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शिवराज सरकार ने 2018 में लागू हो चुकी योजना को ही रीलॉन्च किया: जीतू पटवारी

पटवारी ने कहा कि सोयाबीन का किसान बुरी तरह परेशान हैं.

पटवारी ने कहा कि सोयाबीन का किसान बुरी तरह परेशान हैं.

पटवारी ने कहा कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों से स्वामित्व योजना का शुभारंभ कराया, लेकिन सच्चाई यह है कि यह योजना 2018 में शिवराज सरकार पहले ही लागू कर चुकी है.

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    भोपाल. शिवराज सरकार ने 2018 में लागू हो चुकी स्वामित्व योजना को ही रीलॉन्च किया है.
    मध्यप्रदेश में किसान सम्मान निधि, बनी किसान अपमान निधि, सिर्फ शाजापुर जिले की 7 तहसीलों में 7550 किसानों को 5.60 करोड रुपए के रिकवरी के नोटिस पहले सरकार ने किसानों के खाते में पैसे डाले और अब किसानों को राशि वापस करने का नोटिस दिया जा रहा है. ये आरोप मध्य प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने गुरुवार को भोपाल में पत्रकार वार्ता के दौरान लगाए.

    पटवारी ने कहा कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों से स्वामित्व योजना का शुभारंभ कराया, लेकिन सच्चाई यह है कि यह योजना 2018 में शिवराज सरकार पहले ही लागू कर चुकी है. इस योजना का स्वरूप इस तरह का है कि किसानों या बिना भूमि वालों को इससे कोई फायदा होने वाला नहीं है. इसके बावजूद सीएम शिवराज मध्य प्रदेश को बरगलाने का काम कर रहे हैं.
    पटवारी ने दस्तावेज पेश करते हुए कहा, “प्रदेश के शाजापुर जिले में किसानों को सम्मान निधि के तहत जो राशि दी गई थी उसकी रिकवरी के नोटिस किसानों को भेज दिए गए हैं। इन दोनों जगहों पर हजारों किसानों को अब तक 5.6 करोड़ रुपए की रिकवरी के नोटिस भेजे जा चुके हैं.” उन्होंने पत्रकारों को अवंतीपुर बड़ोदिया, गुलाना, कालापीपल, मोहन बड़ोदिया, पोलायकला, शाजापुर और सुजालपुर तहसीलों के उन सभी किसानों की सूची और उन पर दिया गया बकाए का नोटिस उपलब्ध कराया.

    पटवारी ने कहा कि कि इन 7 तहसीलों में 1186 किसानों को यह कहकर अपात्र घोषित कर दिया है कि वह आयकर दाता हैं, जबकि 6364 किसानों को अन्य कारणों से अपात्र घोषित कर दिया है. इस तरह से सिर्फ इन सात तहसीलों में ही 7550 किसानों से 5.6 करोड़ रुपए बकाए के नोट इस सरकार ने भेजे हैं.

    पटवारी ने कहा कि एक तरफ कमलनाथ सरकार थी, जिसने 27 लाख किसानों का कर्ज माफ किया और किसानों को कर्ज के चंगुल से आजाद कराया. दूसरी तरफ शिवराज सरकार है जो किसानों को पहले सम्मान निधि के नाम पर पैसा देती है और जब किसान महंगाई और खराब फसल के बीच उस पैसे का उपयोग कर लेता है तो बाद में किसानों को कर्ज के जाल में फंसाने के लिए करोड़ों रुपए की वसूली के नोटिस थमा दिए जाते हैं.
    पटवारी ने कहा कि सोयाबीन का किसान बुरी तरह परेशान हैं. उन्होंने बाकायदा आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया की 3 एकड़ जमीन में सोयाबीन की खेती करने पर किसान की लागत 80000 रुपए आ रही है जबकि उस में पैदा होने वाला कुल सोयाबीन अधिक से अधिक 70000 रुपए में बिक पा रहा है.

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