शिवराज सरकार का सख्त निर्देश, फीस नहीं देने पर प्राइवेट स्कूल बच्चे का नाम नहीं काट सकेंगे

शिवराज सरकार ने निजी स्कूलों के लिए अहम निर्देश दिया है. (फाइल फोटो)

डिजिटल शिक्षा (Digital Education) की व्यवस्था के संबंध में मुख्यमंत्री (Shivraj Singh Chauhan) ने कहा कि प्रदेश में प्री प्राइमरी के विद्यार्थियों के लिए भी डिजिटल शिक्षा प्रारंभ होगी जो उन्हें प्रत्येक सप्ताह 3 दिन दी जाएगी तथा प्रतिदिन 30 मिनट का समय निर्धारित होगा.

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भोपाल. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कोई भी निजी स्कूल फीस (School Fees) जमा नहीं होने पर किसी भी छात्र का नाम नहीं काट सकेंगे. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने इस संबंध में स्कूल शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं. सीएम शिवराज ने साफ किया है कि भले ही किसी छात्र के अभिभावक फीस जमा ना कर पाए, लेकिन तब भी उस छात्र का नाम स्कूल से नहीं काटा जाएगा. इसके साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई शिक्षा नीति को लेकर मध्य प्रदेश में एक टीम गठित करने के निर्देश स्कूल शिक्षा मंत्री को दिए हैं. स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा है कि केंद्र द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति (New Education Policy 2020) देश में शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी. इसके क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश लीड ले इसके लिए सभी प्रावधानों पर राज्य की परिस्थितियों के अनुसार अमल किया जाए. मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान न देकर उनका कौशल विकसित करने के लिए प्रदेश में कक्षा छठवीं से ही व्यवसायिक शिक्षा दिए जाने के प्रावधान को जल्दी से जल्दी लागू किया जाएगा. स्कूली पाठ्यक्रम में संगीत, दर्शन कला, नृत्य के साथ ही योग का भी समावेश किया जाएगा.

नई शिक्षा नीति को लेकर गठित होगी टीम

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश में नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को लागू करने के लिए शिक्षा मंत्री एक टीम गठित करें जो इस संबंध में कार्रवाई के लिए रूपरेखा बनाए. उन्होंने कहा कि प्रदेश में विशेष रूप से व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाना है, जिससे बच्चा शुरू से ही अपने क्षेत्र में दक्षता हासिल कर ले तथा उसे भावी जीवन में एक अच्छे अवसर हासिल हो सके. नई शिक्षा नीति के तहत स्कूली पाठ्यक्रम में योग और नैतिक शिक्षा को विशेष महत्व दिया जाए. सीएम ने प्रदेश में बड़ी संख्या में गांवों के क्लस्टर में उच्च गुणवत्ता वाले स्कूल विकसित करने की बात कही. एमपी में जल्द ही ऐसे 10,000 स्कूल विकसित किए जाने की योजना बनाई जा रही है.

निजी स्कूलों को सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि कोरोना संकट के चलते निजी विद्यालय विद्यार्थियों से ट्यूशन फीस के अलावा अन्य शुल्क वसूल नहीं कर पाएंगे. उन्होंने निर्देश दिए कि शिक्षा विभाग यह सुनिश्चित करे कि यदि कोई अभिभावक बच्चे की फीस नहीं चुका पा रहा है तो भी बच्चे का नाम विद्यालय से किसी भी हालत में नहीं कटना चाहिए. कोरोना संकटकाल में निजी विद्यालयों की समस्याओं के निराकरण के लिए मुख्यमंत्री ने स्कूल शिक्षा मंत्री से कहा कि वे प्रदेश के स्कूल संचालकों और अभिभावकों से बातचीत कर हल निकालें.

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कोरोना में डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था

प्रदेश में कोरोना काल में डिजिटल शिक्षा की व्यवस्था के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्री प्राइमरी के विद्यार्थियों के लिए भी डिजिटल शिक्षा प्रारंभ होगी जो उन्हें प्रत्येक सप्ताह 3 दिन दी जाएगी तथा प्रतिदिन 30 मिनट का समय निर्धारित होगा. इसके अलावा पहली से आठवीं तक की कक्षाओं में सप्ताह में 5 दिन तथा हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूल में सप्ताह में 6 दिन डिजिटल शिक्षा दी जाएगी.

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