लोकसभा चुनाव 2019 : ऐसे घिरे ये दिग्गज कि अपने ही इलाके से बाहर निकलना हुआ मुश्किल

कांग्रेस हो या बीजेपी, ये नेता अपनी ही सीट पर इतनी बुरी तरह घिरे हुए हैं कि बाकी पूरे प्रदेश में पार्टी प्रचार के लिए इनका निकल पाना भी मुश्किल लग रहा है.

Ranjana Dubey | News18 Madhya Pradesh
Updated: April 4, 2019, 11:38 AM IST
लोकसभा चुनाव 2019 : ऐसे घिरे ये दिग्गज कि अपने ही इलाके से बाहर निकलना हुआ मुश्किल
फाइल फोटो
Ranjana Dubey | News18 Madhya Pradesh
Updated: April 4, 2019, 11:38 AM IST
लोकसभा चुनाव जीतने के लिए मध्य प्रदेश के नेता रात-दिन एक किए हुए हैं. लेकिन इस बार दिलचस्प ये है कि कांग्रेस-बीजेपी दोनों ही दलों के कई नेता पूरे प्रदेश में पार्टी को जीत दिलाने की बजाए खुद अपनी ही सीट पर घिरे हुए हैं. इस बार मुकाबला इतने कांटे का है कि दिग्गजों को अपनी सीट निकालना ही मुश्किल लग रहा है.

विधानसभा चुनाव में जीत के हीरो रहे कांग्रेस नेता अब खुद की सीट बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. सीएम कमलनाथ अब संसद से विधानसभा लौटने की तैयारी में हैं. इस बार वो छिंदवाड़ा लोकसभा के बजाए विधानसभा सीट से मैदान में हैं. लेकिन अपनी लोकसभा सीट बेटे नकुलनाथ को सौंपना चाहते हैं. इसलिए लोकसभा के साथ विधानसभा उपचुनाव पर भी उनका फोकस है. यही हाल गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया का है. खबरें आती रहीं हैं कि इस बार गुना-शिवपुरी में उनकी राह आसान नहीं है. सीट बदलने की भी अटकलें रहीं.

पार्टी के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को तो बीजेपी के गढ़ भोपाल से उतार दिया गया है. विधानसभा चुनाव में समन्वय समिति के मुखिया रहे दिग्विजय सिंह इस बार अपनी सीट जीतने तक केंद्रित रह गए हैं. उधर बात करें पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के गढ़ वाले विंध्य क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले अजय सिंह की, तो वो भी मुश्किल में हैं. हाल ही में अपनी और अपने पिता स्व. अर्जुन सिंह की परंपरागत चुरहट सीट से वो विधानसभा चुनाव तक हार गए थे. पार्टी अब उन्हें सीधी से टिकट देने जा रही है. लेकिन क्या विधानसभा चुनाव की हार के बाद वो अब लोकसभा चुनाव में अपनी साख बचा पाएंगे.

किस नेता के सामने कौन सी चुनौती

सीएम कमलनाथ का छिंदवाड़ा पर फोकस
बेटे नकुलनाथ की जीत की बढ़ी ज़िम्मेदारी
ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए गुना चुनौती
दिग्विजय सिंह के भोपाल की कांटो भरी राह
अजय सिंह राहुल के लिए सीधी साख का सवाल
विधानसभा चुनाव की हार के बाद लोकसभा में जीत ज़रूरी

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यही स्थिति इस बार बीजेपी की है. विधानसभा चुनाव हार चुकी बीजेपी के लिए लोकसभा चुनाव जीतना बड़ी चुनौती है. ग्वालियर क्षेत्र में भाजपा के लिए जीतना किसी मुश्किल से कम नहीं है.केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह ग्वालियर छोड़कर इस बार मुरैना चले गए हैं. हालांकि चर्चा है कि अब भोपाल से उन्हें उतारा जा सकता है. अगर भोपाल सीट से नरेंद्र सिंह प्रत्याशी होते हैं तो भोपाल सीट निकालना किसी चुनौती से कम नहीं होगा.

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जबलपुर में प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष राकेश सिंह की स्थिति बेहद खराब मानी जा रही है. खुद की सीट बचाने के लिए उन्हें अब मशक्कत करनी पड़ रही है. दमोह सांसद प्रहलाद पटेल लोधी समाज के बीच मजबूत पकड़ के चलते विधानसभा चुनाव में कई क्षेत्रों में प्रचार के लिए पहुंचे थे. लेकिन लोकसभा चुनाव में बदले हालात में प्रहलाद पटेल यहां से निकल नहीं पा रहे हैं. केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक दलित औऱ आदिवासी वर्ग का चेहरा हैं. इस बार वो टीकमगढ़ सीट तक सीमित रह गए हैं.

कांग्रेस हो या बीजेपी, ये नेता अपनी ही सीट पर इतनी बुरी तरह घिरे हुए हैं कि बाकी पूरे प्रदेश में पार्टी प्रचार के लिए इनका निकल पाना भी मुश्किल लग रहा है.

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