MP में शुरू होगा 'किल कोरोना' अभियान, 15 दिन में 10 हजार टीमें 10 लाख घरों का करेगी सर्वे
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MP में शुरू होगा 'किल कोरोना' अभियान, 15 दिन में 10 हजार टीमें 10 लाख घरों का करेगी सर्वे
शिवराज सरकार एमपी में 1 जुलाई से शुरू करेगी किल कोरोना अभियान.

मध्य प्रदेश में 1 से 15 जुलाई तक चलने वाले 'किल कोरोना' अभियान (Kill Corona Campaign) में प्रशासनिक अफसरों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठन और स्वेच्छा के तौर पर काम करने वाले लोगों की मदद ली जाएगी.

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भोपाल. मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस (COVID-19) को खत्म करने के लिए सरकार एक नया अभियान शुरू करने जा रही है. इसे 'किल कोरोना' अभियान (Kill Corona Campaign) नाम दिया गया है. प्रदेश के सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (CM Shivraj Singh Chouhan) ने 'किल कोरोना' अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं. यह अभियान पूरे प्रदेश में 1 जुलाई से 15 जुलाई के बीच चलाया जाएगा. इस दौरान सरकार की कोशिश प्रदेश के 10 लाख घरों तक पहुंचने की होगी. 10 लाख घरों में सर्वे के लिए 10000 टीमें बनाई जाएंगी. हर टीम कम से कम 100 घरों का सर्वे करेगी.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश के मुताबिक इस अभियान में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठन और स्वेच्छा के तौर पर काम करने वाले लोगों की मदद ली जाएगी. अभियान के तहत पूरे राज्य में सर्वे होगा. घर-घर जाकर सार्थक एप पर जानकारी अपलोड की जाएगी. लक्षण के आधार पर संदिग्ध रोगी देखे जाएंगे. साथ ही सर्दी-खांसी, जुकाम के अलावा डेंगू, मलेरिया और डायरिया की भी जानकारी इकट्ठा की जाएगी.

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कोविड मित्र और वोलेंटियर करेंगे काम
इस अभियान को पूरा करने के लिए सरकार की ओर से स्थानीय स्तर पर कोविड मित्रों की नियुक्ति की जाएगी. ये कोविड मित्र स्वतंत्र रूप से सर्वे का काम करेंगे. इनसे 6 महीने तक काम लिया जाएगा, बदले में इन्हें हर महीने 1500 रुपए मेहनताना मिलेगा. इसके साथ ही सरकार इस अभियान को पूरा करने के लिए वॉलिंटियर की भी मदद लेगी, जो सर्वे का काम करेंगे और सार्थक ऐप में जानकारी अपलोड करेंगे.

एमपी में कोरोना की स्थिति

मध्य प्रदेश में देश के अन्य राज्यों की तुलना में कोरोना की रोकथाम की स्थिति बेहतर है. प्रदेश में 19 प्रतिशत एक्टिव केस बचे हैं, जबकि देश में यह आंकड़ा अभी 40 प्रतिशत है. रिकवरी रेट में एमपी देश में दूसरे स्थान पर 76.1 प्रतिशत के साथ है, जबकि राजस्थान में सबसे ज्यादा 78.2% रिकवरी रेट है. प्रदेश में 33 ऐसे जिले हैं, जहां 10 से कम एक्टिव केस हैं.
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