मुआवजे के लिए भोपाल गैस कांड के पीड़ितों ने लगाई राष्ट्रपति से गुहार
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मुआवजे के लिए भोपाल गैस कांड के पीड़ितों ने लगाई राष्ट्रपति से गुहार
प्रतीकात्मक तस्वीर

भोपाल गैस कांड के पीड़ितों ने मुआवजे के लिए राष्ट्रपति से गुहार लगाई है. भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों ने हर गैस पीड़ित को मुआवजे के तौर पर 5 लाख रुपए दिलवाने का वादा किया है लेकिन मौतों और बीमारियों के आंकड़े में सुधार हुए बिना यह संभव नहीं है.

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केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के रवैये से निराश भोपाल गैस कांड के पीड़ितों ने राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर जल्द मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई है. उल्लेखनीय है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रतिनिधियों ने भोपाल के हर गैस पीड़ित को मुआवजे के तौर पर 5 लाख रुपए दिलवाने का वादा किया है. यह तभी पूरा किया जा सकता है जब केंद्र और प्रदेश सरकार के स्तर से सुप्रीम कोर्ट में पेश मौतों और बीमारियों के आंकड़े को सुधारा जाए.

भोपाल गैस पीड़ितों के चार संगठनों के नेताओं ने मार्च में एक पत्रकार वार्ता की थी. इन नेताओं ने कहा था कि केंद्र और प्रदेश की सरकारें अतिरिक्त मुआवजे के लिए लगाई गई सुधार याचिका में सुधार करें.
भोपाल गैस पीड़ित महिला-पुरुष संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष नवाब खान का कहना है कि इसी साल जनवरी में राज्य के मुख्य सचिव को पत्र भेजा था लेकिन उसका जवाब नहीं आया. उनका कहना है कि पत्र में उन दस्तावेजी सबूतों का जिक्र किया था, जो ये दिखाते हैं कि दिसंबर 1984 में मिथाइल आइसोसायनेट (एमआईसी) गैस की वजह से पीड़ितों को पहुंचे नुकसान की सही जानकारी प्रदेश सरकार जानबूझकर छिपा रही है और सुप्रीम कोर्ट को गुमराह कर रही है. हमने उनसे गुजारिश की कि वे सरकारी दस्तावेजों और अस्पतालों के रिकॉर्ड से गैस कांड की वजह से हुई मौतों और बीमारियों के सही आंकड़े जुटाएं.

भोपाल ग्रुप फॉर इन्फॉर्मेशन एंड एक्शन नाम के संगठन की रचना ढींगरा की भी शिकायत है कि उन्होंने जनवरी में भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री को चिट्ठी लिखकर मौतों और बीमारियों के सही आंकड़े जुटाने और उन आंकड़ों को रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय को उपलब्ध करने की मांग की थी पर आज तक जवाब नहीं मिला.
हजारों लोगों को मौत के मुंह में धकेलने वाली 1984 की भोपाल गैस त्रासदी दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक है. संयुक्त राष्ट्र की श्रम एजेंसी अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) की रिपोर्ट में कहा गया है कि भोपाल में यूनियन कार्बाइड के कीटनाशक संयंत्र से निकली कम से कम 30 टन मिथाइल आइसोसायनेट गैस से छह लाख से ज्यादा मजदूर और आसपास रहने वाले लोग प्रभावित हुए थे.



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