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16 अगस्त की वो सुबह... शेहला मसूद हत्याकांड की पूरी कहानी

16 अगस्त की वो सुबह... शेहला मसूद हत्याकांड की पूरी कहानी

आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्याकांड मामले में इंदौर की सीबीआई अदालत ने शनिवार को अपना फैसला सुना दिया. अदालत ने जाहिदा परवेज, सबा फारूखी, शाकिब और ताबिश को उम्रकैद की सजा सुनाई है. सरकारी गवाह बने इरफान को बरी किया गया है.

आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्याकांड मामले में इंदौर की सीबीआई अदालत ने शनिवार को अपना फैसला सुना दिया. अदालत ने जाहिदा परवेज, सबा फारूखी, शाकिब और ताबिश को उम्रकैद की सजा सुनाई है. सरकारी गवाह बने इरफान को बरी किया गया है.

आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्याकांड मामले में इंदौर की सीबीआई अदालत ने शनिवार को अपना फैसला सुना दिया. अदालत ने जाहिदा परवेज, सबा फारूखी, शाकिब और ताबिश को उम्रकैद की सजा सुनाई है. सरकारी गवाह बने इरफान को बरी किया गया है.

    आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद हत्याकांड मामले में इंदौर की सीबीआई अदालत ने शनिवार को अपना फैसला सुना दिया. अदालत ने जाहिदा परवेज, सबा फारूखी, शाकिब और ताबिश को उम्रकैद की सजा सुनाई है. सरकारी गवाह बने इरफान को बरी किया गया है.

    क्या है पूरा मामला

    16 अगस्त 2011 की सुबह पूरे देश में अन्न हजारे के आंदोलन की धूम थी. देश की राजधानी दिल्ली से लेकर देश की धड़कन मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक हर जगह इस आंदोलन में शामिल होने के लिए जनसैलाब उमड़ रहा था. अन्ना हजारे से जुड़ी एक ऐसी ही रैली में शामिल होने के लिए आरटीआई कार्यकर्ता शेहला मसूद अपने घर से निकली थी. लेकिन चंद कदमों बाद उसकी जिंदगी का सफर थम गया.

    घर के बाहर कार में मारी गोली

    शहला मसूद की राजधानी के कोहेफिजा इलाके में उनके बंगले के ठीक बाहर कार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पहले इस मामले को खुदकुशी माना गया, लेकिन ठोस सबूत नहीं मिलने और हाई-प्रोफाइल मामला होने की वजह से केस की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी.

    शहला की हत्या में जुटी सीबीआई ने कोहेफिजा इलाके के सभी मोबाइल टॉवर से जुड़ी कॉल डिटेल निकलवाई थी. हजारों फोन कॉल की जांच के बाद सीबीआई शाकिब और इंटीरियर डिजाइनर व शेहला की परिचित जाहिदा परवेज पर नजर रखे थी.

    फोन कॉल से मिला अहम सुराग

    शेहला को जैसे ही कानपुर से आए कॉन्ट्रेक्ट किलर ने गोली मारी, शाकिब ने जाहिदा को कॉल कर इसकी सूचना दी. यही कॉल सीबीआई को चर्चित मर्डर मिस्ट्री की रहस्य तक लेकर गया.

    जाहिदा ने शेहला के कत्ल के लिए शाकिब डेंजर से संपर्क किया. शाकिब कानपुर के तलाक महल इलाके में रहने वाले इरफान से मिला. इरफान अपने साथ शानू ओलंगा और सलीम को साथ लाया था. जाहिदा के साथ इस साजिश में उसकी राजदार सबा फारूखी भी शामिल थी. सीबीआई ने सबा को भी आरोपी बनाया है.

    सुपारी देकर हत्या

    10 अगस्त 2011 को जाहिदा ने काली इंडिका कार से जाकर उन्हें दो लाख रुपये दिए. बाकी रकम काम हो जाने के बाद देना तय हुआ. 20 नवंबर 2011 को शानू की कानपुर में हुए एक गैंगवार में रईस बनारसी और राजकुमार उर्फ मामा बिंद ने हत्या कर दी थी.

    भोपाल के पुराने शहर से पकड़े गए शाकिब डेंजर ने सीबीआई को बताया कि तीनों शूटरों के साथ वह भी 16 अगस्त को शेहला के घर गया था. इससे पहले उन्होंने कई बार रेकी भी की थी. शाकिब एक अलग बाइक से था और तीनों शूटर एक बाइक से थे. बाइक जाहिदा ने उपलब्ध कराई थी. गोली मारने के बाद शानू आगरा और इरफान व सलीम कानपुर चले गए थे. शाकिब इस दौरान भोपाल में ही घूमता रहा था.

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