चेत जाएं, फिर आ रही कोरोना की दूसरी लहर को उठने न दें

हरिद्वार में कोरोना स्ट्रेन की दस्तक से प्रशासन सतर्क, स्नान के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की होगी जांच

हरिद्वार में कोरोना स्ट्रेन की दस्तक से प्रशासन सतर्क, स्नान के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की होगी जांच

COVID-19 Alert: पिछली महामारियों से जो सबक दुनिया ने सीखा वो यह कि किसी भी महामारी की दूसरी लहर पहली से ज्यादा खतरनाक होती है, इसलिए जरूरत है हम सब चेत जाएं. मास्क पहनने, दो गज की दूरी को बनाए रखने जैसी नसीहत को मानें. कोरोना की दूसरी लहर को न उठने दें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 24, 2021, 12:44 PM IST
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वसंत के इस खुशनुमा मौसम में दहशत अपना डेरा फिर जमा रही है, कोरोना महामारी की दूसरी लहर मप्र समेत देश के कई राज्यों में लोगों के दिलों की धड़कन बढ़ा रही है. बता दें कि बीते एक साल में हमने जो कुछ झेला है, उससे हम आज तक नहीं उबर पाए है. अब फिर सूचना मिल रही है कि कोरोना का नया दौर पहले से ज्यादा खतरनाक है. पिछली महामारियों से जो सबक दुनिया ने सीखा वो यह कि किसी भी महामारी की दूसरी लहर पहली से ज्यादा खतरनाक होती है, इसलिए जरूरत है हम सब चेत जाएं. मास्क पहनने, दो गज की दूरी को बनाए रखने और बेहद जरूरी काम होने पर ही पूरी सावधानी के साथ घर से निकलने की नसीहत को माने. कोरोना की दूसरी लहर को न उठने दें. खुद को सर्दी, खांसी, बुखार से बचाएं.

कहा जा रहा है कि महामारी की दूसरी लहर के साथ आ रहा कोरोना वायरस का स्ट्रेन यानी वैरिंयेंट (New Variant) ज्यादा खतरनाक है. सावधानी इसलिए भी जरूरी है कि कोरोना महामारी (Corona Epidemic) की पहली मार से ही तन-मन-धन, रोजगार से टूट चुके लोग महामारी की दूसरी मार सहने की हालत में नहीं है. इसलिए सरकारों, वैक्सीन, दूसरों की मदद के भरोसे न रहें, वो काम तो शासन-प्रशासन के स्तर पर हो ही रहा है. उसकी अपनी रफ्तार है. इसलिए डाक्टरों से लेकर प्रशासन की सलाह है कि इस मामले में खुद आत्मनिर्भर बन जाएं. सरकार और सिस्टम की नसीहतों को माने, अपना बचाव, अपनी मदद खुद करें, भीड़भाड़ में जाने से बचें.

जो कुछ झेला, आज तक नहीं उबर पाए



बता दे कि बीते एक साल में हमने जो कुछ झेला है, उससे हम आज तक नहीं उबर पाए है. अब फिर सूचना मिल रही है कि कोरोना का यह दौर पहले से ज्यादा खतरनाक है, देश में पिछले कुछ दिनों में कोरोना वायरस की महामारी में तेजी देखने को मिली है. केरल और महाराष्ट्र के अलावा पंजाब, मप्र में भी कोरोना के मामलों में अचानक तेजी देखने को मिल रही है. जिसने सरकार की चिंताओं को बढ़ा दिया है.

महाराष्ट्र में 81 फीसदी, MP में फीसदी केस बढ़े



पिछले एक सप्ताह में महाराष्ट्र में कोरोना के मामलों में 81 फीसदी, पंजाब में 31, मध्यप्रदेश, चंडीगढ़ में 43-43 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 13 फीसदी, हरियाणा में 11 फीसदी उछाल देखने को मिला है. मप्र में तो जहां कोरोना उतार पर था, रोज बमुश्किल सौ के आसपास केस मिल रहे थे, कोरोना से मौत का सिलसिला लगभग थम सा गया था, वहीं एक हफ्ते में 2 हजार से ज्यादा कोरोना के सामने आए नए मामलों ने सरकार और लोगों की चिंता बढ़ा दी है. राजधानी भोपाल और व्यावसायिक नगरी इंदौर के अलावा होशंगाबाद, बैतूल, सिवनी, बालाघाट, बड़वानी, खंडवा, खरगौन, अलीराजपुर समेत 12 जिलों में बढ़ते मामलों के बाद प्रशासन एक्शन मोड पर आ गया है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए सभी प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को आपदा प्रबंधन कमेटियों (Crisis management Committees) की बैठक तुरंत बुलाकर कोरोना की दूसरी लहर से बचाव के उपाय तलाशने को कहा है.

लॉकडाउन जैसी सख्ती के रास्ते पर





भोपाल में तो मंगलवार को हुई आपदा प्रबंधन की बैठक के बाद धरना-प्रदर्शनों और मेलों पर रोक लगा दी गई. साथ ही मास्क न पहनने वालों पर जुर्माना, रोको-टोको अभियान शुरू कर दिया गया है. राजधानी लाकडाउन (Lockdown) वाले दिनों की सख्ती की ओर बढ़ रही है. इंदौर भी कमोबेश इसी रास्ते पर है, जहां प्रदेश में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमण के नए केस रोज मिल रहे हैं.

छत्तीसगढ़ में कोरोना रिटर्न, सावधान



छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महाराष्ट्र में कोविड-19 के बढ़ते प्रकरणों को देखते हुए राजधानी रायपुर के एयरपोर्ट और महाराष्ट्र बॉर्डर में कोरोना की थर्मल स्क्रीनिंग करने के निर्देश अधिकारियों को निर्देश दिए हैं.

नया वैरियंट ज्यादा खतरनाक



आंकड़ों के मुताबिक 6 राज्यों में 87 फीसदी कोरोना वायरस के मामले सामने आए है. पंजाब में पिछले 5 दिनों में महाराष्ट्र की तरह कोरोना वायरस के नए मामले दर्ज किए गए है. पंजाब में कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन के बीच कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी दर्ज की है. जिसके बारे में कहा जा रहा है कि यह कोरोना के मौजूदा वेरिंयट की तुलना में अधिक संक्रामक है. आशंका जताई जा रही है कि इसके पीछे कोरोना वायरस का नया स्वरूप एक बड़ा और जिम्मेदार कारण हो सकता है. इसका पता लगाने के लिए सैम्पल्स की जीनोम सीक्वेसिंग की जा रही है. बता दें कि दिल्ली में उपराज्यपाल अनिल बैजल ने अधिकारियों को क्लस्टर बेस्ड जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू करने के निर्देश दिए है. क्लस्टर बेस्ड जीनोम सीक्वेंसिंग टेस्टिंग और सर्विलांस ससे वायरस के म्यूटेशन की पहचान होती है. मध्य प्रदेश हो या पंजाब या दिल्ली, तीन-चार दिन बाद ही पता चल सकेगा कि नए वेरियंट के साथ कोरोना महामारी जाने से पहले ही दोबारा हमला बोल रही है या कुछ और कारण हैं. कोविड—19 के मामले बढ़ने के पीछे कोई नया वैरियंट है या नहीं. इसके सैम्पल बेंगलुरु से भी मांगे गए हैं.

क्यों फैल रहा कोरोना



डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में जब-जब बदलाव होता है, संक्रामक बीमारियां तेजी से फैलती हैं. अभी वसंत का मौसम है, पतझड़ चल रहा है. संक्रामक बीमारियों के बढ़ने का समय है. अस्पतालों के ओपीडी सर्दी, जुकाम, खांसी, उल्टी, दस्त के मरीजों से भरे पड़े हैं. कोरोना भी संक्रामक महामारी है, क्योंकि खांसी, छींक के माध्यम से तेजी से फैलती है. कोरोना संक्रमण बढने का एक बड़ा कारण ये मौसम भी हो सकता है.

सावधानी क्यों जरूरी है



मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र के साथ-साथ पूरे देश में कोरोना से बचाने वाले वैक्सीन को लगाने का अभियान पिछले महीने 16 जनवरी को शुरू हुआ था, इस अभियान को एक माह से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन टीके अभी सिर्फ डाक्टरों और हास्पिटल स्टाफ जैसे फ्रंटलाइन कोरोना वारियर्स को ही लगाए जा सके हैं, आम आदमी का नंबर तो अभी आया ही नहीं है. टीकाकरण की मौजूदा नीति स्वास्थ्यकर्मियों के बाद 1 मार्च से 50 की उम्र पार कर चुके लोगों को वैक्सीन देने की है. जिन्हें टीके लगे हैं, उन्हें दूसरा डोज दिए जाने के बाद ही असर को जांचा सकेगा.

ऐसे बच सकते हैं कोरोना से



-ऐसे में तेजी से बढ़ रहे कोरोना महामारी को केवल अपनी ही सावधानी से रोका जा सकता है. यह वक्त है हम सब चेत जाएं, सिस्टम या तंत्र का सहयोग करें , मास्क को जिंदगी का हिस्सा बनाएं, उससे तौबा न करें. डॉक्टरों की सलाह है कि सर्जिकल मास्क सबसे सुरक्षित है, मास्क अपनी सुविधा से खरीदें, लेकिन घर से निकलने से लेकर घर लौटने तक इसका उपयोग करें.

-अभी नहीं, तो कभी नहीं, शारीरिक दूरी और हाथ धोने की आदत बनाए रखें. बार-बार हाथ धोएं.

-वैक्सीनेशन की रफ्तार में तेजी लाई जाए. लेकिन केवल वैक्सीनेशन के भरोसे रहने भर से काम नहीं चलेगा.

-एक साल से जो छोटी-छोटी सावधानियों की नसीहतें हमें मिल रही हैं, उन्हें फिर से दोहराएं,

-घर पर बना खाना खाएं, बाहर खाने से बचें. बेवजह घूमने न निकलें, यह हानिकारक हो सकता है. (डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं)
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