MP: लोकसभा चुनाव 2019 में सपा-बसपा गठबंधन किसका बिगाड़ेगा खेल

यह बात तो तय है कि जैसे यूपी में सपा बसपा ने बेहद चतुराई से गठबंधन किया, वैसे एमपी में भी इसका ऐलान कर अपनी तैयारियों को कांग्रेस से ज्यादा पुख्ता दिखाने की कोशिश की है

Anurag Shrivastava | News18 Madhya Pradesh
Updated: February 11, 2019, 5:05 PM IST
MP: लोकसभा चुनाव 2019 में सपा-बसपा गठबंधन किसका बिगाड़ेगा खेल
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Anurag Shrivastava | News18 Madhya Pradesh
Updated: February 11, 2019, 5:05 PM IST
यूपी के बाद अब मध्यप्रदेश में बसपा और सपा गठबंधन चुनाव लड़ेगा. सपा की मांग पर बसपा ने तीन सीटें अखिलेश यादव की पार्टी के लिए छोड़ने का ऐलान किया है. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष के मुताबिक पार्टी तीन सीटों को छोड़ बाकी सभी सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी.

बसपा ने अभी तक सतना और मुरैना से अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं और जल्द ही सभी सीटों पर प्रत्याशियों घोषित हो जाएंगे. बसपा ने लोकसभा चुनाव को लेकर प्रत्याशी चयन को लेकर दावेदारों से चर्चा भी की है. लोकसभा चुनाव को लेकर बीएसपी-एसपी के गठबंधन पर बीएसपी के प्रदेश अध्यक्ष डीपी चौधरी ने ये ऐलान किया है.

राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह है कि इस गठबंधन ने किसको नुकसान होगा किसको फायदा. तो यह बात तो तय है कि जैसे यूपी में सपा बसपा ने बेहद चतुराई से गठबंधन किया वैसे एमपी में भी इसका ऐलान कर अपनी तैयारियों को कांग्रेस से ज्यादा पुख्ता दिखाने की कोशिश की है.



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एमपी में कुल 29 लोकसभा में से 26 बीजेपी के पास हैं. गुना, छिंदवाड़ा और झाबुआ सीट कांग्रेस के पास है. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद कांग्रेस को लगता है कि वो लोकसभा चुनाव में भी विधानसभा जैसा प्रदर्शन कर सकती है. उधर सपा और बसपा ने विधानसभा चुनाव में बिना किसी शर्त पर कांग्रेस को समर्थन दे दिया था.

पिछले दिनों बसपा सुप्रीमों मायावती ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए कहा था कि कांग्रेस से गठबंधन नहीं होगा तो अखिलेश बे भी ऐलान किया था कि लोकसभा चुनाव ने कांग्रेस से गठबंधन नहीं होगा. इसी क्रम में उन्होंने यूपी और एमपी में बसपा से गठबंधन का ऐलान कर दिया.

अब यूपी में तो कांग्रेस प्रियंका गांधी के आने के बाद काफी उत्साहित नजर आ रही है, लेकिन मध्य प्रदेश में उसे अपने दम पर बीजेपी से टक्कर लेनी पड़ेगी वरना सपा और बसपा की रणनीति भले ही ज्यादा नुकसान ना पहुंचाए लेकिन वोट प्रतिशत पर काफी प्रभाव डाल सकती है.
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वहीं अगर मध्य प्रदेश में पिछले लोकसभा चुनावों की बात करें तो मोदी लहर के कारण कांग्रेस और दूसरे दलों का वोट बैंक खिसक कर बीजेपी के खाते में चला गया था. बीते चुनाव में 54.8 फीसदी वोट बैंक के साथ बीजेपी ने 27 सीटें जीती थी, जबकि कांग्रेस को महज दो सीट मिली थी. बीजेपी को कांग्रेस से 19 फीसदी ज्यादा वोट शेयर हासिल हुए थे.

2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 40.1 फ़ीसदी बीजेपी का 43.4 सीसी बीएसपी का वोट शेयर 5.2 फ़ीसदी था. जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर 35.4 सीटें बीजेपी का वोट शेयर 54.8 सीसी और अन्य बसपा सपा दूसरे दलों का वोट शेयर 9.8 था यानी यह बीजेपी और कांग्रेस के मुकाबले कम था.

एक बड़ा वोट शेयर बीजेपी कांग्रेस को छोड़ तीसरे दल के प्रत्याशी के खाते में जाता है. ऐसे में इस बार भी यदि बीएसपी और सपा का गठबंधन सफल रहा तो एक बड़ा वोट शेयर इनके खाते में जा सकता है

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