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COVID-19 को मात देकर आया पर्वतारोही बुलंद हौसले के साथ फिर तैयार है शिखर छूने के लिए
Bhopal News in Hindi

Jitender Sharma | News18 Madhya Pradesh
Updated: May 21, 2020, 9:45 PM IST
COVID-19 को मात देकर आया पर्वतारोही बुलंद हौसले के साथ फिर तैयार है शिखर छूने के लिए
कोरोना को मात देकर आए कोरोना वॉरियर की कहानी

सतीश नामदेव परेशान थे लेकिन हताश नहीं थे. अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अपनी सोच पॉजिटिव रखी. अपने मोबाइल फोन में वो पर्वतारोहण के पुराने वीडियो देखते रहे. मन में ठान लिया कि जब बर्फीली तेज हवाओं के सामने वो नहीं डिगे, बर्फ की चादर पर वो बेखौफ आगे बढ़ते तो भला यह कोरोना (COVID-19) क्या बिगाड़ लेगा

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भोपाल. मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) का एक युवा पर्वतारोही (Mountaineer) फिर ऊंचे पर्वतों पर चढ़ने के लिए तैयार है. दरअसल कोरोना ने उसके मजबूत इरादों और हौसले की उड़ान रोकने की कोशिश की. संक्रमित होने की वजह से वो अस्पताल में रहा और कोरोनावायरस (COVID-19) को मात देकर घर लौटा. मन में यही भरोसा रहा कि जब बर्फीले तूफान (Icy Storm) उसकी राह नहीं रोक पाए तो कोरोना भला उसका क्या बिगाड़ लेगा.

सतीश नामदेव (Satish Namdev) एक कुशल पर्वतारोही हैं. मगर पिछले कुछ समय से कोरोना संक्रमण का शिकार होकर अस्पताल में भर्ती थे. सरकारी अस्पताल में काम के दौरान वो संक्रमण के शिकार हो गए थे. जैसे ही सतीश को इसका पता चला वो परेशान हो उठे क्योंकि वो अपने घर के अकेले कमाने वाले सदस्य हैं. मन में बस यही एक चिंता थी कि अगर मुझे कुछ हो गया तो घरवालों का क्या होगा. उन्हें कौन देखेगा. मन में ये तमाम अनसुलझे सवाल लेकर वो अस्पताल जाने के लिए मेडिकल टीम का इंतजार करते रहे.





ये बात बीते 29 अप्रैल की है. मेडिकल टीम आयी और उन्हें भोपाल के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया गया. सतीश परेशान थे लेकिन हताश नहीं थे. अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने अपनी सोच पॉजिटिव रखी. अपने मोबाइल फोन में वो पर्वतारोहण के पुराने वीडियो देखते रहे. मन में ठान लिया कि जब बर्फीली तेज हवाओं के सामने वो नहीं डिगे, बर्फ की चादर पर वो बेखौफ आगे बढ़ते तो भला यह कोरोना क्या बिगाड़ लेगा. सतीश का कहना है इलाज के साथ-साथ सकारात्मक सोच का भी उनकी सेहत पर असर पड़ा. अब वो स्वस्थ होकर वापस घर लौट आए हैं.



कोविड सेंटर में चाय
सतीश इलाज के दौरान कोविड सेंटर में अपने साथी मरीजों के लिए चाय बनाते थे. उन्होंने बाकी मरीजों को भी कोरोना से लड़ने की हिम्मत दी. अब सतीश का सपना है कि वो देश की ऊंची से ऊंची पर्वत चोटियों पर चढ़ाई कर संदेश देगा कि डर के आगे जीत है.



सतीश नामदेव ने पहली ट्रेकिंग वर्ष 2018 में की थी. तब केदारनाथ के ऊंचे पर्वतों को पार किया था जिसकी ऊंचाई 12,500 फीट थी. वहां तापमान -20 डिग्री रहता है. दूसरी ट्रेकिंग उन्होंने वर्ष 2019 में हिमाचल प्रदेश में की थी वहां 14,600 फीट की ऊंचाई पर -15 डिग्री तापमान में बर्फीली पहाड़ियों को फतह किया था.

डर के आगे जीत है
युवा पर्वतारोही सतीश नामदेव के हौसलों की उड़ान जारी है. वो भविष्य में भी कई रिकॉर्ड अपने नाम करना चाहते हैं. सतीश ने जीत का एक ही मंत्र दिया है- सदा अपनी मंजिल पर ध्यान रखो. रास्ते में बहुत आंधी-तूफान आएंगे लेकिन रुकना मत, डरना मत. बस बढ़ते जाना, मंजिल जरूर मिलेगी.

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First published: May 21, 2020, 8:15 PM IST
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