BJP में जाते ही PCC दफ्तर से फेंक दी गई ज्योतिरादित्य सिंधिया की नेम प्लेट

पीसीसी से हटायी गयी सिंधिया की नेमप्लेट
पीसीसी से हटायी गयी सिंधिया की नेमप्लेट

ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष थे. उन्हें प्रदेश कांग्रेस में पहली बार यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उन्हें केबिन के साथ स्टाफ भी दिया गया था. लेकिन सिंधिया को ये केबिन पसंद नहीं था.

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भोपाल. बीजेपी (bjp) की सदस्यता लेते ही भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय (pcc) में बने ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) का केबिन हटा दिया गया. उनकी नेम प्लेट फेंक दी गई. पीसीसी के ग्राउंड फ्लोर पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, अजय सिंह के साथ सिंधिया का केबिन था. साथ में उनके स्टाफ का भी एक केबिन था. लेकिन सिंधिया के कांग्रेस से जाते ही दोनों केबिन हटा दिए गए. सिंधिया से नाराज कांग्रेसियों ने नेम प्लेट को फेंका और उनका पुतला जलाया.

बुधवार को जब सिंधिया के बीजेपी में जाने की खबर आई, तो सिंधिया खेमे को छोड़कर बाकी खेमे के समर्थक नाराज हो गए. सबसे पहले यूथ कांग्रेस ने पीसीसी के सामने उनका पुतला जलाया. इसके बाद दिग्विजय सिंह के समर्थकों ने सिंधिया की नेम प्लेट फेंक दी. अब उनके केबिन को भी हटा दिया गया. यह केबिन जल्द ही किसी दूसरे पदाधिकारियों को दिए जाएंगे. सिंधिया को लेकर कांग्रेस के एक खेमे में जबर्दस्त नाराजगी है. उनके खिलाफ शहर में जगह-जगह प्रदर्शन भी किए जा रहे हैं. सिंधिया को लेकर तरह-तरह के बयान भी आ रहे हैं.

चुनाव समिति के अध्यक्ष थे सिंधिया
ज्योतिरादित्य सिंधिया मध्य प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष थे. उन्हें प्रदेश कांग्रेस में पहली बार यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. उन्हें केबिन के साथ स्टाफ भी दिया गया था. लेकिन सिंधिया को ये केबिन पसंद नहीं था. यही वजह रही कि वह एक-दो बार ही इस केबिन में कुछ समय के लिए बैठे थे. उनका स्टाफ जरूर कभी-कभी आ जाता था. वरना हर समय इन दोनों केबिन में ताला लगा रहता था.
नहीं मिली कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी


ज्योतिरादित्य सिंधिया को मध्य प्रदेश कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष के बाद कोई दूसरा पद नहीं दिया गया. उन्हें कोई महत्वपूर्ण पद नहीं दिया गया. सरकार बनने के बाद से उनकी उपेक्षा करने के आरोप लगते रहे. उनके खेमे से पीसीसी चीफ बनाने की मांग उठने लगी, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद भी यह पद उन्हें नहीं दिया गया. सरकार में भी उनके समर्थित मंत्रियों की नहीं चलती थी. अब कहा जा रहा है कि बीजेपी में जाने के पीछे सिंधिया की नाराजगी यही वजह बनी है. यही वजह है कि उनके समर्थित छह मंत्री और 16 विधायक उनके समर्थन में इस्तीफा भी दे दिया है.

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