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मोदी सर की पाठशाला पर पढ़िए, छात्रों की मन की बात

मोदी सर की पाठशाला पर पढ़िए, छात्रों की मन की बात

पढ़िए, पीएम नरेंद्र मोदी की बोर्ड परीक्षा विशेष 'मन की बात' पर क्या रहा छात्रों का रिएक्शन.

पढ़िए, पीएम नरेंद्र मोदी की बोर्ड परीक्षा विशेष 'मन की बात' पर क्या रहा छात्रों का रिएक्शन.

पढ़िए, पीएम नरेंद्र मोदी की बोर्ड परीक्षा विशेष 'मन की बात' पर क्या रहा छात्रों का रिएक्शन.

  • Pradesh18
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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में विशेष तौर पर बोर्ड परीक्षाओं में भाग ले रहे छात्र-छात्राओं को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने सचिन तेंदुलकर, शतरंज के ग्रेंड मास्टर विश्वनाथन आनंद और आध्यात्मिक गुरू मोरारी बापू जैसे कई दिग्गजों के संदेशों को सुनाया.

    इन संदेशों में सभी ने छात्रों को चिंता के बोझ तले न दबते हुए एग्जाम की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया. मन की बात में कही गई बातों के बारे में जब छात्रों से बात की गई तो उनके कुछ इस तरह के विचार सामने आए-

    ग्वालियर से 12वीं के छात्र शुभम ने कहा कि ये बात सच है कि बोर्ड परीक्षा को लेकर उन पर काफी दबाव रहता है. शुभम ने कहा कि चाहे सीबीएसई ने असाइनमेंट और प्रेक्टिकल एग्जाम के जरिए बच्चों के लिए एग्जाम में ज्यादा स्कोर करना आसान कर दिया हो, फिर भी बोर्ड के नाम से ही बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच अजीब सा डर है.

    इसी डर के कारण बोर्ड कक्षाओं के बच्चों को कक्षा में प्रवेश करने से लेकर परीक्षा के समय तक दबाव से गुजरना पड़ता है. पीएम की दूसरों की जगह खुद से कॉम्पिटिशन करने की बात शुभम को सबसे अधिक पसंद आई. शुभम की मानें तो यदि सब इस बात पर चलना शुरू कर दें तो स्टूडेंट्स की परफॉर्मेंस में अवश्य ही सकारात्मक बदलाव आएगा और वो डिप्रेशन में जाने से भी बचेंगे.

    दूसरी ओर भोपाल में 10वीं के छात्र सक्षम का भी यही मानना है. सक्षम ने कहा कि सचिन ने रियल अचीवेबल टार्गेट की बात कही जो खुद को डिप्रेशन से बचाने के लिए बहुत जरूरी है. बोर्ड परीक्षाओं में वैसे ही छात्रों पर काफी दबाव रहता है, ऐसे में यदि वो ऐसा टार्गेट बना लें, जिसे अचीव करना उनके लिए संभव नहीं है, तो वो खुद ही अपने ऊपर इतना दबाव बना लेते हैं कि डिप्रेशन में चले जाते हैं.

    भोपाल से ही 12वीं की छात्रा जिया ने बताया कि 12वीं बोर्ड में छात्रों पर और भी ज्यादा दबाव रहता है क्योंकि उन्हें इस क्लास के बाद सीधे कॉलेज जाना है. जहां उन्हें ऐसे सब्जेक्ट चुनने हैं जो उनका भविष्य तय करेंगे. ऐसे में अभिभावकों का दबाव भी बढ़ जाता है.

    जिया ने कहा कि जैसा कि मोदी जी ने मन की बात में कहा कि 'आशाओं के बोझ के नीचे मत दबिए, अपना लक्ष्य खुद निर्धारित कीजिए' इस बात को छात्रों को गांठ बांध लेना चाहिए. जिया ने कहा कि अभिभावकों को भी अपने बच्चों पर आशाओं के बोझ को कम करना चाहिए. उन्हें ऐसा वातावरण देना चाहिए जिसमें छात्र ऐसे विषय का चुनाव कर सके जिसमें वो सबसे बेहतर है, इससे उसे अपना भविष्य उज्जवल बनाने में भी कामयाबी मिलेगी.

    Tags: Mann Ki Baat

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