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ग्वालियर-चंबल की राजनीति के दो केंद्र : ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस्पात मंत्रालय मिलने के क्या हैं मायने

MP Samachar : ज्योतिरादित्य सिंधिया को जिस इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है वो कभी ग्वालियर चंबल के ही दिग्गज नेता नरेंद्र सिंह तोमर संभाल चुके हैं.

MP Samachar : ज्योतिरादित्य सिंधिया को जिस इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है वो कभी ग्वालियर चंबल के ही दिग्गज नेता नरेंद्र सिंह तोमर संभाल चुके हैं.

MP Hot Political News. ग्वालियर चंबल की सियासत को समझने वाले लोग सिंधिया को नयी जिम्मेदारी मिलने के कुछ और मायने भी निकाल रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया को जिस इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है वो कभी ग्वालियर चंबल के ही दिग्गज नेता नरेंद्र सिंह तोमर संभाल चुके हैं. सिंधिया और तोमर कांग्रेस और बीजेपी में रहते हुए एक दूसरे के घुर विरोधी थे. बीजेपी में शामिल होने के बाद भी ये दोनों नेता ग्वालियर-चंबल की राजनीति में दो अलग-अलग सिरे माने जाते हैं. सिंधिया का कद मोदी कैबिनेट में भले अब बढ़ रहा हो लेकिन नरेंद्र सिंह तोमर पहले से पीएम मोदी के बेहद करीबी नेताओं में माने जाते हैं. फिलहाल वो कृषि जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया भी उसी ग्वालियर चंबल से आते हैं जहां के नरेंद्र सिंह तोमर हैं. सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद से ही ग्वालियर चंबल में बीजेपी में एक नए पावर सेंटर की कहानी गढ़ी जाती रही है.

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भोपाल. ​केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को इस्पात मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के साथ ही सियासी गलियारों में अटकलों का दौर फिर तेज़ हो गया है. सिंधिया को इस्पात मंत्रालय मिलने के मायने दिल्ली से लेकर ग्वालियर तक निकाले जा रहे हैं. नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी पहले से संभाल रहे सिंधिया को इस्पात मंत्रालय का जिम्मा मिलने के बाद कहा जा रहा है कि मोदी कैबिनेट में उनका कद लगातार बढ़ रहा है.

ग्वालियर चंबल की सियासत को समझने वाले लोग सिंधिया को नयी जिम्मेदारी मिलने के कुछ और मायने भी निकाल रहे हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया को जिस इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है वो कभी ग्वालियर चंबल के ही दिग्गज नेता नरेंद्र सिंह तोमर संभाल चुके हैं. सिंधिया और तोमर कांग्रेस और बीजेपी में रहते हुए एक दूसरे के घुर विरोधी थे. बीजेपी में शामिल होने के बाद भी ये दोनों नेता ग्वालियर-चंबल की राजनीति में दो अलग-अलग सिरे माने जाते हैं. सिंधिया का कद मोदी कैबिनेट में भले अब बढ़ रहा हो लेकिन नरेंद्र सिंह तोमर पहले से पीएम मोदी के बेहद करीबी नेताओं में माने जाते हैं. फिलहाल वो कृषि जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. ज्योतिरादित्य सिंधिया भी उसी ग्वालियर चंबल से आते हैं जहां के नरेंद्र सिंह तोमर हैं. सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद से ही ग्वालियर चंबल में बीजेपी में एक नए पावर सेंटर की कहानी गढ़ी जाती रही है.

नरेंद्र सिंह तोमर का सियासी सफर

मौजूदा वक्त में नरेंद्र सिंह तोमर मुरैना-श्योपुर संसदीय सीट से सांसद हैं और मोदी कैबिनेट में कृषि जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. 16वीं लोकसभा में दूसरी बार निर्वाचित होने के बाद उन्हें खान, इस्पात और रोजगार मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी. 27 मई 2014 से 9 नवंबर 2014 तक उनके पास ये सभी मंत्रालय रहे. 9 नवम्‍बर 2014 के बाद उनके पास खान और इस्‍पात मंत्रालय की जिम्मेदारी रही थी. मोदी कैबिनेट में नरेंद्र सिंह तोमर की गिनती ताकतवर नेताओं में की जाती है.

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सिंधिया का सियासी सफर

ज्योतिरादित्य सिंधिया मौजूदा वक्त में मध्य प्रदेश से बीजेपी के राज्यसभा सांसद हैं. बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्हें राज्यसभा भेजा गया था. सिंधिया जून 2020 में बीजेपी से राज्यसभा के लिए चुने गए थे. उसके एक साल बाद 7 जुलाई 2021 को उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी और अब 7 जुलाई 2022 को उन्होंने इस्पात मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार ग्रहण किया.

Tags: Jyotiraditya Scindia, Madhya pradesh latest news, Narendra Singh Tomar

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