MP: नक्‍सली समझ कर आदिवासी का एनकाउंटर! जांच के लिए SIT गठित, DGP से रिपोर्ट तलब

परिजनों के मुताबिक झाम सिंह 6 सितंबर को अपने एक साथी के साथ बॉर्डर के पास नदी में मछली मारने गया था. शाम को लौटते समय कुछ वर्दीधारी आवाज लगाकर रोकने लगे, तब झाम सिंह और उनका साथी डर के कारण भागने लगे तो पीछे से गोली चला दी गई.
परिजनों के मुताबिक झाम सिंह 6 सितंबर को अपने एक साथी के साथ बॉर्डर के पास नदी में मछली मारने गया था. शाम को लौटते समय कुछ वर्दीधारी आवाज लगाकर रोकने लगे, तब झाम सिंह और उनका साथी डर के कारण भागने लगे तो पीछे से गोली चला दी गई.

परिजनों के मुताबिक झाम सिंह 6 सितंबर को अपने एक साथी के साथ बॉर्डर के पास नदी में मछली मारने गया था. शाम को लौटते समय कुछ वर्दीधारी आवाज लगाकर रोकने लगे, तब झाम सिंह और उनका साथी डर के कारण भागने लगे तो पीछे से गोली चला दी गई.

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भोपाल. बालाघाट में पुलिस और नक्सली मुठभेड़ के दौरान हुई आदिवासी झाम सिंह धुर्वे की मौत के मामले में पुलिस मुख्यालय ने एसआईटी का गठन कर दिया है. सीआईडी के नेतृत्व में बनाई गई एसआईटी मामले की जांच के लिए बालाघाट पहुंच गई है. इधर मानव अधिकार आयोग ने भी मामले में संज्ञान लेते हुए डीजीपी से रिपोर्ट तलब की है.

डीजीपी विवेक जौहरी ने बालाघाट एसपी और आईजी की अनुशंसा पर थाना गढ़ी में झाम सिंह की मौत को लेकर दर्ज अपराध में आगे की विवेचना अपराध अनुसंधान विभाग यानी सीआईडी को सौंपी है. इस मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेटिंग टीम (एसआईटी) बनाई है. यह एसआईटी जांच के संबंध में पल-पल की रिपोर्ट मुख्यालय को देगा.

4 सदस्यीय SIT
एसआईटी के प्रभारी अपराध अनुसंधान विभाग सतर्कता एआईजी सुनील शिवहरे हैं. जबकि इसके इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर अपराध अनुसंधान विभाग के डीएसपी नितेश भार्गव हैं. बाकी टीम के 2 सदस्य जबलपुर जोनल कार्यालय अपराध अनुसंधान विभाग के निरीक्षक पीके मरकाम और भोपाल अपराध अनुसंधान विभाग के उप निरीक्षक कपिल गुप्ता हैं. यह विशेष दल अपनी विवेचना की प्रोग्रेस रिपोर्ट हर सप्ताह डीआईजी अपराध अनुसंधान विभाग पुलिस मुख्यालय को देगा.
तीन सप्ताह में डीजीपी से रिपोर्ट की तलब


इस मामले में मानव अधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है. आयोग ने डीजीपी विवेक जौहरी से तीन सप्ताह में मामले से जुड़ी पूरी रिपोर्ट तलब की. आयोग ने डीजीपी के साथ बालाघाट एसपी और जबलपुर जोन के आईजी से भी रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया और इस पर संज्ञान लेते हुए तमाम स्तरों पर रिपोर्ट मांगी है. रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग इसका अध्ययन करेगा और आगे की कार्रवाई करेगा.

मजिस्ट्रियल जांच भी हो रही
इस मामले में कलेक्टर दीपक आर्य ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए थे. इस आदेश के बाद अपर कलेक्टर बैहर शिव गोविंद मरकाम ने जांच शुरू कर दी है. पुलिस की कहानी के अनुसार बालाघाट के गढ़ी थाना क्षेत्र अंतर्गत सुपखार जंगल के बांसबेहरा में कुछ दिनों पहले पुलिस औऱ नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हुई. जमकर फायरिंग का दौर चला. सुबह इसी स्थान पर सर्चिंग दौरान एक व्यक्ति का शव मिला. मृतक की पहचान छत्तीसगढ़ कबीरधाम जिले के झलमला थाना क्षेत्र अंतर्गत शीतलपानी निवासी 45 वर्षीय झामसिंह के रूप में हुई. गढ़ी थाना में मुठभेड़ को लेकर अज्ञात नक्सलियों के खिलाफ मामला भी दर्ज किया था. झामसिंह की मौत किन परिस्थितियों में हुई इसको लेकर जांच की जा रही है.

पुलिस को मिला था नक्सलियों का इनपुट
नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में नक्सलियों से निपटने के लिए हॉक फोर्स की तैनाती की गई है. जिले के एसपी एसपी अभिषेक तिवारी ने बताया था कि सूचना मिली थी कि बांसबेहरा गांव में दो नक्सली अपना इलाज कराने के लिए आए हैं. इस सूचना पर हॉक फोर्स ने बांसबेहरा के आसपास घेराबंदी की. दावा है कि इस दौरान विस्तार दलम के नक्सलियों ने पुलिस पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी. पुलिस ने भी जवाब में गोलियां चलाई. काफी देर तक मुठभेड़ चली. दावा यह भी किया गया है कि इसी दौरान बारिश का फायदा उठाते हुए नक्सली भाग खड़े हुए. पुलिस का दावा है कि नक्सली की संख्या करीब 15 से 20 थी. नक्सलियों की ओर से पहले फायरिंग की गई थी. नक्सलियों पुलिस जवानों पर 40 से 50 राउंड फायरिंग की थी. इस के जवाब और आत्मसुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने भी फायरिंग की थी. अभिषेक तिवारी ने बताया था कि अगली सुबह पुलिस ने इलाके की सर्चिंग की तो मुठभेड़ वाले स्थान पर एक व्यक्ति का शव पड़ा हुआ मिला. उसके शरीर में गोली के निशान थे.

मछली पकड़ने की बात कही
मृतक झाम सिंह के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेटे को नक्सली समझ कर मार दिया. परिजन ने दोषियों पर केस दर्ज कर कार्रवाई करने का मांग की है. परिजनों ने बताया कि झामसिंह 6 सितंबर को अपने एक साथी के साथ बॉर्डर के पास नदी में मछली मारने गये थे. शाम को लौटते समय कुछ वर्दीधारी आवाज लगाकर रोकने लगे, तब झामसिंह और उसका साथी डर के कारण भागने लगे तो पीछे से गोली चला दी गई. जिससे उसकी मौत हो गई. कवर्धा पुलिस पूरे मामले में जांच जारी रहने औऱ जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की बात कह रही है. अब यह मामला एनकाउंटर का है या फिर हत्या का यह मजिस्ट्रियल जांच होने के बाद ही पता चलेगा. स्थानीय नेताओं ने भी मृतक के परिजनों को मुआवजा और एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने के साथ पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है.'
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