RSS प्रमुख बोले, शेर जंगल में रहकर शिकार करे तभी शेर

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने नरेन्द्र मोदी सरकार के कामकाज की सराहना के साथ ही नसीहत भी दी है. भोपाल में एक कार्यक्रम में सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत आज दुनिया में सिरमौर देशों की पंक्ति में आ खड़ा हुआ है, विदेशों में भी काम करने से ऐसा माहौल बना है.
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने नरेन्द्र मोदी सरकार के कामकाज की सराहना के साथ ही नसीहत भी दी है. भोपाल में एक कार्यक्रम में सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत आज दुनिया में सिरमौर देशों की पंक्ति में आ खड़ा हुआ है, विदेशों में भी काम करने से ऐसा माहौल बना है.

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने नरेन्द्र मोदी सरकार के कामकाज की सराहना के साथ ही नसीहत भी दी है. भोपाल में एक कार्यक्रम में सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत आज दुनिया में सिरमौर देशों की पंक्ति में आ खड़ा हुआ है, विदेशों में भी काम करने से ऐसा माहौल बना है.

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राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने नरेन्द्र मोदी सरकार के कामकाज की सराहना के साथ ही नसीहत भी दी है. भोपाल में एक कार्यक्रम में सर संघचालक मोहन भागवत ने कहा कि भारत आज दुनिया में सिरमौर देशों की पंक्ति में आ खड़ा हुआ है, विदेशों में भी काम करने से ऐसा माहौल बना है.

हालांकि, संघ प्रमुख मोहन भागवत ने ये भी कहा कि सर्कस में बकरी के साथ खाना खाने वाले शेर को देखकर तालियां बजाई जाती है. यह देखने में भले ही अच्छा लगे, लेकिन सर्कस के शेर की प्रशंसा नहीं होती है. शेर को दहाड़ना चाहिए, उसे शिकार करना चाहिए. शेर का शेर होना ही उसकी उपलब्धि है. शेर जंगल में रहे और शिकार करे, तभी शेर कहलाता है.

भागवत ने कहा कि भारत को भारत रहकर दुनिया में सिरमौर बनाना है तो भारतवासियों को असली भारतीयता की एक बार फिर जांच करनी पड़ेगी. ऐसा तब होता है जब पूरा का पूरा समाज बदलता है.



कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की मौजूदगी में गोवा की राज्यपाल मृदुला सिन्हा के नये उपन्यास 'परितप्त लंकेश्वरी' का लोकार्पण किया. मृदुला सिन्हा अब तक 46 किताबें लिख चुकी हैं.
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि हर मनुष्य आज आज किसी न किसी परिस्थिति में फंसा है. रावण यदि मंदोदरी की बात सुनता को आज रा‌वण की प्रतिमाएं नहीं जलती. दुनिया में वात्स्ल्य की अनुभूति भारतीय महिलाओं के पास ही मिलती है.
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