OPINION : आपदा को राजनैतिक अवसर में बदलती शिवराज सरकार
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OPINION : आपदा को राजनैतिक अवसर में बदलती शिवराज सरकार
शिवराज ने अपने दांव से विरोधियों को दिया करारा जवाब, RS चुनाव में दिखाया दमखम

किसानों के लिए बनी सरकारी हेल्पलाइन का नाम "कमल सुविधा केंद्र" रख दिया गया है. विपक्ष अब मायने तलाशने में लगा है कि ये कृषि मंत्री कमल पटेल को खुश करने के लिए रखा गया या भाजपा के चुनाव चिह्न कमल पर है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 30, 2020, 9:09 PM IST
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प्रवीण दुबे

एमपी कोरोना को लेकर ऊपरी पायदान में है. कई जिले बहुत बुरी तरह से संक्रमित हैं, सरकार का ऐसे में तेज काम करना वाजिब है. लेकिन इस क्रम में सरकार की सेल्फ ब्रांडिंग पर सवाल उठ रहे हैं. पहले बात करते हैं, उस काढ़े की जो सरकार के दावे के मुताबिक एक करोड़ लोगों के बीच बांटा जाना है. उस काढ़े के पैकेट पर सरकारी विभागों ने शिवराज सिंह चौहान का फोटो लगा दिया. क्वारंटाइन सेंटर्स में मरीजों के मनोरंजन के लिए जो नाच-गाना चल रहा है, उसमें भी बहुत बड़ा शिवराज जी का फोटो लगा रहता है. इन सब पर शुरू हुआ बवाल ठीक से थमा नहीं कि किसानों के लिए बनी सरकारी हेल्पलाइन का नाम "कमल सुविधा केंद्र" रख दिया गया है. विपक्ष अब मायने तलाशने में लगा है कि ये कृषि मंत्री कमल पटेल को खुश करने के लिए रखा गया या भाजपा के चुनाव चिह्न कमल पर है.

विपक्ष के निशाने पर कमल सुविधा केंद्र



शिवराज के बारे में अक्सर कहा जाता है कि उनके अंदर आपदा को अवसर बदलने में क्षमता बहुत है. सूबे में बाढ़ से लेकर उत्तराखंड हादसे में एमपी के लोगों के फंसे होने का मामला हो या फिर व्यापमं का दोबारा निकला जिन्न, शिवराज ने हर ऐसी आपदा को बखूबी अवसर में बदला है. इस वक्त कोरोना की आपदा में सरकार और भाजपा की ब्रांडिंग जोरों पर है. काढ़े के पैकेट में शिवराज का फोटो बहुत चर्चा में आया था. विपक्ष ने सवाल भी खड़े किए. अब सरकार किसानों का अनाज खरीद रही है, उसमें लॉकडाउन के दौरान कोई दिक्कत न आए, इसके लिए एक हेल्पलाइन शुरू की गई है. सरकार की इस हेल्पलाइन का नाम दिया गया है "कमल सुविधा केंद्र". जाहिर है कि ये नाम भी विपक्ष के पेट में मरोड़ ही पैदा करेगा. पूर्व मंत्री और कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख जीतू पटवारी कहते हैं कि "सरकार कोरोना संक्रमण रोकने में नाकाम इसीलिए हुई है कि उसका पूरा ध्यान अपने प्रचार पर है. ये आत्ममुग्धता से भरी हुई सरकार है, जिसका आम लोगों की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं है" जीतू पटवारी मांग करते हैं कि अन्नदाता के नाम पर इस हेल्पलाइन को शुरू करना चाहिए था. इस योजना से कमल का सरोकार उन्हें भी समझ नहीं आ रहा है.
मास्क पर भी फोटो यानी उपचुनाव की तैयारी

वैसे शिवराज शुरू से ही विपक्ष के आरोपों पर कान न देने वाले स्वभाव के हैं. अपने नेता का अंदाज देखकर विधायक भी उसी भाव में काम करते हैं. शायद यही वजह है कि भाजपा के जो नेता लोगों को मास्क अपने पैसों से बंटवा रहे हैं, उसमें भी अपना फोटो लगवा रहे हैं, ताकि जनता उनके अहसानों को विस्मृत न कर पाए. ऐसे मास्क भोपाल के गोविन्दपुरा से विधायक कृष्णा गौर ने भी बंटवाए हैं.
दरअसल, एमपी में लॉकडाउन खुलने के कुछ समय के बाद उपचुनाव होने हैं. देश में संभवतः ये मौका है जब 24 सीटों के लिए एक साथ उपचुनाव होंगे. सिंधिया के साथ इस्तीफा देकर तोहफे में भाजपा में आए 22 विधायकों के कारण ये सीट खाली हुई हैं और दो सीट पहले से निधन के कारण खाली थीं. उन 22 में से 2 मंत्री भी शिवराज के मिनी कैबिनेट में शामिल किए गए हैं. जाहिर है कि 6 के अंदर उन्हें विधानसभा की सदस्यता दिलानी होगी, वरना उनका मंत्री पद चला जाएगा. सरकार इसीलिए आपदा में भी प्रचार का कोई अवसर नहीं छोड़ना चाहती.

किसानों को साधने में जुटे हैं शिवराज

शिवराज जानते हैं कि कभी उनकी ताकत रहे किसान पिछले चुनाव में कांग्रेस के साथ चले गए थे और उनके कारण ही कमलनाथ सरकार बनी. ऐसे में वाजिब है कि सबसे पहले उन्हें ही न केवल साधा जाए बल्कि उनके दिमाग में भाजपा पैबस्त कराई जाए. हालांकि जनता बहुत चतुर है, वो भी इन कवायदों, कसरतों को बेहतर समझ लेती है और सही अवसर आने पर जवाब भी देती है. इस ब्रांडिंग के नतीजे तो तब पता चलेंगे जब एमपी में उपचुनावों के नतीजे आएंगे लेकिन तब तक तय है कि ऐसी ब्रांडिंग की तस्वीरें आए दिन यूं ही नुमाया होती रहेंगी.

डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.

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