.

कई हो सकते हैं संसदीय सचिव
हालांकि निर्दलीय और बसपा – सपा को खुश करने के लिए कई विधायकों को संसदीय सचिव और निगम मंडलों में नियुक्ति देने की चर्चा है. इसके लिए संसदीय सचिवों को लेकर प्रशासनिक कवायद शुरू कर दी गई है.

2019 के आम चुनाव को ध्यान में रखकर तय किए गए चुनावी समीकरण
पहली कैबिनेट में 2019 के आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए चुनावी समीकरण तय किए गए हैं. कांग्रेस ने 18 से ज्यादा ज़िलों पर फोकस किया है, जहां से वे लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज कर सकें.
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