कोरोना काल में कमलनाथ की मंदिर परिक्रमा, महाकाल के बाद अब देवी के दरबार में करेंगे प्रार्थना

2018 के विधानसभा चुनाव में कमलनाथ सॉफ्ट हिंदुत्व का संदेश दे चुके हैं.

2018 के विधानसभा चुनाव में कमलनाथ सॉफ्ट हिंदुत्व का संदेश दे चुके हैं.

MP Politics: कोरोना महामारी से निपटने में शिवराज सरकार पर नाकामी के आरोप लगाने और पूरा सिस्टम भगवान भरोसे होने का दावा करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री और PCC चीफ कमलनाथ इन दिनों खुद मंदिरों में जाकर दर्शन कर रहे हैं.

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भोपाल. मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख और पूर्व सीएम कमलनाथ (Kamalnath) इन दिनों भगवान की शरण में हैं. 22 मई को उज्जैन में महाकाल मंदिर में पूजा के बाद अब 28 मई को मैहर जा रहे हैं. वो वहां शारदा देवी मंदिर में दर्शन करेंगे. खबर इस बात को लेकर भी है कि कमलनाथ का प्रदेश के धार्मिक स्थलों पर जाने का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा. 30 मई को वो फिर किसी धार्मिक स्थल पर जाने वाले हैं. पार्टी कह रही है कमलनाथ  देश प्रदेश को कोरोना वायरस से मुक्ति के लिए भगवान के दर बार में अर्जी लगा रहे हैं.

कोरोना से निपटने में सरकार की नाकामी के खिलाफ कमलनाथ हमलावर हैं. मौत के आंकड़ों और कोरोना के भारतीय वेरियंट के मसले पर बीजेपी उनके खिलाफ पुलिस के पास पहुंच चुकी है. कांग्रेस ने कोरोना काल में पूरा सिस्टम भगवान भरोसे होने का आरोप लगाया है. ऐसे समय में कमलनाथ का धार्मिक दौरा शुरू हुआ है. पार्टी कह रही है पीसीसी अध्यक्ष कमलनाथ भगवान से गुहार लगाकर कोरोना के मुक्ति दिलाने और सब के स्वस्थ रहने की कामना कर रहे हैं.

 बीजेपी ने कसा तंज

कमलनाथ के मंदिर मंदिर के दर्शन करने पर बीजेपी ने तंज कसा है. बीजेपी के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कमलनाथ को अपराध बोध हो गया है इसलिए वह मंदिर मंदिर पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं. कमलनाथ को जनता के प्रति समाज सेवा का भाव प्रदर्शित करना था लेकिन वह इसमें फेल साबित हुए हैं.


सॉफ्ट हिंदुत्व

2018 के विधानसभा चुनाव में कमलनाथ के सॉफ्ट हिंदुत्व की सबसे ज्यादा चर्चा हुई थी और तब बीजेपी ने आरोप लगाया था कि चुनाव आते ही कांग्रेस नेताओं को मंदिर और भगवान याद आने लगते हैं. लेकिन इस बार आलम यह है कि कोरोना से निपटने में सरकार पर फेल होने का आरोप लगाने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा में कमलनाथ हैं. वो अब मंदिर मंदिर घूम कर  अपनी सॉफ्ट हिंदुत्व की छवि को बरकरार रखने के प्रयास में हैं. ताकि आगामी चुनाव में बीजेपी को सवाल उठाने का कोई मौका ना मिले.

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