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मध्य प्रदेश में क्या बाबा रामदेव के साथ राजनीतिक संभावना तलाश रही है कांग्रेस

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बाबा रामदेव के पिछले कुछ दिनों से आ रहे उनके राजनीतिक रुख़ बदलने के संकेत दे रहे थे. हाल ही में उन्होंने बेरोज़गारी के मुद्दे पर उन्होंने बीजेपी सरकार पर उंगली उठायी थी.

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यह बहुत दूर की कौड़ी है. लेकिन फिर भी ऊंचे राजनीतिक स्तर पर इस बात की गरम चर्चा है कि क्या कांग्रेस और बाबा रामदेव के बीच कोई राजनीतिक संभावना बनती दिख रही है. बाबा रामदेव के हाल –फिलहाल के बयानों पर जाए तो साफ तौर पर नजर आ रहा है कि उन्होंने भी गांधी परिवार को लेकर यू-टर्न ले लिया है. बल्कि यहां तक कह दिया है कि उनके राहुल गांधी से दोस्ताना रिश्ते हैं और राहुल ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जान फूंक दी है.

राहुल के कैंपेन में साधु –महंत
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सितंबर में ओंकारेश्वर मंदिर से अपना चुनाव अभियान शुरू करेंगे. गुजरात, कर्नाटक के बाद मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में सॉफ्ट हिंदुत्व का फॉर्मुला ज़मीन पर उतारा जाएगा. इसकी तैयारी ज़ोंरो पर है. ओंकारेश्वर नर्मदा का किनारा है और यह साधु- संतों महंतों का गढ़ है. राहुल के साथ इस अभियान में कई महंत–साधु हिस्सेदारी करें इसकी तैयारी चल रही है. कर्नाटक में जिस रथ पर राहुल ने केंपेन किया था उसे भी मध्यप्रदेश में लाया जा रहा है.

गांधी परिवार की तारीफ
इसी बीच बाबा रामदेव से बेहतर हुए रिश्तों को लेकर भी कांग्रेस नेता उत्साह में है. एक वरिष्ठ नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के कारण गांधी परिवार और रामदेव के बीच रिश्ते बेहतर हुए हैं. उन्होंने अपने पुराने बयानों से यू –टर्न लेते हुए गांधी परिवार की आलोचना बंद कर दी है. योग के ब्रांड एंबेसेडर रामदेव अब कहने लगे हैं कि – यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल नियमित योग करते हैं. एक समारोह में उन्होंने खुलकर कहा कि बीजेपी के मंत्री अहंकारी हैं. राहुल गांधी की पीएम मोदी को दी गई झप्पी के बारे में जब बाबा रामदेव से सवाल किया गया तो उन्होंने इसकी जमकर तारीफ की और  कहा कि वो उन्हें अच्छा लगा. राजनीति में विरोध होता है मनभेद नहीं होता.



अखिलेश की अहम भूमिका
रामदेव के इस रुख़ को कांग्रेस, हिंदी बेल्ट के तीनों राज्यों में आगे तक ले जाना चाहती है. उक्त नेता का कहना है कि इस बात की संभावना को तलाशा जा रहा है कि किस तरह गैर राजनीतिक मंच पर रामदेव के साथ कांग्रेस की सौहार्द्रता का प्रदर्शन आम जनता में हो सके. इस कड़ी में अखिलेश परदे के पीछे कोई भूमिका निभा सकते हैं.

यादवों का मंच साझा कर सकते हैं
अखिलेश यादव ने हाल ही में मध्यप्रदेश का दौरा कर यादव और ओबीसी वर्ग को इकट्‌ठा कर बड़ी ताकत दिखाई है. अखिलेश के इस कार्यक्रम के सूत्रधार कांग्रेस के नेता अरुण यादव थे. बताया जा रहा है कि अखिलेश की सलाह पर ही यादव को मध्यप्रदेश का ओबीसी चेहरा प्रोजेक्ट किया जा रहा है. राहुल गांधी के चुनाव केंपेने का इंचार्ज उन्हें बनाया गया है. यादव का इलाका खरगोन निमाडृ की 22 विधानसभा सीटे हैं. जहां ओबीसी आदिवासी एक बड़ा फैक्टर हैं. बाबा रामदेव जो कि यादव हैं, वे किसी ओबीसी यादव मंच को इन नेताओं के साथ साझा कर सकें इसकी तैयारी चल रही है.

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