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एमबीबीएस स्टूडेंट के 14 साल बर्बाद, जेल में काटने पड़े इतने हजार दिन; जानें पूरा मामला

Interesting Crime Story: मप्र हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में आरोपी को बरी कर दिया. इस मामले में आरोपी एमबीबीएस छात्र के 14 साल जेल में सड़ गए.

Interesting Crime Story: मप्र हाई कोर्ट ने हत्या के एक मामले में आरोपी को बरी कर दिया. इस मामले में आरोपी एमबीबीएस छात्र के 14 साल जेल में सड़ गए.

Shocking News: पुलिसवालों की गलती से एक एमबीबीएस छात्र के महत्वपूर्ण 14 साल जेल में सड़ गए. दरअसल, साल 2008 में उस पर पुलिस ने गर्लफ्रेंड की हत्या का मामला दर्ज किया था. उसके बाद ट्रायल कोर्ट ने उसे जेल भेज दिया. तभी से लेकर वह इस फैसले के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा था. आखिर हाई कोर्ट ने हाल ही में उसके पक्ष में फैसला सुनाया. कोर्ट ने एमपी सरकार को इस शख्स को भारीभरकम जुर्माना भी देने को कहा है. हाई कोर्ट ने माना कि पुलिस ने जल्दबाजी में जांच की और गलत तरीके से शख्स को जेल भिजवा दिया.

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भोपाल/जबलपुर. हैरान करने वाले एक हत्याकांड में मप्र हाई कोर्ट ने आरोपी को निर्दोष बताकर बरी कर दिया. इस मामले में एक निर्दोष एमबीबीएस छात्र के 14 साल यानी 5 हजार से ज्यादा दिन जेल में सड़ गए. हाई कोर्ट का कहना है कि पुलिस ने इस मामले में सही जांच नहीं की और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजरअंदाज किया. हाई कोर्ट ने इस केस में पुलिस के अफसरों की लापरवाही मानी है. यह हत्याकांड साल 2008 में हुआ था. इसमें युवती की हत्या का केस दर्ज किया गया था.

इस मामले में मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सुनीता यादव की बेंच ने गांधी मेडिकल कॉलेज के छात्र चंद्रेश मर्सकोले को बड़ी राहत दी है. अपने 78 पेज के फैसले में न्यायाधीशों ने याचिकाकर्ता चंद्रेश मर्सकोले को निर्दोष माना. सालों चली लंबी सुनवाई  के बाद कोर्ट ने फैसले में कहा कि पुलिस ने हमीदिया अस्पताल के डॉक्टर और चंद्रेश के सीनियर हेमंत वर्मा की भूमिका को नजरअंदाज किया और चंद्रेश को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया. पुलिस ने जांच में कई अहम बिंदुओं पर ध्यान ही नहीं दिया, जिनसे वास्तविक दोषी को पता चल सकता था.

प्रेमिका की हत्या का केस दर्ज

बता दें, बालाघाट के रहने वाला चंद्रेश मर्सकोले गांधी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस फाइनल ईयर का छात्र था. वर्ष 2008 में पुलिस ने उस पर अपनी  प्रेमिका की हत्या का केस दर्ज किया. इसके बाद भोपाल ट्रायल कोर्ट से उसे दोषी करार दिया और जेल भेज दिया. तब से चंद्रेश जेल में ही है. ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ उसने अपने वकील सीनियर एडवोकेट एचआर नायडू के माध्यम से मप्र हाईकोर्ट जबलपुर में याचिका लगाई थी. चंद्रेश की पैरवी करने वाले एडवोकेट एचआर नायडू ने बताया कि ‘पुलिस ने कई पक्षों को नजरअंदाज करते हुए जल्दबाजी में जांच पूरी की. यदि जांच-पड़ताल की जाती तो वास्तविक आरोपी के बारे में सही जानकारी सामने आ जाती.’

वकील ने कही ये बात

एडवोकेट नायडू ने बताया कि चंद्रेश पर आरोप था कि उसने 19 अगस्त 2008 को अपनी प्रेमिका की हत्या कर लाश पचमढ़ी की देनवा घाटी में फेंक दी. आरोप था कि लाश ठिकाने लगाने के लिए वह अपने सीनियर डॉ. हेमंत वर्मा की टाटा क्वालिस और उसके ड्राइवर रामप्रसाद को होशंगाबाद का कहकर पचमढ़ी ले गया था. पूरी कहानी रामप्रसाद के हवाले से डॉ. हेमंत वर्मा ने अपने करीबी तत्कालीन भोपाल आईजी पुलिस शैलेंद्र श्रीवास्तव को बताई थी. इसके बाद चंद्रेश को गिरफ्तार कर लिया गया था.

टोल की पर्ची बनी अहम सबूत

एडवोकेट नायडू ने बताया कि डॉ. हेमंत वर्मा के ड्राइवर ने अपने बयान में कहा था कि पचमढ़ी में देनवा दर्शन के पास सुबह 4.45 बजे चंद्रेश ने कार रुकवाई थी और प्राकृतिक नजारा देखने  के लिए करीब  200 फीट तक गए थे. इस दौरान तेज आवाज आई तो देखा कि कार  की डिक्की खुली थी और उसमें रखी चंद्रेश की बैडिंग गायब थी. तब रामप्रसाद ने कार में दो लोगों को ही पचमढ़ी जाने की बात की थी, लेकिन जब इस मामले में एडवोकेट नायडू ने क्रॉस एग्जामिनेशन के लिए लोगों को बुलाया तो पचमढ़ी छावनी परिषद के टोलकर्मी धनराज  प्रसाद नागवंशी ने बताया कि उस दिन जब संबंधित कार की पर्ची काटी गई थी उसमें चार यात्री थे. इस तरह पुलिस ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि रामप्रसाद ने गलत बयान दिया है और लाश फेंकने के दौरान कार में दो अन्य लोग कौन थे?

90 लाख मिलेगा हर्जाना

केस में पुलिस ने चंद्रेश के सीनियर डॉ. हेमंत वर्मा की बातों पर आंख बंदकर विश्वास किया. डॉ. वर्मा ने कहा कि था कि मैंने अपनी कार जूनियर चंद्रेश को दे दी थी और खुद जरूरी काम से  इंदौर गया था. जबकि कोर्ट को वह इंदौर जाने और क्या जरूरी काम था, ये बताने में नाकामयाब रहे. इस तरह हाई कोर्ट ने माना कि पुलिस और ट्रायल कोर्ट ने जल्दबाजी में जांचकर चंद्रेश को  दोषी  मान लिया. इससे उसके जीवन के महत्वपूर्ण 14 साल बर्बाद हो गए. इसलिए राज्य सरकार 90 दिन में 42 लाख रुपए हर्जाना चंद्रेश को दे. तय समय में हर्जाना नहीं देने पर 9 प्रतिशत से ब्याज भी देना होगा.

Tags: Jabalpur news, Mp high court, Mp news

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