अतिथि विद्वानों से बोले शिवराज के मंत्री- तो क्या मैं आत्महत्या कर लूं?

प्रदेश के अतिथि विद्वनों का समूह मंत्री से मिलने पहुंचा था.
प्रदेश के अतिथि विद्वनों का समूह मंत्री से मिलने पहुंचा था.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के अतिथि विद्वानों की नियुक्ति की मांग को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव (Mohan Yadav) का बेतुका बयान सामने आया है.

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भोपाल. मध्य प्रदेश के अतिथि विद्वानों की नियुक्ति की मांग को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव (Minister Mohan Yadav) का बेतुका बयान सामने आया है. अतिथि विद्वानों ने जब आत्महत्या को लेकर आपबीती सुनाई तो शिवराज सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने कहा तो क्या मैं आत्महत्या कर लूं? मैं कैसे मुख्यमंत्री से मिलवाऊं? नौकरी से निकाले गए अतिथि विद्वान उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव के निवास पर अपनी व्यथा सुना रहे थे. अतिथि विद्वानों का कहना है कि 900 के करीब निकाले गए अतिथि विद्वान अभी भी बेरोजगार है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नौकरी पर रखने का जो वादा किया था, उस वादे को पूरा करें. इस बात को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री से अतिथि विद्वानों ने मुख्यमंत्री से मिलवाने का निवेदन किया. जिसको लेकर उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि जितना मेरे हाथ में था, वह सब मैंने अतिथि विद्वानों के लिए किया है. अब आगे की प्रक्रिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे. मेरी सहानुभूति आप सभी अतिथि विद्वानों के साथ है. जितना भला आप सभी का हो सकेगा करेंगे, लेकिन मैं आप सभी को मुख्यमंत्री से कैसे मिलवाऊं इसी बात को लेकर अतिथि विद्वानों और उच्च शिक्षा मंत्री के बीच बहसबाजी हुई.

774 को मिली है नियुक्ति, 900 अभी भी बेरोजगार
प्रदेश भर में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति के बाद से करीब 1800 से ज्यादा अतिथि विद्वान बेरोजगार हुए थे. हाल ही में उच्च शिक्षा विभाग में करीब 774 अतिथि विद्वानों को नियुक्ति दी गई है, तो अभी भी करीब 900 से ज्यादा अतिथि विद्वान नौकरी से बाहर हैं. इन्‍हें भी जल्‍द से जल्‍द नियुक्ति देने की मांग की गई है.




नियमितीकरण का वादा अधूरा
पिछली कांग्रेस सरकार में नियमितीकरण की मांग को लेकर अतिथि विद्वानों का आंदोलन शाहजहानी पार्क में हुआ था. आंदोलन को समर्थन देने के लिए विपक्ष में रही भाजपा के तमाम नेता अतिथि विद्वानों के आंदोलन में पहुंचे थे, जिसमें वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ तमाम बड़े नेता और भाजपा विधायक आंदोलन को समर्थन देने के लिए पहुंचे थे. तमाम भाजपा के नेताओं ने अतिथि विद्वानों से कहा था कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आती है तो उनको नियमित किया जाएगा. सत्ता में वापसी के बाद भी अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण का वादा अधूरा है.
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