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मध्य प्रदेश में आर्थिक मंदी के संकेत, गिरते उत्पादन से लगातार घट रही बिजली की मांग

घटते उत्पादन के चलते बिजली की मांग में कमी आई है
घटते उत्पादन के चलते बिजली की मांग में कमी आई है

आर्थिक मंदी (Slow Down) का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था (Economy) पर भी दिखाई दे रहा है. राज्य सरकार के अर्थव्यवस्था में सुधार के दावों के बावजूद आर्थिक सुस्ती छाने के संकेत मिले हैं. प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों (Industrial areas) में बिजली की डिमांड में भारी गिरावट दर्ज हुई है.

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भोपाल. अर्थव्यवस्था (Economy) को लेकर भले ही देश भर में सियासी बवाल मचा हो लेकिन अब प्रदेश में भी आर्थिक मंदी (Slow down) का असर झलकने लगा है. सरकार के प्रदेश के आर्थिक हालातों में सुधार के दावों (Claims) के बीच चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. दरअसल प्रदेश के औद्योगिक इलाकों में बीते 3 महीने में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है. औद्योगिक इलाकों (Industrial Areas) में जुलाई 2019 में 11 करोड़ यूनिट रही बिजली की डिमांड (Demand) सितंबर 2019 में घटकर 9 करोड़ 80 लाख यूनिट दर्ज की गई है. मतलब साफ है कि आर्थिक सुस्ती से प्रभावित औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन (Production) घटा है और इसी कारण बिजली की मांग में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है.

मौसम में बदलाव के कारण घटी बिजली की मांग
सरकार बिजली की मांग में गिरावट का कारण मौसम में बदलाव मान रही है, लेकिन औद्योगिक इलाकों में बिजली की घटी मांग पर अब सरकार आकलन करने की बात कर रही है. ऊर्जा मंत्री प्रियव्रत सिंह का कहना है कि बिजली की डिमांड में कमी का बड़ा कारण मौसम का बदलाव है. औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की कमी के क्या नतीजे होंगे सरकार इसकी समीक्षा करेगी.

बिजली की मांग में आई कमी
>> जुलाई - 11 करोड़ 17 लाख यूनिट


>> अगस्त - 10 करोड़ 26 लाख यूनिट
>> सितंबर - 9 करोड़ 80 लाख के करीब पहुंच गई

'सरकार की नीतियों के कारण नहीं लग रहे उद्योग'
बीते साल 12 हजार 700 मेगावाट बिजली की आपूर्ति हुई तो इस साल ये मांग घटकर 10 हजार 545 यूनिट तक सिमट कर रह गई है. प्रदेश में सबसे ज्यादा बिजली की मांग रखने वाले बड़े उपभोक्ता यानी बड़े उद्योगों में बिजली की मांग घटने से साफ है कि आर्थिक सुस्ती का प्रदेश पर बड़ा असर पड़ा है. नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा है कि सरकार की नीतियों के कारण उद्योग लग नही रहे हैं और जो हैं वो भी अब अपना उद्योग समेटने में लगे हैं, इसलिए बिजली की मांग में कमी आ रही है.

चिंता का सबब
सरकार के लिए चिंता इसलिए भी है कि बीते सालों के मुकाबले इस बार त्योहारी सीजन में भी बिजली की मांग में कोई बढोतरी दर्ज नहीं हुई है. उपभोक्ता मांग में कमी और सरकारी खर्च में सुस्ती का असर प्रदेश की जीडीपी और विकास दर पर पड़ता है. अब आंकड़े बता रहे हैं कि आर्थिक मंदी से एमपी भी अब अछूता नहीं है. हालात यही रहे तो आने वाले दिनों में इसका व्यापक असर भी दिखने लगेगा.

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