टेरर फंडिंग: 8% कमीशन के लिए गद्दारों ने पाकिस्तान को बेच दी खुफिया जानकारी!

Manoj Rathore | News18 Madhya Pradesh
Updated: August 23, 2019, 12:29 PM IST
टेरर फंडिंग: 8% कमीशन के लिए गद्दारों ने पाकिस्तान को बेच दी खुफिया जानकारी!
मध्य प्रदेश में टेरर फंडिंग(terror funding)

पाक खुफिया एजेंसियां एमपी के साथ देश के दूसरे राज्यों के महत्वपूर्ण ठिकानों और सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी जुटाने के लिए फायनेंसर स्लीपर सेल नेटवर्क की मदद लेती हैं. इसी सेल के ज़रिए वो भारत में फैले अपने जासूसों तक पैसा पहुंचा रही हैं.

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पाकिस्तान (Pakistan) में बैठे आतंक के आकाओं ने मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) को टेरर फंडिंग (Terror Funding) का अड्डा बना लिया है. यहां पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) ने फायनेंसर स्लीपर सेल (Sleeper Cell) का बड़ा नेटवर्क तैयार किया. फिर उसके जरिए वो भारत (India) में फैले अपने जासूसों से गोपनीय जानकारियां जुटा रहा है. पाकिस्तानी हैंडलर्स (Pakistani Handlers) मध्य प्रदेश में बैठे इन फायनेंसर स्लीपर सेल के अकाउंट में मोटी रकम ट्रांसफर कर रहे हैं. और फिर वो रकम पाकिस्तान लिए जासूसी करने वाले आईएसआई एजेंटों तक पहुंचायी जा रही है. टेरर फंडिंग में शामिल मध्य प्रदेश के इन लोगों को देश से गद्दारी के बदले 8 प्रतिशत कमीशन दिया जा रहा है.

खुफिया तंत्र की नाकामी
सतना में पकड़े गए इस रैकेट का सरगना बलराम सिंह सहित पांच लोगों से पूछताछ के बाद ऐसे ही कई खुलासे हो रहे हैं. वर्ष 2017 में जांच एजेंसियों के इनपुट पर एटीएस ने पाकिस्तानी जासूसों को फंडिंग करने वाले सतना के बलराम सिंह को गिरफ्तार किया था. उसकी गिरफ्तारी के बाद जबलपुर, भोपाल और ग्वालियर से भी 13 से ज्यादा लोग पकड़े गए थे. आरोपी बलराम सिंह आठ महीने पहले ही भोपाल सेंट्रल जेल से ज़मानत पर बाहर आया था. इंटेलिजेंस को उस पर नज़र रखनी थी, लेकिन खुफिया तंत्र की नाकामी है कि बलराम फिर टेरर फंडिंग के नेटवर्क से जुड़ गया. पाकिस्तानी हैंडलर्स ने दोबारा उसके ज़रिए अपने नेटवर्क को मज़बूत किया और देश में फैले अपने जासूसों को फंडिंग करना शुरू कर दिया.

ऐसे काम कर रहा है फायनेंस स्लीपर सेल?

पाकिस्तानी हैंडलर्स भारत की गोपनीय जानकारी जुटाने के लिए एमपी के लोगों से संपर्क कर मोटे कमीशन का लालच देते हैं. आरोपी बलराम जैसे कई लोग पाकिस्तानी हैंडलर्स के झांसे में आकर महज आठ प्रतिशत कमीशन के लिए देश से गद्दारी कर रहे हैं. पाक खुफिया एजेंसियां एमपी के साथ देश के दूसरे राज्यों के महत्वपूर्ण ठिकानों और सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी जुटाने के लिए फायनेंसर स्लीपर सेल नेटवर्क की मदद लेती हैं. इसी सेल के ज़रिए वो भारत में फैले अपने जासूसों तक पैसा पहुंचा रही हैं.

पाकिस्तान से आने वाली मोटी रकम को बलराम सिंह और उससे जुड़े फायनेंसर जुगाड़े गए बैंक खातों में पहुंचाते हैं. पाकिस्तानी आकाओं के निर्देश पर ये जासूस युद्ध की स्थिति में सामरिक दृष्टि से क्षति पहुंचाने और इसमें मदद करने वाली जानकारी उन्हें भेज रहे हैं.

100 पाकिस्तानी हैंडलर्स के फोन नंबर मिले
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पुलिस मुख्यालय के प्रवक्ता आशुतोष प्रताप सिंह ने बताया कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर आरोपी बलराम सिंह और उसके साथी काम करते थे. सतना पुलिस ने बलराम और उसके दो साथियों सुनील सिंह और शुभम मिश्रा को गिरफ्तार किया है. एटीएस के अधिकारी लगातार तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रहे हैं और केंद्र को जानकारी भेज रहे हैं. ये आरोपी, इंटरनेट कॉलिंग के ज़रिए पाकिस्तानी हैंडलर्स से बातचीत करते थे. उनके पास से 100 पाकिस्तानी हैंडलर्स के नंबर मिले हैं. सिंह ने बताया कि आरोपियों ने बिहार और पश्चिम बंगाल के कई बैंक खाते में लाखों रुपए ट्रांसफर किए. उसकी भी जांच की जा रही है.

14 और 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की बधाई​
ये भी खुलासा हुआ है कि आयकर विभाग की राडार से बचने के लिए पाकिस्तानी हैंडलर्स और फायनेंसर स्लीपर सेल के लोग 50 हजार रुपए से कम की राशि ट्रांसफर करते थे. साथ ही जांच में यह बात भी पता चली है कि हैंडलर्स और स्लीपर सेल के लोगों ने 14 और 15 अगस्त की एक-दूसरे को बधाई भी दी थी. टेरर फंडिंग के साथ आरोपी फायनेंस फ्रॉड भी करते थे. आरोपी बलराम सिंह और सुनील इस नेटवर्क की अहम कड़ी माने जा रहे हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है. आगे भी कई बड़े खुलासे होने की संभावना है.

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First published: August 23, 2019, 11:38 AM IST
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