'BHOPAL EYE' बनी पुलिस की तीसरी आँख, सरकारी से ज्यादा प्राइवेट कैमरों पर भरोसा

'BHOPAL EYE' बनी पुलिस की तीसरी आँख, सरकारी से ज्यादा प्राइवेट कैमरों पर भरोसा (प्रतीकात्मक फोटो)
'BHOPAL EYE' बनी पुलिस की तीसरी आँख, सरकारी से ज्यादा प्राइवेट कैमरों पर भरोसा (प्रतीकात्मक फोटो)

भोपाल आई एप (Bhopal eye app) को डाउनलोड कर करीब 10 हजार लोग अपने घर, दुकान, मार्केट, बाजार के बाहर लगे कैमरों की लोकेशन पुलिस को उपलब्ध करा रहे हैं.

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भोपाल. राजधानी भोपाल पुलिस (Bhopal police) के लिए भोपाल आई (bhopal eye) अब तीसरी आंख बन गयी है. पुलिस को शहर में लगे सीसीटीवी सर्विलेंस कैमरा से ज्यादा आम जनता के प्राइवेट कैमरों पर भरोसा हो चला है. भोपाल आई से अब तक 10,000 लोग जुड़ चुके हैं जिन्होंने अपने घर, दुकान और दूसरी जगहों पर लगे करीब 50 हजार सीसीटीवी कैमरों का लिंक भोपाल पुलिस को दिया है. पुलिस अब इन प्राइवेट कैमरों के ज़रिए अपराध और अपराधियों पर नज़र रख रही है. इन प्राइवेट कैमरों की वजह से पुलिस एक महीने में 90 वारदातों का खुलासा कर चुकी है.

भोपाल पुलिस की भोपाल आई योजना को ज़बरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है. भोपाल आई एप को डाउनलोड कर करीब 10 हजार लोग अपने घर, दुकान, मार्केट, बाजार के बाहर लगे कैमरों की लोकेशन पुलिस को उपलब्ध करा रहे हैं. ऐसे में अपराध होने के बाद पुलिस को आरोपितों के फुटेज मिल जाते हैं. इन्हीं 'आंखों' की मदद से एक महीने में लूट, चोरी समेत दूसरी आपराधिक वारदातों का खुलासा कर आरोपियों को पकड़ा जा चकुा है.

ये है भोपाल आई एप
भोपाल आई एप को पुलिस ने खुद अपनी तकनीकी टीम के साथ मिलकर तैयार कराया है. इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है. इसके बाद उस पर दिए ऑप्शन को चुनकर अपने घर, दुकान, अस्पताल, बाजार या दूसरे स्थानों पर लगे कैमरों को पुलिस कंट्रोल रूम से लिंक किया जा सकता है. पुलिस अलग-अलग स्थानों पर बनाए गए कंट्रोल रूम से इसकी निगरानी करती है.इससे अपराधियों को पकड़ने में आसानी हो रही है. जिस इलाके में वारदात होती है पुलिस इस इलाके में लगे इन प्राइवेट सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगाल कर उनके ज़रिए अपराधियों का पता लगाती है.
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