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MP में एक और घोटाला उजागर; आदिवासियों के 100 करोड़ रुपए खा गए अफसर, EOW की जांच से हुआ खुलासा
Bhopal News in Hindi

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: February 20, 2020, 2:07 PM IST
MP में एक और घोटाला उजागर; आदिवासियों के 100 करोड़ रुपए खा गए अफसर, EOW की जांच से हुआ खुलासा
मध्य प्रदेश में किसानों के नाम पर घोटाला

जैविक खेती (Organic farming) की योजना मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, ग्वालियर, दतिया, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर और छिंदवाड़ा में लागू की जानी थी, मगर अफसरों ने किसानों को फायदा नहीं पहुंचने दिया.

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भोपाल. मध्य प्रदेश में  किसानों के नाम पर भी घोटाला कर दिया गया. मामला जैविक खेती (Organic farming) का है. ये 100 करोड़ का घोटाला शिवराज सिंह चौहान सरकार (Shivraj Singh Chouhan Government) के दौरान हुआ था. EOW ने इस केस की फाइल खोल ली है. इसमें प्रदेश के कई बड़े अफसर फंसते हुए नजर आ रहे हैं.

पिछले विधानसभा सत्र में इस घोटाले की गूंज सुनाई दी थी. उस समय भी कांग्रेस (Congress) के ही विधायकों ने जांच की मांग उठाई थी. विधानसभा सत्र के दौरान यह मामला चर्चा में आया था. अब शिकायत EOW के पास है. उसने एक अलग टीम बनाकर जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है शिकायत से जुड़े तमाम दस्तावेज संबंधित विभाग से जुटाए जा रहे हैं. जैसे-जैसे सबूत आते जाएंगे, कार्रवाई आगे बढ़ेगी. सबूत जुटाने के लिए विभाग के कई अधिकारियों को तलब किया गया.

ये है पूरा मामला
जैविक खेती के नाम पर किया गया ये घोटाला 2017-18 का है. आदिम जाति कल्याण विभाग ने 20 जिलों के आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा, सहरिया के साथ भारिया किसानों को कोदो, कुटकी, ज्वार, बाजरा के उत्पादन में सहयोग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के लिए करीब 100 करोड़ रुपए कृषि विभाग को दिए थे. विभाग का मकसद जैविक खेती करने वाले आदिवासी किसानों को बढ़ावा दिया जाना था. यह पैसा आदिवासी किसानों के लिए केंद्र से मिला था. विभाग को इससे खाद-बीज खरीदना थे और फिर प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के लिए किसानों को देना थे.



ऐसा हुआ घोटाला
प्लान ये था कि रासायनिक खाद के बजाए जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए. सरकार ने पैसा तो दे दिया, लेकिन अफसरों ने उसका फायदा किसानों को नहीं पहुंचाया. सितंबर 2018 में जैविक खेती के लिए 100 करोड़ रुपए का बजट रखा गया. एमपी एग्रो को खाद सहित बाकी सामान उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई थी. एग्रो ने निजी कंपनियों को ठेका दिया. आरोप है कि जो सामग्री दी गई वो बेहद घटिया थी. खाद में राख और मिट्टी मिली थी और तरल पदार्थ में पानी भरा था. इस योजना को मंडला, बालाघाट, डिंडौरी, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, ग्वालियर, दतिया, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर और छिंदवाड़ा में लागू किया जाना था.

बीजेपी पर आरोप
कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल का कहना है आदिवासियों के नाम पर बीजेपी सरकार ने कई घोटाले किए. इसलिए हमारी सरकार अब इन सभी घोटालों की जांच करा रही है. इनमें आदिवासी किसानों के साथ हुआ घोटाला भी शामिल है. EOW राज्य की सबसे अच्छी एजेंसी है. यही कारण है कि सीएम कमलनाथ ने तमाम घोटालों की जांच इसी एजेंसी को सौंपी है.

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First published: February 20, 2020, 12:51 PM IST
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