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बजट समीक्षा : एमपी बजट के हाशिये पर भी जगह नहीं मिली महिलाओं और बुजुर्गों को

मध्य प्रदेश के बजट में कई योजनाओं के लिए जीरो बजट है इसबार. (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश के बजट में कई योजनाओं के लिए जीरो बजट है इसबार. (फाइल फोटो)

MP Budget Reality: सालभर महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों से जुड़े मुद्दों को गंभीर बताने वाली सरकार ने 2021-22 के बजट में उनके लिए धेले भर राशि तक नहीं दी.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की शिवराज सरकार (Shivraj Government) ने बीते मंगलवार को राज्य विधानसभा (Assembly) में 2 लाख 41 हजार 375 करोड़ रुपये का बजट (Budget) पेश किया, जिसमें आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के लिए बजट प्रावधानों का लंबा-चौड़ा खाका जनता के सामने रखा गया. लेकिन सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि पूरे सालभर जिन मुद्दों को गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री से लेकर सत्तारूढ़ दल के नेता सड़क से लेकर सदन तक आंसू बहाते रहे, जिनके नाम की दुहाई देते रहे, उनके लिए बजट में बात तो की गई, लेकिन धेले भर राशि नहीं दी गई. उदाहरण के लिए बजट में महिलाओं, बच्चों, उनकी सुरक्षा, बुजुर्गों, भिखारियों, ट्रांसजेंडर्स समेत कई मसलों और तमाम योजनाओं का जिक्र तो है, लेकिन उनके नाम का बजट ‘जीरो’ है.

बता दें कि मध्य प्रदेश उन राज्यों में शुमार है, जहां महिलाओं के साथ सबसे ज्यादा घरेलू हिंसा, दुष्कर्म, हत्या, छेड़छाड़, दहेज हत्या जैसी वारदात होती है. एक्शन एड और गौरवी (Action Aid And Gouravi) (सखी) वन स्टाप सेंटर द्वारा कुछ अरसा पहले जारी किए गए आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि राज्य में कोरोनाकाल में विशेष रूप से लॉकडाउन के दौरान महिलाएं बहुत बड़ी संख्या में घरेलू हिंसा की शिकार हुईं. संस्था के पास इस अवधि में 1725 के करीब घरेलू हिंसा की शिकायतें आईं. बताया गया कि रोज करीब 12 महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हो रही हैं. यह तो वो आंकड़ा है, जहां महिलाओं ने अपने खिलाफ होने वाली हिंसा को लेकर शिकायत दर्ज कराईं, वरना देश में महिलाएं डर की वजह से इसकी शिकायत ही दर्ज कराने नहीं जाती हैं. ऐसे गंभीर मसले या घरेलू हिंसा रोकने और सुरक्षा के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है.

1 साल में रिकार्ड तोड़ महिला अपराध हुए



पिछले महीने की 21 जनवरी को मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पोस्ट करते हुए राज्य में पिछले एक साल में हुए महिला अपराधों का रिकॉर्ड बताया था. इसके अनुसार पिछले एक साल में प्रदेश में 5600 बलात्कार के मामले, 4031 रेप की कोशिश, 54,649 घरेलू हिंसा, 13,719 छेड़खानी और 2,808 अपहरण के मामले दर्ज किए गए. राज्य के सैकड़ों बच्चे गुम हैं.
महिला सुरक्षा सहायता केन्द्र का बजट ही गायब

घरेलू हिंसा से निबटपने के लिए शुरू किए गए महिला सुरक्षा सहायता केन्द्र (Women’s Safety Support Center) का बजट ही खत्म कर दिया गया. बालिकाओं को बाल विवाह से बचाने के लिए पिछले सात साल से चल रहा लाडो अभियान भी सरकार के इस बार के बजट से गायब है. इसी तरह बेघर, अनाथ बालिकाओं को शिक्षा, कृषि में महिलाओं की भागीदारी, उषा किरण केन्द्र योजना, बालिका छात्रावासों की सुरक्षा समेत करीब 10 योजनाओं को बजट में कुछ नहीं मिला है. इसी तरह महिलाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए भी कोई प्रोत्साहन बजट में नहीं दिखाई देता.

भिखारियों के पुनर्वास, बुजुर्गों के कल्याण के लिए बजट में कुछ नहीं

राज्य में भिक्षावृत्ति, बाल भिक्षावृति खत्म करने और भिखारियों का पुनर्वास करने के लिए ‘भिखारी होम’ (Beggar Home) बनाने की बात तो की गई है, लेकिन बजट जीरो है. इसी तरह बुजुर्गों के लिए एकीकृत कार्यक्रम चलाने, पीएम सहज बिजली योजना भी ऐसी हैं, जिनके नाम पर कोई बजट प्रावधान नहीं किया गया है. बजट में कहा तो कहा है कि ट्रांसजेंडर के कल्याण (Transgender Welfare) के काम होंगे, लेकिन बिना बजट के यह चमत्कार कैसे होने वाला है, यह नहीं बताया गया है.

किसानों के लिए भावांतर योजना गुम

किसानों के लिए जिस भावांतर भुगतान योजना (Bhavantar Bhugtan Yojana) का पिछले साल पूरे राज्य में जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया गया था, वह महत्त्वपूर्ण योजना वर्ष 2021-22 के बजट में गुम है. बता दें कि भावांतर योजना में फसल की कीमतें गिर जाने पर मध्य प्रदेश सरकार बाजार भाव और न्यूनतम समर्थन (MSP) मूल्य के बीच की राशि किसानों को देती है. यह राशि किसानों के खाते में सीधे जमा की जाती है, राज्य में इस योजना के तहत सरकार के ई-पोर्टल पर 1करोड़ से ज्यादा किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए पंजीकृत हैं.

शून्य बजट वाली योजनाओं की संख्या 100 से भी ज्यादा

पिछले तीन दिनों में बजट के आकलन के बाद जो तस्वीर सामने आई है, उसके मुताबिक राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के पास एक सैकड़ा से ज्यादा ऐसी योजनाएं हैं, जिनके लिए बजट में कोई प्रावधान ही नहीं किया गया है या टोकन बजट रखा गया है. इनमें ऐसी ही एक योजना है सुपर मिनी स्मार्ट सिटी योजना, जिसकी घोषणा तो की गई है, लेकिन बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया है. इसके अलावा ट्रांसजेंडर कल्याण एवं पुनर्वास योजना, लड़कियों के लिए आकांक्षा योजना, पीएम सहज बिजली हर घर योजना, ग्रामीण विद्युतीकरण योजना, बलराम तालाब योजना, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की स्थापना की योजना, विक्रमादित्य स्कूल शिक्षा योजना आदि योजनाएं जीरो बजट वाली योजनाओं में शामिल हैं.
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