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EXCLUSIVE: शहर-ए-गजल में थम गया उर्दू शायर का सफर

EXCLUSIVE: शहर-ए-गजल में थम गया उर्दू शायर का सफर

भोपाल को ताल-तलैया और नवाबों का शहर कहा जाता है, यह तो सभी जानते हैं। बहुत कम लोग जानते है कि इस शहर को शहर-ए-गजल के नाम से भी पहचान मिली हैं। इसी शहर-ए-गजल में बलबीर राज पृथ्वीराज कपूर' उर्फ शशि कपूर उर्दू शायर बनने आए थे। हालांकि, वह रियल लाइफ में नहीं बल्कि रील लाइफ में उर्दू शायर बने थे। शशिकपूर ने यहां इन कस्टडी (मुहाफिज) फिल्म की शूटिंग की थी जो उनके कैरियर की अंतिम हिंदी फिल्म थी।

भोपाल को ताल-तलैया और नवाबों का शहर कहा जाता है, यह तो सभी जानते हैं। बहुत कम लोग जानते है कि इस शहर को शहर-ए-गजल के नाम से भी पहचान मिली हैं। इसी शहर-ए-गजल में बलबीर राज पृथ्वीराज कपूर' उर्फ शशि कपूर उर्दू शायर बनने आए थे। हालांकि, वह रियल लाइफ में नहीं बल्कि रील लाइफ में उर्दू शायर बने थे। शशिकपूर ने यहां इन कस्टडी (मुहाफिज) फिल्म की शूटिंग की थी जो उनके कैरियर की अंतिम हिंदी फिल्म थी।

भोपाल को ताल-तलैया और नवाबों का शहर कहा जाता है, यह तो सभी जानते हैं। बहुत कम लोग जानते है कि इस शहर को शहर-ए-गजल के नाम से भी पहचान मिली हैं। इसी शहर-ए-गजल में बलबीर राज पृथ्वीराज कपूर' उर्फ शशि कपूर उर्दू शायर बनने आए थे। हालांकि, वह रियल लाइफ में नहीं बल्कि रील लाइफ में उर्दू शायर बने थे। शशिकपूर ने यहां इन कस्टडी (मुहाफिज) फिल्म की शूटिंग की थी जो उनके कैरियर की अंतिम हिंदी फिल्म थी।

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भोपाल को ताल-तलैया और नवाबों का शहर कहा जाता है, यह तो सभी जानते हैं। बहुत कम लोग जानते है कि इस शहर को शहर-ए-गजल के नाम से भी पहचान मिली हैं। इसी शहर-ए-गजल में बलबीर राज पृथ्वीराज कपूर' उर्फ शशि कपूर उर्दू शायर बनने आए थे। हालांकि, वह रियल लाइफ में नहीं बल्कि रील लाइफ में उर्दू शायर बने थे। शशिकपूर ने यहां इन कस्टडी (मुहाफिज) फिल्म की शूटिंग की थी जो उनके कैरियर की अंतिम हिंदी फिल्म थी।

भारत सरकार ने सोमवार को वर्ष 2014 का दादा साहब फाल्के अवार्ड अभिनेता शशि कपूर को देने का फैसला किया है। शशिकपूर की मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और इंदौर से कई यादें जुड़ी है। शशि कपूर 1993 में प्रदर्शित फिल्म इन कस्टडी (मुहाफिज) की शूटिंग भोपाल में हुई थी। शशिकपूर ने इस फिल्म में उर्दू शायर का किरदार निभाया था। इस फिल्‍म में शशि कपूर के साथ शबाना आजमी, ओम पुरी, परीक्षित साहनी, नीना गुप्ता, सुषमा सेठ जैसे कलाकारों ने भी काम किया। शशिकपूर फिल्म की शूटिंग के दौरान डेढ़ से दो महीने तक भोपाल में रहे।

फिल्मों के जानकार और इस फिल्म में एक्स्ट्रा कलाकार की भूमिका निभाने वाले खालिद उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि शशिकपूर को नजदीक से देखने का एक अलग ही अहसास था। फिल्म की अधिकांश शूटिंग गौहर महल में हुई थी। यह वह दौर था जब शशिकपूर का वजन काफी बढ़ चुका था। उन्हें इस लुक में देखकर हर कोई अचरज भरी निगाह से देखता था। खालिद को यह भी अच्छी तरह से याद है कि वे जिस एम्बेसेडर कार में आते थे उसमें वह बड़ी मुश्किल से बैठ पाते थे।

हालांकि, इतने बड़े स्टार होने के बावजूद वह हर किसी से बड़े ही आत्मीयता से मिलते थे। शूटिंग के दौरान उनकी कई लोगों से जान-पहचान हुई और वह उनके जेहन में हमेशा के लिए बस गए। भोपाल के अलावा शशिकपूर का प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में भी आना-जाना लगा रहता था।

मेरे पास मां हैं, इस संवाद से लोकप्रियता हासिल करने वाले शशिकपूर भोपाल में हुई शूटिंग के बाद धीरे-धीरे फिल्मों से दूर होते गए। इन कस्टडी मुहाफिज के लिए शशिकपूर को राष्ट्रीय फिल्म अवार्ड का स्पेशल ज्यूरी अवॉर्ड मिला। वहीं फिल्म में बेस्ट आर्ट डायरेक्शन के लिए सुरेश सावंत को राष्ट्रीय अवॉर्ड मिला।

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Tags: Bollywood

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