दुष्यन्त संग्रहालय में हुआ कहानी पाठ, संस्कृतियों में टकराव की कहानी

वरिष्ठ कथाकार शशांक ने कहा कि मंडलोई और यादवेंद्र पांडे को सुनना एक दुर्लभ अनुभव था. विदेशी पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी ने जहां मन को छू लिया


Updated: May 26, 2019, 11:01 PM IST
दुष्यन्त संग्रहालय में हुआ कहानी पाठ, संस्कृतियों में टकराव की कहानी
वरिष्ठ कथाकार शशांक ने कहा कि मंडलोई और यादवेंद्र पांडे को सुनना एक दुर्लभ अनुभव था. विदेशी पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी ने जहां मन को छू लिया

Updated: May 26, 2019, 11:01 PM IST
दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय में रविवार को वरिष्ठ कथाकार अनुवादक राघवेंद्र पांडे और प्रसिद्ध कवि कार लीलाधर मंडलोई ने अपनी कविताएं सुनाई. यादवेंद्र पांडे ने पाश्चात्य पृष्ठभूमि की एक कहानी प्रस्तुत की, जिसमें माया सभ्यता का उल्लेख है और किस तरह दो संस्कृतियों में टकराव होता है, इसका उल्लेख इस कहानी में मिलता है.

लीलाधर मंडलोई ने अपनी कुछ कविताएं प्रस्तुत की जो बहुत ही आत्मीय अभिव्यक्ति की कविताएं थी. अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ कथाकार शशांक ने कहा कि मंडलोई और यादवेंद्र पांडे को सुनना एक दुर्लभ अनुभव था. विदेशी पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी ने जहां मन को छू लिया, वहीं कविताओं में आत्मीय अनुभूति व्यक्त हुई है.



राम प्रकाश त्रिपाठी ने भी कहानी और कविताओं पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत की. आरंभ में संग्रहालय के निदेशक राजुरकर राज ने कार्यक्रम की पृष्ठभूमि रखते हुए संचालन किया और अंत में संरक्षक राम राव वामनकर ने आभार व्यक्त किया.
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