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'स्टार्टअप' के लिए परेशान हो रहे युवा, सरकारी अफसर भी नहीं बता पाते सही 'राह'

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में बड़ी उम्मीदों के साथ जोर-शोर से प्रदेश में स्टार्टअप योजना की शुरुआत की थी, लेकिन आलम ये है कि आज युवा स्टार्टअप के लिए दर-दर भटक रहा है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में बड़ी उम्मीदों के साथ जोर-शोर से प्रदेश में स्टार्टअप योजना की शुरुआत की थी, लेकिन आलम ये है कि आज युवा स्टार्टअप के लिए दर-दर भटक रहा है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में बड़ी उम्मीदों के साथ जोर-शोर से प्रदेश में स्टार्टअप योजना की शुरुआत की थी, लेकिन आलम ये है कि आज युवा स्टार्टअप के लिए दर-दर भटक रहा है.

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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में बड़ी उम्मीदों के साथ जोर-शोर से प्रदेश में स्टार्टअप योजना की शुरुआत की थी, लेकिन आलम ये है कि आज युवा स्टार्टअप के लिए दर-दर भटक रहा है. सरकारी पेचीदगियों से समय पर फंड नहीं मिलने से उत्साह से भरपूर युवा अपने स्टार्टअप का आईडिएशन बदलकर निजी निवेशकों से जुड़ रहे हैं.

भोपाल निवासी 23 साल के अलमास अली ने पिछले वर्ष फाइनेंस सेक्टर में स्टार्टअप के लिए मन बनाया. कारोबार शुरु करने के लिए सरकारी दफ्तरों में दस्तक दी, लेकिन सरकारी पेचीदगी और विभागीय अफसरों का सहयोग नहीं मिलने से महीनों बीत गए. मायूस होकर अप्रेल 2017 में अलमास ने स्टार्टअप का आईडिएशन बदला और नए सिरे से शार्ट-टर्म ऑन लाईन माइक्रो लोन का कारोबार शुरु किया. इस बार अलमास ने फंडिंग के लिए सरकार और बैंक की बजाए निजी निवेशकों को अप्रोच किया और वे सफल रहे. अलमास का कहना है कि सरकारी औपचारिकताएं पूरी करने की लंबी प्रक्रिया स्टार्ट अप के लिए बड़ी परेशानी है.

अलमास की तरह रजत यादव को भी स्टार्टअप शुरु करने के लिए परेशानी उठानी पड़ी. 24 साल के रजत यादव ने चेन्नई से पढ़ाई की है. पढ़ाई पूरी करने के बाद हैदराबाद में स्टार्टअप शुरु किया. कुछ समय बाद रजत हैदराबाद से भोपाल शिफ्ट हो गए. रजत भी स्टार्टअप के रुप में जरुरतमंदों को कम से कम समय में कम एमाउंट के फंड मुहैया कराते हैं. रजत यादव बताते हैं कि स्टार्टअप के लिए तेलंगाना सरकार बेहद संजीदा है. हैदराबाद में सरकारी स्तर पर त्वरित कार्रवाई होती है. भोपाल में विभागीय अधिकारियों को ही स्टार्टअप के बारे में मालूम नहीं है. जिससे वे सही राह भी नहीं बता पाते.

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