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High Court ने बिल्डर को वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण कानून का दोषी माना, पूर्व मुख्य सचिव से भी की थी धोखाधड़ी

Prateek Mohan Awasthi | News18 Madhya Pradesh
Updated: September 15, 2019, 11:39 AM IST
High Court ने बिल्डर को वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण कानून का दोषी माना, पूर्व मुख्य सचिव से भी की थी धोखाधड़ी
60 वरिष्ठ नागरिकों ने बिल्जर से जीती 9 साल लंबी कानूनी लड़ाई

अपनी तरह के पहले मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने भोपाल की आकृति इकोसिटी (Akriti Ecocity) के बिल्डर को वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण कानून का दोषी पाया है. बिल्डर ने पूर्व मुख्य सचिव आर परशुराम (Former Chief Secratary R Parshuram) समेत 60 सीनियर सिटीजन्स के साथ धोखाधड़ी की थी.

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जबलपुर हाईकोर्ट (Jabalpur High Court) ने अपनी तरह का पहला आदेश सुनाते हुए एक बिल्डर को भी वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम (Senior Citizen welfare act) के तहत दोषी पाया है. दरअसल भोपाल (Bhopal) में सीनियर सिटिजन्स के लिए आकृति ईको सिटी, द नेक्सट (Akriti Ecocity, The Next) बनाने वाले बिल्डर ने सीनियर सिटीजन्स की देख-रेख के लिए वसूली गई करीब ढाई करोड़ रुपयों की राशि ट्रस्ट में जमा करवाने की बजाय अपने खाते में जमा करवा ली थी. मामले को वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम के तहत चुनौती दी गई थी जिसपर हाईकोर्ट ने बिल्डर को तत्काल 75 लाख रुपए जमा करवाने का आदेश दिए हैं.

पूर्व मुख्य सचिव और रिटा. जजों से ठगी
अगर आप सोचते हैं कि साल 2007 में बनाए गए वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण और कल्याण अधिनियम के प्रावधान सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों की संतानों पर लागू होते हैं तो ऐसा नहीं है. जबलपुर हाईकोर्ट ने भोपाल में सीनियर सिटीजन्स के साथ एक बिल्डर द्वारा की गई धोखाधड़ी को भी वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण और कल्याण अधिनियम का उल्लंघन माना है. दरअसल भोपाल के एजी-8 वेंचर्स बिल्डर ने साल 2010 में भोपाल में सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों के लिए आकृति ईको सिटी, द नेक्सट बनाई थी. इसमें वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के लिए जरुरी सभी सुविधाएं देने का वादा किया गया था, जिस पर भरोसा करते हुए हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस वीके अग्रवाल, ऊषा शुक्ला और पूर्व मुख्य सचिव आर परशुराम सहित 60 सीनियर सिटीजन्स ने आकृति टाऊनशिप में मकान खरीद लिया था.

News - जबलपुर हाई कोर्ट ने बिल्डर को वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण कानून का दोषी करार दिया
जबलपुर हाई कोर्ट ने बिल्डर को वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण कानून का दोषी करार दिया


बिल्डर के खिलाफ जीती जंग
मकान खरीदने वाले सीनियर सिटिजन्स से सुविधाओं के एवज में करीब ढाई करोड़ रुपयों की राशि वसूली गई थी. बिल्डर को ये राशि सोसाईटी ट्रस्ट के खाते में जमा करवानी थी, लेकिन उसने ऐसा करने की बजाय पूरी राशि अपनी कंपनी के खाते में जमा कर ली और सीनियर सिटीजन को बताई गई सुविधाएं तो दूर मूलभूत सुविधाएं भी नहीं दी गईं. ऐसे में सीनियर सिटीजन्स ने बीते 9 सालों तक कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद हाल ही में भोपाल के हुजूर के एसडीएम ने बिल्डर को 1 करोड़ 96 लाख रुपयों की राशि सोसाईटी ट्रस्ट में जमा करवाने के आदेश दिए. लेकिन बिल्डर ने एसडीएम कोर्ट के फैसले को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दे दी.

टाउनशिप के हालात जानने कमीशन की नियुक्ति
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सीनियर सिटीजन्स की तरफ से हाईकोर्ट में जिरह करने वाले वकील सिद्धार्थ सेठ ने आकृति टाऊनशिप में हुई धोखाधड़ी को वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम का भी उल्लंघन बताया. हाईकोर्ट ने दलीलों पर गौर करते हुए सीनियर सिटीजन्स को अंतरिम राहत दी है.

हाईकोर्ट ने बिल्डर को आकृति सीनियर सिटीजन सोसाईटी में फिलहाल 75 लाख रुपयों की राशि जमा करवाने के आदेश दिए हैं. जिसके साथ ही कोर्ट ने टाऊनशिप के असली हालात जानने के लिए कोर्ट कमीशन नियुक्त करने की भी मंशा जताई है.

बिल्डर की दलील खारिज़
हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डर की ओर से दलील दी गई थी कि सीनियर सिटीजन्स के प्रति उसकी देनदारी को वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण और कल्याण अधिनियम के तहत चुनौती नहीं दी जा सकती, लेकिन हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद मामले को इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन माना और बिल्डर को फिलहाल 75 लाख रुपए जमा करवाने के आदेश दिया. इधर आकृति ईको सिटी में मकान खरीदकर बिल्डर के हाथों ठगे गए सीनियर सिटीजन्स ने हाईकोर्ट के आदेश पर आभार जताते हुए उम्मीद जताई है कि अब प्रदेश की सबसे बडी अदालत से उन्हें पूरा न्याय मिल सकेगा.

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First published: September 15, 2019, 11:34 AM IST
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