मध्य प्रदेश: शिवराज सिंह ने हासिल किया विश्‍वासमत, विधानसभा नहीं पहुंचे कांग्रेसी विधायक
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मध्य प्रदेश: शिवराज सिंह ने हासिल किया विश्‍वासमत, विधानसभा नहीं पहुंचे कांग्रेसी विधायक
शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही एक्‍शन मोड में आ गए.

इस दौरान कांग्रेस (Congress) का एक भी विधायक (MLA) सदन में मौजूद नहीं था. वहीं दिलचस्‍प बात है कि सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों ने विश्‍वासमत के समर्थन में वोट किया.

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  • Last Updated: March 24, 2020, 1:15 PM IST
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भोपाल. शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को विधानसभा में बिना किसी विरोध के आसानी से विश्‍वासमत हासिल कर लिया है. इस दौरान कांग्रेस का एक भी विधायक सदन में मौजूद नहीं था. दिलचस्‍प है कि सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों ने विश्‍वासमत के समर्थन में वोट किया. बता दें कि सपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने कांग्रेस का समर्थन करने की बात कही थी. इसके बावजूद उनकी पार्टी के विधायक ने शिवराज के समर्थन में वोट किया.

24 मार्च को बुलाए गए सत्र के पहले दिन सदन की कार्यवाही शुरु होते ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बहुमत का प्रस्ताव पेश किया. इस प्रस्ताव का सदन में मौजूद सभी 107 बीजेपी विधायकों के अलावा 2 निर्दलीय, 2 बीएसपी और एक एसपी के विधायक ने समर्थन किया. बहुमत प्रस्ताव पारित कराने के लिए सदन में आसंदी पर मौजूद सभापति जगदीश देवड़ा ने मतदान की औपचारिकता करायी. इस दौरान हुए मतदान में विश्वास मत को ध्वनिमत के जरिए सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया.

 



 

उपचुनाव होने के बाद बहुमत साबित करना
हालांकि विश्वास पारित करने के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से एक भी विधायक मौजूद नहीं रहा. कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री पी सी शर्मा ने कहा है कि सरकार को उपचुनाव होने के बाद अपना बहुमत साबित करना चाहिए. वहीं सदन में अपने संबोधन के दौरान सीएम शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि राज्यपाल ने सरकार को पंद्रह दिनों के अंदर सदन में बहुमत साबित करने के लिए कहा था, इसलिए वे विश्वास मत पेश कर रहे हैं. शिवराज ने कहा कि उनकी सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता मौजूदा हालातों में कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकना है. सभापति जगदीश देवड़ा ने विश्वास मत प्रस्ताव पारित होने के बाद सदन की कार्यवाही 27 मार्च शुक्रवार को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

कांग्रेस बाहर, बाकी अंदर
सदन में विश्वास प्रस्ताव के दौरान मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया. कांग्रेस की ओर से किसी भी विधायक ने सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया जबकि बीएसपी के सभी 2 रामबाई और संजीव सिंह के अलावा एसपी के इकलौते विधायक राजेश शुक्ला सदन में मौजूद रहे. इनके अलावा दो निर्दलीय विधायक सुरेंद्र सिंह शेरा और विक्रम राणा भी सदन में मौजूद रहे. इन सभी विधायकों ने बीजेपी को अपना समर्थन दिया. बीजेपी को कुल 112 विधायकों का समर्थन मिला.

सोमवार को ही ली थी शिवराज ने शपथ
शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री बनने के एक दिन बाद ही सदन में अपना बहुमत साबित किया. इससे पहले 23 मार्च को बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में हुई विधायक दल की बैठक में शिवराज सिंह चौहान को विधायक दल का नेता चुना गया था. विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद उन्होंने रात 9 बजे राजभवन में आयोजित एक सादे समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

भोपाल और जबलपुर में कर्फ्यू लगाने के‌ निर्देश
बता दें कि शिवराज सिंह चौहान, मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही एक्‍शन मोड में आ गए. सबसे पहले उन्होंने कोरोना से निपटने की तैयारियों और स्वास्‍थ्य विभाग के इंतजामों को लेकर आधी रात को एक बैठक ली. इसके तुरंत बाद भोपाल और जबलपुर में कर्फ्यू लगाने के‌ निर्देश दिए. जिसके बाद भोपाल के कलेक्टर तरुण पिथौड़े ने आधी रात के बाद मंगलवार को भोपाल में कर्फ्यू के आदेश जारी कर दिए. जबलपुर में भी कर्फ्यू लगाया गया है.इस दौरान सभी दुकानें, सरकारी-गैर सरकारी दफ्तर और प्रतिष्ठान बंद रहेंगे.

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First published: March 24, 2020, 11:34 AM IST
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