MP के कृषि मंत्री कमल पटेल का बयान, बोले- कुछ राजनैतिक दल किसानों के बीच अपने स्‍वार्थ के लिए फैला रहे भ्रम

कमल पटेल ने नए कृषि कानून को किसानों के हक का बताया. (फाइल फोटो)

कमल पटेल ने नए कृषि कानून को किसानों के हक का बताया. (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा कि रिलायंस के स्पष्टीकरण से साफ हो गया कि किसानों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है. कुछ राजनैतिक दल अपनी स्वार्थ पूर्ति के लिए किसानों को बरगला रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 4, 2021, 10:36 PM IST
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इंदौर. नए कृषि कानूनों (New agricultural laws) को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर आज रिलायंस इंड्स्ट्री (Reliance Industry) ने अपना स्पष्टीकरण देते हुए साफ कर दिया कि कंपनी का कॉरपोरेट या कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract farming) से कोई लेना देना नहीं है. न ही कंपनी की ऐसी कोई योजना है. कंपनी ने कॉरपोरेट फार्मिंग के लिए किसानों की जमीन नहीं खरीदी है. इसके बाद प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल (Kamal Patel) ने कहा कि रिलायंस के स्पष्टीकरण से साफ हो गया कि किसानों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है. कुछ राजनैतिक दल (political parties) अपनी स्वार्थ पूर्ति (selfishness) के लिए किसानों को बरगला रहे हैं. लेकिन किसान समझदार हैं.

किसान बहकावे में न आएं

पटेल ने कहा कि केन्द्र सरकार के कृषि कानून के बाद 2022 तक किसानों की आय दोगुनी होगी. किसान अब अपनी खुद की फैक्ट्री लगा सकते हैं. उनके खुद के कोल्ड स्टोरेज, फूड प्रोसेसिंग प्लांट होंगे. हमारी सरकार इसके लिए 1 लाख करोड़ का अनुदान देश के अन्नदाताओं को देने जा रही है. फसल खराब होने पर किसानों को बीमा भी दिया जा रहा है. इसलिए किसानों से अपील है कि आपलोग किसी के बहकावे में न आएं, बल्कि मोदीजी का साथ दीजिए. आपकी तकदीर और तस्वीर बदलेगी. इस कानून के बाद किसान आत्मनिर्भर होगा.


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किसान देश की रीढ़ होता है

इंदौर पहुंचे कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा कि किसान इस देश की रीढ़ है. इसलिए किसान मजबूत नहीं होगा तो देश मजबूत नहीं होगा. आत्मनिर्भर भारत के लिए किसानों का आत्मनिर्भर होना जरूरी है. इसलिए मोदी सरकार ने कृषि कानून में संशोधन किए. जो लोग किसानों को गुमराह कर रहे हैं, उनने यही कहना है कि उन्होंने तो 55 सालों में किसानों का भला नहीं किया. अब मोदी सरकार किसानों की सोच रही है तो अड़ंगे क्यों डाल रहे हो. अभी तक किसान के पास दो विकल्प थे या तो वह मंडी में बेचे या फिर एमएसपी पर सरकार खरीदे. आजाद भारत के 73 साल बाद भी न्यूनतम समर्थन मूल्य मांगना पड़ रहा है - ये भी दुर्भाग्य है. सरकार ने अब एमएसपी नहीं, एमआरपी पर बेचने का अधिकार किसानों को दिया है. अब किसान अपना उत्पादन कर खुद निर्यात कर सकेगा. जो बिचौलिए कमाते थे, वो किसान कमाएगा. अब किसान के बेटे बेरोजगार नहीं घूमेंगे, वे रोजगार देने वाले बनेंगे. ये नया कानून बिचौलिए हटाने का कानून है इसलिए किसान इसका समर्थन भी कर रहे हैं.
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