Corona Positive : यहां मिलिए नन्हें वॉरियर्स से जिन्होंने कोरोना को दे दी मात

कोरोना के नन्हे वॉरियर्स की कहानी
कोरोना के नन्हे वॉरियर्स की कहानी

कोरोना (corona) ने मासूमियत को अपने जद में लेने की कोशिश जरूर की लेकिन इन बहादुर बच्चों ने अपनी नन्हीं अठखेलियों से ही कोरोना (corona) को हारने पर मजबूर कर दिया.

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भोपाल. पिछले दो महीने से एक शब्द कोरोना (corona) ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है. ये नाम दहशत का पर्याय बन गया है. इस एक वायरस (virus) के कारण देश-दुनिया थम गयी है. लेकिन ऐसा भी नहीं कि सब कोरोना से हार जाएं. हिम्मत और मजबूत इम्यून सिस्टम के ज़रिए कोरोना को हराया जा सकता है. यहां कुछ ऐसे ही लोगों की कहानी जो कोरोना की जंग जीतकर खुशी-खुशी अपने घर लौटे. इनमें 9 दिन की बच्ची भी शामिल है.

छोटा बच्चा जानकर ना कोई आंख दिखाना रे.कोरोना को भी 9 दिन की नन्हीं बच्ची ने ऐसा ही कहा. अगर आप भी कोरोना के कहर से डर रहे हैं तो ज़रा इस नन्ही गुड़िया की कहानी सुन लीजिए.जो हिम्मत की मिसाल बन गई है.भोपाल में 7 अप्रेल को पैदा हुई इस वीर बालिका की कहानी, जिसका जन्म महामारी के वक्त हुआ.दुनिया में इसने आंख खोली तब ये महज 9 दिन की ही हुई थी. जांच में पता चला कि 9 दिन की बच्ची कोरोना पॉजिटिव है. लेकिन कहां ये मासूम गुड़िया हार मानने वाली थी.उसने कोरोना को ही हरा डाला.इसने कोरोना को हराकर बता दिया ..कोरोना से डरना नहीं लड़ना होगा.

भोपाल के सुल्तानिया अस्पताल में बरखेड़ी की रहने वाली महिला, 6-7 अप्रेल की दरम्यानी रात डिलीवरी के लिए भर्ती हुईं.डिलीवरी हुई और इस नन्हीं सी गुड़िया ने दुनिया में कदम रखा.रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर मां के चेहरे का रंग ही उड़ गया.महज़ 9 दिन की मासूम बच्ची को ऐसी सज़ा ज़रा सोचिए क्या हाल होगा उस परिवार का.



आखिर कौन था कोरोना करियर ?
अब सवाल था कि आखिर 9 दिन की इस बच्ची को कोरोना कहां से मिला.बच्ची की मां का ऑपरेशन करने वाली डॉक्टरों की टीम में एक जूनियर डॉक्टर की रिपोर्ट पाजिटिव आई थी.अब बच्ची को संक्रमण डॉक्टर से मिला.. या कहीं और से ?.. इस बात की पुष्टि नहीं हुई ..लेकिन एक नन्हीं जान.. अपनी मां की गोद में.. कोरोना की जंग लड़ रही थी. इस नन्हीं फाइटर ने बता दिया ..छोटी हूं पर..कमजोर नहीं.24 दिन बाद ही.. इस नन्हीं फाइटर ने कोरोना को हरा डाला.अस्पताल वाले इस नन्हीं योद्धा को प्रकृति कहकर पुकारते हैं.

2 साल के कोरोना वॉरियर पर आप गर्व करेंगे
अब 2 साल के बच्चे की कहानी जिस पर आपको यकीनन गर्व होगा.इसने महज 10 दिन में कोरोना को मात दे दी.मासूम फाइटर ऐसे कोरोना से खेलता रहा जैसे उसे कुछ हुआ ही नहीं.2 साल के इस नन्हें फाइटर के तो डॉक्टर भी कायल हो गए.आप जानकर हैरान रह जाएंगे. जिस दिन इसे कोरोना होने की खबर मिली तब घर में इसके जन्म दिन मनाने की तैयारी चल रही थी. जन्मदिन की सारी खुशियां काफूर हो गईं. लेकिन डॉक्टरों की मेहनत और सबकी दुआ ने इसे सेहतमंद कर दिया.

उज्जैन की डेढ़ साल की मासूम कोरोना फाइटर को सलाम
उज्जैन के पीटीएस से स्वस्थ होकर निकली, डेढ़ साल की नन्हीं परी ने भी यही पैगाम दिया. इस मुसीबत से डरना नहीं लड़ना होगा. बच्ची की मां की रिपोर्ट 26 अप्रेल को पॉजिटिव आई. मुसीबत का पहाड़ तो तब टूटा मां की वजह से डेढ़ साल की बेटी को भी कोरोना हो गया.लेकिन इस बच्ची ने अपनी मां के साथ मिलकर जंग लड़ी.

जिंदगी में लौटी खुशी
धार की रहने वाली गर्भवती महिला कोरोना पॉजिटिव थी.उसे डर सता रहा था कि उसके होने वाले बच्चे का क्या होगा.लेकिन कोरोना के इस काले साये के बीच बेटे का जन्म हुआ और इस मां ने कोरोना की जंग भी जीत ली. 24 दिन बाद इसकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आयी.दोहरी खुशियों ने इसकी जिन्दगी में चार चांद लगा दिए.

जबलपुर के बच्चे ने जीता सबका दिल
कोरोना की राह तो 9 साल के इस बच्चे के लिए भी आसान नहीं थी.लेकिन बच्चे ने बता दिया हार नहीं मानूंगा.एंबुलेंस से ऐसे ही घर परिवार से दूर अकेले सवार हुआ था बच्चा.आखिरकार 14 दिन बाद जीतकर घर लौट ही आया.तो भला कैसे उसके स्वागत में गलियों में तालियां और थालियां नहीं बजतीं.बच्चे को अपने नाना से संक्रमण लगा था. जिस बेटे को परिवार वाले अकेला नहीं छोड़ते थे उसे 14 दिन अकेले रहना पड़ा.

कोरोना ने मासूमियत को अपने जद में लेने की कोशिश जरूर की लेकिन इन बहादुर बच्चों ने अपनी नन्हीं अठखेलियों से ही कोरोना को हारने पर मजबूर कर दिया.ये पॉजिटिव इतना भी निगेटिव नहीं है.गौर से देखिए जिन्दगी...फिर से मुस्कुरा रही है.

भोपाल से जितेन्द्र शर्मा और इंदौर से विकास सिंह चौहान, जबलपुर से पवन पटेल ..उज्जैन से आनंद निगम की रिपोर्ट

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