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SC के आदेश के बाद भी मध्यप्रदेश में नहीं गूंजी गिर के शेरों की दहाड़

SC के आदेश के बाद भी मध्यप्रदेश में नहीं गूंजी गिर के शेरों की दहाड़

मध्यप्रदेश के जंगलों में गिर के शेरों की दहाड़ सुनना मुश्किल होता दिख रहा है. सु्प्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी राज्य के कूनो-पालपुर में एशियाई शेरों को बसाने की योजना का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है.

मध्यप्रदेश के जंगलों में गिर के शेरों की दहाड़ सुनना मुश्किल होता दिख रहा है. सु्प्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी राज्य के कूनो-पालपुर में एशियाई शेरों को बसाने की योजना का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है.

मध्यप्रदेश के जंगलों में गिर के शेरों की दहाड़ सुनना मुश्किल होता दिख रहा है. सु्प्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी राज्य के कूनो-पालपुर में एशियाई शेरों को बसाने की योजना का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है.

    मध्यप्रदेश के जंगलों में गिर के शेरों की दहाड़ सुनना मुश्किल होता दिख रहा है. सु्प्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भी राज्य के कूनो-पालपुर में एशियाई शेरों को बसाने की योजना का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है.

    गुजरात गिर के शेरों का नया आशिया मध्यप्रदेश को बनाने के सु्प्रीम कोर्ट के निर्देश पर अमल नहीं हो पा रहा है. अब तक शेर नहीं देने के मामलें में गुजरात सरकार को कोसने वाली राज्य सरकार की सुस्त चाल अब इसमें बड़ा रोड़ा बन गई है.

    सु्प्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी टेक्निकल कमेटी ने प्रदेश के कूनो-पालपुर अभ्यारण्य को शेरों की बसाहट के लिए मौजूदा जगह को नाकाफी बताते हुए उसमें विस्तार की जरुरत बताई है. लेकिन राज्य सरकार अभ्यारण्य के विस्तार के आड़े आ रहे दो गांव के विस्थापन में रुचि नहीं दिखा रही है. इसके कारण गुजरात से शेर लाने की योजना अटक गई है.

    प्रदेश के कूनो पालपुर अभ्यारण्य में बसाये जाने वाले एशियाटिक लायन की खासियत पर नजर डालें तो

    -कभी ये प्रजाति देश के कई हिस्सों में पाई जाती थी
    -लेकिन अब शेर गुजरात के गिर में ही बचे है.
    -शेर झुंड में रहने वाला प्राणी है और ये 20 से 22 तक के झुंड में रहता है.
    -इसकी लंबाई ढाई से तीन तक और वजन 180 से 225 किलोग्राम होता है,
    -शेर के पंजों के नीचे गद्दियां होती है जिसकी मदद से ये जंगल में बिना किसी आवाज के चल सकता है
    -शेर 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भाग सकता है.
    -12 फीट ऊंची और 40 फीट लंबी छलांग लगाने में माहिर होता है.
    शेर खुले मैदानों में रहने वाले प्राणी है. यहीं कारण है कि कूनो पालपुर अभ्यारण्य का बड़ा वनक्षेत्र इसके लिए बिलकुल अनुकूल है.

    वहीं कूनो पालपुर में शेरों को बसाने के लिए सरकार अब तक 17 गांव के 1600 परिवारों की विस्थापन कर चुकी है. सरकार इसके लिए 25 करोड़ से ज्यादा राशि खर्च कर चुकी है, लेकिन अब अभ्यारण्य के विस्तार में सरकार सुस्त गति से काम कर रही है.

    सु्प्रीम कोर्ट के फैसले से ये तय हो गया है कि प्रदेश का कूनो-पालपुर अभ्यारण्य गिर के शेरों का दूसरा घर होगा. और लोगों को एशियाटिक लायन के दीदार मध्यप्रदेश में ही हो सकेंगे. लेकिन ये कितने जल्दी मुमकिन होगा.ये राज्य सरकार के योजना को अमल में लाने की गंभीरता पर निर्भर करेगा.

    Tags: Supreme Court

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